दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल में शामिल डॉक्टर्स के जमीनी मददगारों पर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी बड़ा एक्शन लेने की तैयारी में है। ये वो लोग हैं, जिन्होंने आतंकी मॉड्यूल को लॉजिस्टिक सपोर्ट, शेल्टर, वाहन और फाइनेंस मुहैया कराया। हरियाणा में फरीदाबाद-नूंह-गुरुग्राम के अलावा यूपी के लखनऊ, कानपुर, सहारनपुर और जम्मू-कश्मीर में ऐसे संदिग्धों की लिस्ट तैयार की गई है। एनआईए को सबूत मिले हैं कि यूपी और हरियाणा के कई शहरों में इनसे जुड़े ये वर्कर सक्रिय थे। फरीदाबाद से जांच एजेंसी ने दर्जन भर ऐसे लोगों को हिरासत में लिया है, जिन पर इनको मदद करने का आरोप है। यह पहले ही सामने आ चुका है कि डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. शाहीन सईद और डॉ. उमर नबी मरीजों की मदद के बहाने ऐसे शिकार ढूंढते थे, जिनका वो जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सकें। ये डॉक्टर मरीजों के घर तक पहुंच जाते थे और उनके परिवार का बारीकी से जायजा लेते थे। ब्लास्ट में डॉक्टर नेटवर्क
NIA की जांच में सामने आया है कि दिल्ली ब्लास्ट में पूरा एक डॉक्टर नेटवर्क काम कर रहा था। ये डॉक्टर सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए अस्पतालों, क्लीनिकों और मेडिकल सेटअप को कवर की तरह इस्तेमाल कर रहे थे। इस नेटवर्क में अच्छे पढ़े-लिखे लोगों को शामिल किया गया था। आतंकी मॉड्यूल की B टीम पर बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी
NIA की प्रारंभिक जांच अभी लखनऊ, कानपुर, सहारनपुर, फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर पर केंद्रित है। इनमें जांच एजेंसियों के लगातार हाई-इंटेंसिटी रेड और इंटेलिजेंस ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक इस आतंकी मॉड्यूल की बी टीम पर बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी है। इसमें वो लोग शामिल हैं, जो सीधे धमाके में शामिल नहीं रहे, लेकिन इस आतंकी मॉड्यूल में शामिल डॉक्टर्स को छुपाने और सपोर्ट में सक्रिय थे। उनकी पहचान हो चुकी है। मेडिकल इंस्टीट्यूट को आतंकी बनाते थे कवर
जांच में सामने आया है कि ये लोग अस्पतालों और मेडिकल इंस्टीट्यूट का इस्तेमाल एक कवर की तरह कर रहे थे। फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी को एक कवर के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। जहां पर इन आतंकी डॉक्टरों ने विस्फोटक और हथियारों को छिपाया था। यहीं से 2900 किलो विस्फोटक सामग्री को गांव धौज और गांव फतेहपुरा तगा में शिफ्ट किया गया था। फरीदाबाद और सहारनपुर में बरामद वाहनों की फोरेंसिक जांच पूरी कर ली गई है। कानपुर में किराए के मकानों, संभावित सेफ हाउस और संदिग्ध मेडिकल इंस्टीट्यूट की तलाश जारी है। सूत्रों के अनुसार, चैट, कॉल डेटा और डिजिटल फुटप्रिंट ने साफ किया है कि यह आतंकी नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था। अल फलाह यूनिवर्सिटी की वीसी फाइनल ईयर के छात्रों से मिलीं
अल-फलाह यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर भूपिंदर कौर आनंद ने दोबारा से एमबीबीएस फाइनल ईयर के छात्रों से मुलाकात की है। स्टूडेंट से बातचीत के दौरान वीसी ने कहा कि यूनिवर्सिटी की तरफ से सभी मामले पूरी तरह से सुलझा लिए गए है। स्टूडेंट और जांच एजेंसियों द्वारा उठाई गई हर चिंता का वो समाधान कर रहे हैं। जांच एजेंसियों को सभी दस्तावेज मुहैया करा दिए गए हैं। सभी दस्तावेजों को अधिकारियों द्वारा गहनता के साथ जांचा गया है। छात्रों के भविष्य के साथ किसी प्रकार का कोई खिलवाड़ नहीं किया जा रहा है। एक फाइनल ईयर के छात्र ने बताया कि स्टूडेंट लगातार अपनी पढ़ाई और डिग्री को लेकर चिंता में है। दोबारा से स्टूडेंट में यूनिवर्सिटी को लेकर आक्रोश बढ़ रहा है। अभी भी कश्मीरी प्रोफेसर पूरी तरह से क्लास नहीं ले रहे हैं। छुट्टी पर जाने के बाद कई प्रोफेसर वापस लौटकर नहीं आए हैं। पेरेंटस जल्द दोबारा आएंगे यूनिवर्सिटी
दूसरी तरफ, स्टूडेंट के पेरेंटस भी बच्चों के भविष्य को लेकर लगातार चिंता में हैं। अभिभावक रजनीश ने बताया कि इस बार काफी संख्या में पेरेंटस पहुंचेंगे। पिछली बार जो पत्र उन्होंने यूनिवर्सिटी को लिखा था, उसका कोई रिप्लाई नहीं मिला है। इसको लेकर जल्द ही आने की तिथि की तय की जा रही है। अभिभावकों ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को मामले में हस्तक्षेप करने के लिए पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक संस्थान की मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालयों में स्टूडेंट को स्थानांतरित करने पर विचार करने की अपील की है। अब जानिए ये पांच शहर ही टारगेट क्यों… फरीदाबाद – दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल में फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी सेंटर पाइंट रही है। इसी यूनिवर्सिटी में आतंकी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन और डॉ. उमर नबी नौकरी कर रहे थे। यूनिवर्सिटी के कमरा नंबर 13 में इन्होंने दिल्ली ब्लास्ट की घटना को अंजाम देने का प्लान बनाया। फरीदाबाद के गांव धौज और फतेहपुरा तगा से 2900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी, जो दिल्ली ब्लास्ट में यूज की गई I कार भी फरीदाबाद के एक डीलर से खरीदी गई थी। इन आतंकी डाक्टरों के दूसरे वाहन भी यूनिवर्सिटी से बरामद किए गए थे। लखनऊ – आतंकी मॉड्यूल में शामिल लेडी आतंकी डॉ. शाहीन लखनऊ की रहने वाली है। वह आतंक के इस नेटवर्क में डॉ. मुजम्मिल द्वारा चुने गए लोगों का ब्रेन वॉश करने का काम करती थी। उनका पैतृक घर लखनऊ के डालीगंज इलाके में है, जहां पिता और भाई रहते हैं। आतंकी कनेक्शन सामने आने के बाद, उत्तर प्रदेश एटीएस और एनआईए ने लखनऊ में उनके पैतृक घर और उनके भाई डॉ. परवेज अंसारी के घर पर छापेमारी की। जांच एजेंसियों ने उनके बैंक खातों और यात्रा इतिहास की भी जांच की, जिसमें पता चला कि वह अगस्त 2025 में लखनऊ गई थी। सहारनपुर- जांच एजेंसी ने आतंकी नेटवर्क में शामिल डॉ. आदिल को सहारनपुर से गिरफ्तार किया था। आदिल आतंकी डॉ. मुजम्मिल, लेडी आतंकी डॉ. शाहीन और डॉ. उमर नबी के साथ इस आतंकी घटनाओं में शामिल रहा है। आदिल ने ही विस्फोटक सामग्री फरीदाबाद में एकत्रित करने का सुझाव दिया था। वह पहले जम्मू कशमीर में आतंकी उमर नबी के साथ रेजिडेंट डॉक्टर था। साल 2023 में उमर के साथ वह नौकरी छोड़ पहले दिल्ली और साल 2024 में सहारनपुर आ गया। कानपुर- दिल्ली धमाके के षड्यंत्र में शामिल डॉ. शाहीन के कई करीबी फंडिंग के लिए कई गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के संपर्क में चार माह से ज्यादा थे। वह वर्ष 2006 से 2013 तक जीएसवीएम मेडिकल कालेज कानपुर में फार्माकोलॉजी की प्रवक्ता व विभागाध्यक्ष रही। एजेंसी की जांच में डॉ. शाहीन और संदिग्ध मिले तीन एनजीओ के बैंक खाते में कई संदिग्ध लेनदेन मिले है। एनजीओ के माध्यम से पैसा मंगाने वाले गिरोह का नेटवर्क खाड़ी देश बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात तक है। जम्मू-कश्मीर- आतंकी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. उमर नबी नौकरी और डॉ आदिल ये तीनों जम्मू-कश्मीर में अलग -अलग जगहों के रहने वाले हैं। डॉ. उमर नबी नौकरी और डॉ आदिल अनंतनाग के एक अस्पताल में नौकरी करते थे। डॉ. आदिल मूल रूप से कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपुर का रहने वाला है। 17-18 अक्टूबर को श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगाए जाने की घटना सामने आई थी। पुलिस की जांच में पता चला कि पोस्टर लगाने वाला शख्स आदिल ही था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को आदिल के घर के हथियार भी बरामद हुए थे। ———————– ये खबर भी पढ़ें… आतंकी डॉ. आदिल की वॉट्सएप चैट सामने आई:अस्पताल प्रबंधन के सामने गिड़गिड़ाया, विस्फोटक के लिए सैलरी से ₹8 लाख दिए दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल में शामिल डॉक्टर्स विस्फोटक जुटाने के लिए सैलरी से पैसा देते रहे। गिरफ्तार डॉक्टरों की बैंकिंग डिटेल और मोबाइल रिकॉर्ड से इसके सबूत मिले हैं। सहारनपुर के फेमस मेडिकेयर अस्पताल में काम करने वाले डॉ. आदिल अहमद की वॉट्सऐप चैट भी सामने आई है, जिसमें वह एडवांस सैलरी के लिए गिड़गिड़ा रहा है। (पूरी खबर पढ़ें)