गुरुग्राम में हवा फिर से बेहद खराब कैटेगरी में है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के के ग्वाल पहाड़ी मॉनिटरिंग सेंटर में रविवार सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 325 तक पहुंच गया। जिसमें पिछले 24 घंटे के दौरान पीएम2.5 का हाईलेवल 457 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। जबकि पीएम 10 का हाईलेवल 446 रहा। प्रदूषण का स्तर कम नहीं होने के चलते स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सुबह व शाम की सैर बंद करने की सलाह दी है। खासकर बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को सैर तत्काल बंद करने को कहा है। वहीं स्कूलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे पांचवीं तक के बच्चों की ऑनलाइन क्लास जारी रखें। हालांकि प्रदूषण रोकने के लिए अधिकृत एजेंसियों की लापरवाही भी सामने आ रही है। खासकर नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई की सड़कें खराब है और कूड़ा निपटारा व्यवस्था भी बदहाल है। जानिए क्यों कम नहीं हो रहा गुरुग्राम में प्रदूषण…… निर्माण कार्य पर कोई सख्ती नहीं: GRAP-3 लागू होने के बावजूद शहर में बिल्डर और रोड प्रोजेक्ट बिना कवरिंग, पानी छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन के चल रहे हैं। MCG ने अब तक सिर्फ 200 के करीब चालान काटे, जो नाकाफी हैं। वाहनों का धुआं: सड़कों पर वाहनों की संख्या कम नहीं हो रही। डीजल वाहनों पर पाबंदी का पालन सिर्फ कागजों तक सीमित है। रात में हजारों बाहर के ट्रक शहर से निकलते हैं। जिनका खतरनाक धुआं प्रदूषण बढ़ाने में सहायक है। कचरा जलाना और उद्योगों का धुआं: सेक्टर-88, 89, कादरपुर, मानेसर, दौलताबाद जैसे इलाकों में रोज कचरा खुले में जलाया जा रहा है। मानेसर-धारूहेड़ा इंडस्ट्रियल बेल्ट की स्मॉल और मीडियम उद्योगों का धुआं प्रदूषण फैला रहा है। सड़कों की धूल: शहर में बड़ी संख्या में सड़कें या तो टूटी हुई हैं या बार-बार खोदी जा रही हैं। MCG के पास सिर्फ 18 मैकेनिकल स्वीपर और 6 वॉटर टैंकर हैं। इतने से दो हजार किमी से ज्यादा की सड़कें साफ नहीं हो सकतीं। जिससे प्रमुख चौक चाैराहों और सड़कों पर दिन भर धूल का गुबार रहता है। छिड़काव भी सही से नहीं हो रहा है। मौसम अनुकूल नहीं: नवंबर में हवा की गति बहुत कम 5 से 8 किमी प्रति घंटा है। हवा में नमी से प्रदूषक जमीन के पास ही फंस जा रहे हैं। अगले 5-7 दिन तक बारिश की कोई संभावना भी नहीं है। हेल्थ को लेकर सावधानी जरूरी बरतें नारायणा अस्पताल में कार्डियोलॉजी के वरिष्ठ निदेशक और कार्यक्रम प्रमुख डॉ. (प्रो.) हेमंत मदान ने बताया कि पीएम2.5 फेफड़ों में जमा होकर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोगों को ट्रिगर कर रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है। अस्पतालों में सांस संबंधी शिकायतों के केस 30% बढ़ गए हैं। अगर कहीं बाहर जाना जरूरी है तो मास्क का प्रयोग करें। यदि तत्काल कदम न उठाए तो दिसंबर में हालात और बिगड़ सकते हैं। इसलिए फिलहाल सावधानी बरतनी बेहद जरूरी है। डीसी बोले- सुधार की जरूरत है डीसी अजय कुमार का कहना है कि जिले में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई क्षेत्रों में अब भी व्यापक सुधार की आवश्यकता है और प्रशासन इन सभी खामियों को चिह्नित करते हुए लगातार निगरानी, फील्ड निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने बताया कि शहरी स्थानीय निकायों, ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े विभागों, नगर नियोजन इकाइयों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ कोआर्डिनेशन बढ़ाया जा रहा है, ताकि जमीन पर कार्य गति पकड़े और प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति अधिक प्रभावी तरीके से लागू हो सके। संस्थाओं का सहयोग मिल रहा उन्होंने नागरिक समाज, विभिन्न आरडब्ल्यूए, स्वयंसेवी संगठनों, युवा समूहों और तकनीकी संस्थानों से कहा कि इन संगठनों द्वारा उठाए गए मुद्दों, नियमित फीडबैक और सक्रिय भागीदारी ने प्रशासन को वास्तविक समस्या-क्षेत्रों की पहचान करने में बड़ी मदद की है। उनके प्रयासों और जन-जागरूकता अभियानों की बदौलत जिले में प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित पहलें अधिक सशक्त हुई हैं। युवा आगे आ रहे हैं डीसी ने कहा कि सबसे उत्साहजनक बात यह है कि युवा पर्यावरणीय मुद्दों पर गंभीरता से विमर्श कर रहे हैं, समाधान खोज रहे हैं और समाज को जागरूक करने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब युवा शक्ति इस अभियान का नेतृत्व कर रही हो, तो बदलाव निश्चित ही जल्दी और सकारात्मक रूप में दिखाई देगा।