गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे का टोल शुरू होने के साथ ही दिल्ली-गुरुग्राम को जोड़ने वाली बजघेड़ा-छावला सड़क पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। टोल से बचने के लिए भारी संख्या में कॉमर्शियल वाहन और बड़े ट्रक ऑप्शनल रास्ता अपना रहे हैं, जिसके कारण बजघेड़ा-छावला रोड के दिल्ली बॉर्डर पर भीषण जाम लग रहा है। सुबह छह बजे से आधी रात तक वाहनों की कतारें दो किमी से ज्यादा लंबी हो रही है। जिसके कारण वाहन चालकों को दिक्कत हो रही है। इस जाम में एम्बुलेंस और रोडवेज की बसें भी फंस रही हैं, जिसके चलते यात्री परेशान हैं। एक महीने में ही ‘शॉर्टकट’ बना नासूर द्वारका एक्सप्रेसवे पर कारों के लिए कम से कम एक तरफ का टोल 220 रुपए और भारी वाहनों के लिए 400 रुपए है। जबकि भारी ट्रकों के लिए यह और भी ज्यादा है। ट्रक ऑपरेटर और लॉजिस्टिक्स कंपनियां इस खर्च को बचाने के लिए पुराने रास्तों का सहारा ले रही हैं। एक महीने पहले टोल शुरू होने के बाद बजघेड़ा से छावला, धूलसिरस, खरखरी नाहर, न्यू पालम रोड होते हुए दिल्ली में घुसने के रास्ते पर अब ट्रकों लाइन लगी रहती है। पहले ट्रैफिक कम था बजघेड़ा निवासी सुरेंद्र ने बताया कि पहले इस रोड पर दिन में मुश्किल से 20-30 ट्रक दिखते थे। अब तो हर मिनट 10-15 ट्रक गुजरते हैं। छावला रोड के पास बने एमसीटी चेकपोस्ट पर अब रोजाना 15 से 20 हजार कमर्शियल वाहन एंट्री ले रहे हैं, जबकि पहले यह आंकड़ा 5 से 7 हजार था। नजफगढ़-बहादुरगढ़ जाने का रास्ता स्थानीय निवासी राकेश राणा ने बताया कि दिल्ली के नजफगढ़ और बहादुरगढ़ की तरफ जाने का यह प्रमुख रास्ता है। लोगों को सुबह घर से निकलते ही जाम दिखाई देता है। सुबह 8 बजे घर से निकलकर भी लोग 10 बजे तक अपने दफ्तर नहीं पहुंच पाते। बजघेड़ा-छावला रोड दो लेन का संकरा मार्ग है, जिसे कभी ग्रामीण सड़क के तौर पर बनाया गया था। लोगों ने बताया कि अब इस पर 40 से 50 फीट लंबे ट्रेलर, कंटेनर और ओवरलोड ट्रक तक चल रहे हैं। सड़क के दोनों तरफ बने मकान और दुकानें अब हर समय धूल और धुएं में डूबी रहती हैं। स्कूल की बसें सुबह 6 बजे निकलती हैं, बच्चे 8 बजे तक नहीं पहुंच पाते। कई बार तो एम्बुलेंस भी जाम में फंसी रहती है। ग्रामीणों की टोल में छूट की मांग राकेश राणा ने बताया कि दिल्ली और हरियाणा के करीब 10 गांवों को टोल में छूट दी जानी चाहिए।ताकि वे बिना जाम में फंसे निकल सकें। बजघेड़ा, धूलसिरस, बिजवासन, दौलतपुर समेत करीब दर्जन गांवों के लोग एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि द्वारका एक्सप्रेसवे उनके खेतों और जमीन को काटकर बनाया गया। अब ट्रैफिक का बोझ भी इन्हीं गांवों पर डाला जा रहा है। जिन गांवों की जमीन ली गई, उन गांवों के वाहनों को एक्सप्रेसवे पर मुफ्त आने-जाने की छूट मिलनी चाहिए। वहीं एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने बताया कि टोल से बचने वाले वाहनों को रोकने के लिए एक्सप्रेसवे पर कुछ और एक्सेस पॉइंट्स खोलने की योजना है, लेकिन अभी कोई तारीख तय नहीं है।