जगजीत डल्लेवाल ने पंजाब सीएम को घेरा:अपने गांव पहुंचे, बोले-केजरीवाल को बचाने के लिए पीठ में छुरा मारा; मोदी पर भी हमला

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल आज (वीरवार को) पटियाला के अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अपने पैतृक गांव डल्लेवाल में हुई किसान महापंचायत में पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने पंजाब सीएम भगवंत मान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा। उन्होंने कहा कि भगवंत मान ने केवल केजरीवाल को बचाने के लिए सारे पंजाब की पीठ में छुरा मारा है। क्योंकि फसली विविधीकरण तभी संभव है, जब फसलों पर एमएसपी मिलेगी। इसके बिना पंजाब के पानी को नहीं बचाया जा सकता है। माहिर कहते हैं कि पंजाब में 15 से 18 साल तक पानी शेष रह गया है। इसका मतलब है कि पंजाब रेगिस्तान बन जाएगा। आंदोलन से केंद्र पर बन रहा था दबाव : डल्लेवाल वहीं, उन्होंने कहा कि आंदोलन से केंद्र सरकार पर दबाव बन गया था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अमेरिका से एक नया समझौता करने की फिराक में है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहना चाहते हैं कि वह 56 इंच की छाती का दावा करते हैं। यह बात हम उस समय मान लेंगे जब वह अमेरिका के राष्ट्रपति के आगे कह देंगे कि वह उनकी शर्तें नहीं मानने के लिए तैयार नहीं हैं। अगर, अमेरिका के आगे घुटने टेक दिए हैं तो फिर हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम खड़े रहें। उन्होंने कहा कि बाहर से दूध, अनाज व अन्य उत्पाद आने हैं। ऐसे में हमें लड़ाई लड़नी होगी। यह हमारी पीढ़ियों को बचाने की जरूरत है। यह हमारी बच्चों की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि हर रोज सीखते है। उन्होंने कहा कि उन्हें 40 साल का अनुभव था कि जब सरकार मीटिंग के लिए बुला लेती है तो मोर्चे पर हमला नहीं करते हैं। लेकिन हमारी गलती थी। सामान तलाशने वालों को परेशान किया तो किसान लेंगे एक्शन वहीं, उन्होंने साफ किया है कि इस आंदोलन को पूरे देश में लेकर जाएंगे। डल्लेवाल ने कहा कि किसानों की चोरी हुई ट्रॉलियां व सामान का तलाशने वाले लोगों को बेवजह तंग किया तो किसान एक्शन लेंगे। अब वह जिला फरीदकोट स्थित अपने गांव डल्लेवाल जा रहे है, जहां किसान महापंचायत में शामिल होंगे और किसानों को दो मिनट का संदेश देंगे। किसान नेता अभिमन्यु सिंह कोहाड़ ने बताया कि किसान आंदोलन को तेज करने के लिए अप्रैल से मई तक डल्लेवाल के कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल तैयार कर लिया गया है। ये कार्यक्रम पंजाब और हरियाणा में आयोजित होंगे, जिसमें डल्लेवाल हिस्सा लेंगे। इससे पहले कल पटियाला में किसानों की अहम मीटिंग हुई थी। मोर्चे को हटाए जाने के बाद पहली बार सारे किसानों ने मीटिंग की थी। अप्रैल महीने में ऐसे चलेगा संघर्ष फसलों की एमएसपी की लीगल गारंटी सहित 13 मांगों लेकर जगजीत सिंह डल्लेवाल 26 नवंबर से आमरण अनशन पर चल रहे हैं। उनका आमरण अनशन 129वें दिन में प्रवेश कर गया था। किसान डल्लेवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, संघर्ष इसी तरह जारी रहेगा। डल्लेवाल 3 अप्रैल को फरीदकोट स्थित डल्लेवाल महापंचायत में शामिल होंगे। 4 अप्रैल को दाना मंडी (फिरोजपुर-मोगा), 5 अप्रैल को चप्पड़ (पटियाला), 6 अप्रैल को सहहिंद (मोहाली), 7 अप्रैल को धनौला (बरनाला), 8 अप्रैल को दोदा (मुक्तसर साहिब), 9 अप्रैल को फाजिल्का, 10 अप्रैल को अमृतसर तथा 11 अप्रैल को मानसा में कार्यक्रम आयोजित होंगे। किसानों को हिरासत में लेकर मोर्चे हटाए
किसानों की ओर से 13 फरवरी 2024 को दिल्ली की ओर पटियाला के शंभू और खनौरी बॉर्डर से कूच की गई थी, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें वहीं रोक दिया तथा सीमा पर पक्के बैरिकेड लगा दिए। इसके बाद, किसानों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ेंगे और दोनों मोर्चों पर पक्का मोर्चा लगा दिया गया। इसी बीच, 19 मार्च 2025 को जब किसान केंद्र सरकार से मीटिंग के लिए आए थे, तो मीटिंग के बाद वापस जाते समय पंजाब पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके पश्चात शंभू और खनौरी से मोर्चे हटा दिए गए। विधानसभा में उठा मुद्दा, HC भी पहुंचा डल्लेवाल को हिरासत में के बाद पहले पटियाला फिर जालंधर के पिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था; वहा मीडिया के जमावड़े के बाद उन्हें पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में शिफ्ट कर दिया गया। 23 मार्च को उन्हें पटियाला शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि, डल्लेवाल के परिवार व किसानों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं थी। इसके बाद यह मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंचा। साथ कहा कि वह भी हमारे हिरासत में नहीं है। वहीं, उनसे परिवार मिल सकता है। किसानों को हिरासत में लेने के बाद डल्लेवाल ने पानी पीना भी छोड़ दिया था, जबकि 28 मार्च को किसानों को रिहा कर दिया गया। इसके बाद, डल्लेवाल ने फिर से पानी पीना शुरू कर दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार ने कहा कि डल्लेवाल अनशन खत्म कर दिया। लेकिन किसानों ने कहा कि अनशन नहीं तोड़ा है। हालांकि किसानों ने दावा किया मोर्चे हटाने के बाद 135 ट्रॉलियां चोरी हुई। मामला पंजाब विधानसभा से लेकर संसद तक यह मामला उठा।

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