धर्मशाला में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 55.78 लाख रुपए की लागत से निर्मित स्टील फुटब्रिज पिछले 7 साल से सार्वजनिक उपयोग में नहीं है। यह फुटब्रिज वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों की सड़क सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन अब यह केवल पोस्टर और बैनर लगाने का स्थान बनकर रह गया है। इस फुटब्रिज का एक सिरा लोक निर्माण विभाग (PWD) के आवासीय परिसर की दीवार के भीतर स्थित है, जिससे आम जनता की पहुंच वहां तक संभव नहीं है। PWD धर्मशाला डिवीजन के एक्सईएन ने बताया कि फुटब्रिज खोलने के संबंध में कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है और स्मार्ट रोड बनने के बाद ही इसका उपयोग हो सकेगा। सांसद निधि और स्मार्ट सिटी फंड से बना फुटब्रिज परियोजना पर कुल 45 लाख रुपए सांसद निधि से और 10.83 लाख रुपए स्मार्ट सिटी फंड से खर्च किए गए थे। सांसद निधि के उपयोग में अनियमितता भी सामने आई हैं। साल 2018 में, जिला योजना अधिकारी, कांगड़ा ने कॉरिडोर में बदलाव कर सिद्धबाड़ी फुटब्रिज के लिए स्वीकृत राशि को कचहरी अड्डा चौक के फुटब्रिज पर खर्च कर दिया। नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने इस पर पहले भी आपत्ति जताई थी, लेकिन इसे रोका नहीं गया। गलत स्थान पर बनाया गया- पूर्व मेयर पूर्व मेयर दविंदर जग्गी ने फुटब्रिज की विफलता पर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह फुटब्रिज गलत स्थान पर बनाया गया है, इसका डिजाइन वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के लिए जटिल है, और एक छोर चारदीवारी के अंदर होने के कारण यह जनता की पहुंच से बाहर है। जग्गी के अनुसार, यह परियोजना शुरू से ही फिजूलखर्ची थी और सरकारी धन का दुरुपयोग है। सात साल बीत जाने के बाद भी यह फुटब्रिज बंद पड़ा है। इस बीच, शहर में यातायात लगातार बढ़ रहा है और लोगों को सड़क पार करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह फुटब्रिज स्मार्ट सिटी की कमजोर और असामयिक योजना का एक स्पष्ट उदाहरण बन गया है।