भिवानी की बॉक्सर नूपुर श्योराण ने वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल 2025 में गोल्ड मेडल जीतकर अपने ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया है। इससे पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड से चूक कर सिल्वर मेडल जीतने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया गया था। नूपुर ने कहा कि जब देश के लोगों ने ही ट्रोल किया तो बहुत दुख हुआ, लेकिन अब उसी आलोचना को उन्होंने अपनी ताकत बना लिया। अब एशियन, कॉमनवेल्थ और ओलिंपिक पर नजर दैनिक भास्कर एप से बातचीत में नूपुर श्योराण ने बताया कि अब वह एशियन, कॉमनवेल्थ और ओलिंपिक खेलों की तैयारी में जुटेंगी। इसके लिए वे करीब 8 से 9 किलो वजन घटाने की योजना बना रही हैं। उन्होंने बताया कि वे न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की मदद से डाइट प्लान तैयार कर रही हैं ताकि 75 किलोग्राम भारवर्ग में उतर सकें। वर्तमान में वे 80 प्लस भारवर्ग में खेलती हैं, जबकि इन प्रतियोगिताओं में अधिकतम 75 किलोग्राम वर्ग तक ही मुकाबले होते हैं। मां के आने से मिली मानसिक मजबूती वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल के अनुभव साझा करते हुए नूपुर ने बताया कि टूर्नामेंट के दौरान वे काफी थक चुकी थीं। मानसिक दबाव इतना बढ़ गया था कि उन्होंने अपनी मां को बुला लिया। नूपुर ने कहा कि उस समय उन्होंने यहां तक कह दिया था कि अगर मां नहीं आईं तो सबकुछ छोड़कर घर लौट जाऊंगी। मां के आने के बाद उन्हें नई ऊर्जा मिली और उसी आत्मविश्वास के साथ उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वर्ल्ड बॉक्सिंग गोल्ड मेडल विजेता बॉक्सर नूपुर श्योराण से बातचीत
रिपोर्टर : कैसा अनुभव रहा?
नूपुर श्योराण : काफी अच्छा था। हर वेट की टॉप 8 खिलाड़ी आई हुई थी।
रिपोर्टर : फाइनल मुकाबला किसके साथ हुआ?
नूपुर श्योराण : फाइनल मुकाबला उज्बेकिस्तान की बॉक्सर के साथ था। 3-2 के साथ जीती। फाइट काफी अच्छी रही।
रिपोर्टर : दूसरे राउंड में हारने के बाद फिर कमबैक किया, उस दौरान कैसा माहौल था?
नूपुर श्योराण : पहला राउंड 4-1 से मैं जीती थी। दूसरा राउंड मुझे लग रहा था कि मैं 5-0 से जीतूंगी। लेकिन 3-2 को प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को जिताया। जिससे आश्चर्य भी हुआ। इसके बाद मेरे कोच एवं पापा संजय श्योराण की तरफ देखा तो उन्होंने बोला “चाल-चाल अटैक ले इब”। हमारी रणनीति थी कि काउंटर मारकर खेलना या अटैक करना। उस समय कहा कि अटैक कर या फॉरवर्ड में खेल।
रिपोर्टर : प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी आपसे लंबी थी, उसके कारण क्या परेशानी हुई?
नूपुर श्योराण : वह खिलाड़ी मेरे से 3-4 इंच लंबी थी। मैं खुद 6 फीट 1 इंच की हूं। मुझे इतनी लंबी खिलाड़ी के साथ खेलने की आदत नहीं है, क्योंकि बहुत कम खिलाड़ी मेरे से लंबे होते हैं। मुझे मेरे जितने या मेरे से लंबाई में छोटे खिलाड़ियों से खेलने की आदत थी। इससे पहले भी उसी खिलाड़ी के साथ लिवरपुर में क्वार्टर फाइनल में उसके साथ फाइट हुई थी। वहां भी हराया था। रिपोर्टर : लिवरपुर में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड से चूक गई थी और सिल्वर मेडल जीता था?
नूपुर श्योराण : जो फाइनल फाइट बिल्कुल एक प्वाइंट से हारी थी। अंदर मलाल था कि गोल्ड ले सकती थी, लेकिन आया नहीं। अब वर्ल्ड कप फाइनल में गोल्ड आया तो संतुष्टि हुई कि गोल्ड मेरा ही है।
रिपोर्टर : लिवरपुर मुकाबला हारने के बाद क्या कई दिन नींद भी नहीं आई?
नूपुर श्योराण : कोई बिल्कुल पास आकर हाथ से छुट जाए तो अंदर मलाल रहता ही है। रात को सोती थी तो दिमाग में यही आता था कि गोल्ड चाहिए था। सुबह उठती तो यही सोच होती थी कि गोल्ड चाहिए था। एक ओवरथिंकिंग भी हो जाती है। अब वर्ल्ड कप में गोल्ड आने के बाद रिलैक्स हूं।
रिपोर्टर : सिल्वर मेडल जीतने के दौरान जब गोल्ड मेडल जीतने का दावा किया तो लोगों ने ट्रोल किया था ओवर कांफिडेंस होकर दावा कर रहे हैं। उनको क्या कहेंगे?
नूपुर श्योराण : उस समय जब ट्रोल किया गया था, मैं सोशल मीडिया बहुत कम चलाती हूं। इसलिए उस समय पता नहीं लगा था। दो-तीन दिन बाद पता लगा था कि मुझे इस बात पर ट्रोल किया गया। मुझे बहुत बुरा लगा था, क्योंकि हमारे देश के ही लोग यह कह रहे हैं कि सिल्वर आया है फिर भी इतना ज्यादा ओवर कांफीडेंस है। बहुत बुरा लगा था। उनको तो कुछ नहीं कहना चाहूंगी। पर, उनको यह दिखाना चाहती हूं कि जो मैंने कहा था वह कर दिया।
रिपोर्टर : आगे क्या लक्ष्य हैं?
नूपुर श्योराण : अभी एशियन गेम व कॉमनवेल्थ गेम हैं, उनके लिए तैयारी शुरू करेंगे।
रिपोर्टर : ओलिंपिक व अन्य बड़े टूर्नामेंट में 80 प्लस भारवर्ग नहीं होता और आप उसी में खेलते हैं। तो कैसे व किस वेट कैटेगरी में खेलेंगी?
नूपुर श्योराण : उसके लिए वेट लूज करूंगी और 75 किलोग्राम भारवर्ग में आऊंगी। रिपोर्टर : वेट कम करने के लिए क्या कदम उठाएंगे?
नूपुर श्योराण : उसके लिए न्यूट्रीशियन की मदद ली जाएगी। हमारे स्पोर्ट्स पर्सन के मसल मास ज्यादा होता है, फेट कम होता है। मसल मास के साथ वेट लूज करना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए प्रॉपर डाइट चार्ट के साथ काम किया जाएगा और ट्रेनिंग भी मोडिफाई करनी पड़ेगी।
रिपोर्टर : वेट कम करेंगे तो कमजोरी का भी डर रहता है। उससे कैसे निपटेंगे?
नूपुर श्योराण : करीब 8-9 किलो वेट कम करना पड़ेगा। मुश्किल तो होगा, लेकिन करेंगे।
रिपोर्टर : उस वेट कैटेगरी में खेलने वालों को कैसे हराएंगी?
नूपुर श्योराण : अब मेरा वेट 83-84 किलो है। उस वेट कैटेगरी में आउंगी तो मैं फास्ट हो जाऊंगी और स्पीड बढ़ेगी। उसका फायदा मिलेगा।
रिपोर्टर : ओलिंपिक को लेकर क्या सपने हैं?
नूपुर श्योराण : सपना तो ऐसा है कि जब भी कोई खिलाड़ी शुरू करता है और सेंटर पर ट्रेनिंग करने जाता है तो उसके दिमाग में एक ही चीज होती है कि ओलिंपिक में गोल्ड जीतना है। हर खिलाड़ी के मन में बचपन से ही चलता है कि ओलिंपिक।
रिपोर्टर : आपके परिवार में पिता, दादा व मां भी खेल से जुड़े हैं और बॉक्सिंग में बड़े नाम रहे हैं, उसका फायदा हुआ या खेलते समय दबाव रहा?
नूपुर श्योराण : फायदा तो मैं नहीं कहूंगी। फायदा यही है कि मम्मी पापा समझ जाते हैं। नुकसान ही ज्यादा हैं, कि मैं ही ऐसी खिलाड़ी होंगी कि जिसके पास कोई स्पोंसर नहीं हैं। मेरे स्पोंसर मेरे पापा हैं जो मेरा खर्च चलाते हैं। अगर मैं किसी और की बेटी होती तो शायद स्पोंसर मिल जाते।
रिपोर्टर : अब गोल्ड मेडल जीतकर आए हैं, इसको एक शब्द में बयां करना चाहें तो क्या कहेंगे?
नूपुर श्योराण : बहुत अच्छा अनुभव था। कुल मिलाकर मेरा साल था। मैं थक गई थी, मैंने मम्मी को बुला लिया था। मैंने कहा था कि “मम्मी आप चाहते हैं कि मैं यह कंपीटिशन खेलूं, तो वहां पर आ जाएं। नहीं तो मैं सबकुछ छोड़-छाड़कर आ रही हूं।” क्योंकि मैं दिमाग से बहुत थक गई थी। क्योंकि मैं ज्यादा दिन घर से बाहर नहीं रह सकती।
रिपोर्टर : परिवार साथ होने का फायदा मिला?
नूपुर श्योराण : मैं मम्मी को भी कह रही थी कि यह गोल्ड इसलिए आ गया कि आप वहां पर आई हुई थी।