केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) चंडीगढ़ बेंच ने MES (मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज़) के इंडस्ट्रियल कर्मचारियों के हक में बड़ा फैसला सुनाते हुए ड्रेस अलाउंस देने का रास्ता साफ कर दिया है। अधिकरण ने साफ कहा कि जब समान मामलों में कर्मचारियों को राहत मिल चुकी है, तो मौजूदा आवेदक को यह लाभ देने से इनकार नहीं किया जा सकता। यह आदेश कैट ने वाहन मैकेनिक पूर्व कर्मचारी मेजर सिंह ने “फौजी इंजीनियर कार्यालय (ईस्ट) जालंधर कैंट की याचिका पर सुनाया है। जानिए पूरा मामला क्या था मेजर सिंह ने ट्रिब्यूनल में याचिका देकर कहा कि उन्हें भी 1 जुलाई 2017 से ड्रेस भत्ता दिया जाए। उनका कहना था कि 7वें वेतन आयोग के बाद यूनिफॉर्म (ड्रेस) देना बंद कर दिया गया और वॉशिंग भत्ता भी खत्म कर दिया गया। सरकार ने 02 अगस्त और 31 अगस्त 2017 को आदेश जारी कर सभी ग्रुप-C कर्मचारियों को हर साल 5000 रुपए ड्रेस भत्ता देने का फैसला किया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि MES में कई कर्मचारियों को यह लाभ मिल रहा है, खासकर गुरमीत सिंह व UOI वाले मामले में कैट और पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह लाभ पहले ही दे दिया है। लेकिन विभाग केवल उन कर्मचारियों को लाभ दे रहा है, जिन्होंने वह केस लड़ा था, जबकि बाकी समान कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। विभाग ने कहा ड्रेस अलाउंस नहीं मिलेगा रक्षा मंत्रालय की तरफ से यह तर्क दिया गया था कि इंडस्ट्रियल कर्मचारियों को पहले से डेंगरी मिलती थी, इसलिए उन्हें ड्रेस भत्ता देने का कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन CAT ने विभाग की दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह मुद्दा पहले ही Gurmit Singh मामले में साफ किया जा चुका है और हाईकोर्ट ने भी 04 अक्टूबर 2021 को उस फैसले को सही ठहराया था। CAT ने माना कि समान परिस्थिति वाले कर्मचारी को लाभ न देना कानून के खिलाफ है।