उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने खुद उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सामने स्वीकार कर लिया कि RDSS स्कीम की फंडिंग नए कनेक्शन के लिए बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। फिर भी कॉरपोरेशन ने पिछले ढाई महीने में 1 लाख 81 हजार नए उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर 6,016 रुपए प्रति कनेक्शन की मनमानी वसूली कर डाली। नियामक आयोग में कॉरपोरेशन ने पेश किया जवाब 15 नवंबर को राज्य नियामक आयोग ने यूपी पावर कॉरपोरेशन से नए कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता पर जवाब मांगे थे। पावर कॉरपोरेशन की ओर से 21 नवंबर की देर रात नियामक आयोग में जवाब दाखिल किया गया। जवाब में एक के बाद एक ऐसी बातें लिखी हैं कि अब बचने की कोई गुंजाइश नहीं बची। नई कॉस्ट डाटा बुक में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की जो दरें दिखाई गई हैं, उनके बारे में कॉरपोरेशन ने खुद लिखा है कि उसके पास इसका कोई आधार नहीं है। सिर्फ बाजार में पूछताछ करके अनुमान लगाया गया है। RDSS स्कीम को लेकर आयोग में ये जवाब दिया- गाइडलाइन का भी नहीं किया पालन RDSS की स्टैंडर्ड बिडिंग गाइडलाइन में साफ लिखा है नए उपभोक्ता का पूरा डाटा मास्टर डाटा (MISP) में इंटीग्रेटेड होना जरूरी है। कॉरपोरेशन ने इस प्रावधान को तोड़-मरोड़ कर नए कनेक्शन पर भी RDSS मीटर अनिवार्य कर दिया। अब नियामक आयोग में फंसने पर कह रहे हैं कि भविष्य में नए मीटर इंटीग्रेट नहीं हो पाएंगे। 18,885 करोड़ का प्रोजेक्ट को बना दिया 27,342 करोड़ पावर कॉरपोरेशन के जवाब पर उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता परिषद के अवधेश वर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा- जब मूल टेंडर 18,885 करोड़ का था, तो कॉरपोरेशन ने उसे कैसे 27,342 करोड़ कर दिया। अब कह रहा है, नए मीटर लगाने में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। यानी पूरी स्कीम ही फेल होने की कगार पर है। परिषद की चार बड़ी मांगें-