सोनीपत जिले के गोहाना क्षेत्र में रोहतक डिस्ट्रीब्यूटरी नहर टूटने से किसानों की फसलों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। किसानों का आरोप है कि डिस्ट्रीब्यूटरी में अचानक पानी आने से नहर टूट गई और खेत जलमग्न हो गए। मौके पर नहर को बंद करने के लिए प्रयास किया जा रहे हैं, दो जेसीबी मिट्टी डाल रही है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन की तरफ से अभी कोई भी संज्ञान नहीं लिया गया है। नहर टूटी, 60–70 एकड़ फसल जलमग्न गोहाना के माहरा गांव के पास सुबह लगभग 6 बजे रोहतक डिस्ट्रीब्यूटरी नहर अचानक टूट गई, जिसके बाद तेज बहाव का पानी खेतों में फैल गया। किसानों के अनुसार करीब 60 से 70 एकड़ कृषि भूमि पूरी तरह पानी में डूब गई। खेतों में खड़ी गेहूं और गन्ने की फसलें जलमन्न हो गईं। नहर टूटने की अलग-अलग तस्वीरें… किसानों ने लापरवाही का लगाया आरोप स्थानीय किसानों का कहना है कि नहर की समय पर सफाई न होने और जगह-जगह चूहों ने खोखला किया हुआ है। जिसके चलते जगह जगह छेद हो रखें हैं। छेदों के कारण नहर टूट गई है। किसानों ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बाद भी सिंचाई विभाग ने सुधार नहीं किया, जिसका नतीजा यह टूटना रहा। अचानक नहर टूटने से खेतों में अनावश्यक पानी भर गया, जिससे फसलें नुकसान की शिकार हुईं। फसल के नुकसान से किसान परेशान किसान सतीश का कहना है कि उन्हें सूचना मिली थी की नहर टूट गई है तो मौके पर 10 से 12 किस इकट्ठे होकर मौके पर पहुंचे और इस दौरान प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की गई तो किसानों ने खुद अपनी जेसीबी मशीन मंगवाकर नहर को जोड़ने का काम शुरू करवाया है। मौके पर बेलदार पहुंचा है और उसने अपने विभाग से संबंधित अधिकारियों को सूचना दी है। हालांकि किसानों का यह भी कहना है कि बाद में प्रशासन द्वारा एक जेसीबी भेजी गई है। किसान ने बताया कि यह रोहतक डिस्ट्रीब्यूटरी है और गोहाना से होकर निकलती है। किसान का कहना है कि नेशनल हाईवे के साथ-साथ यह डिस्ट्रीब्यूटरी रोहतक की तरफ जाती है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि नहर में रात के वक्त पानी छोड़ा गया है। अगर दिन के वक्त छोड़ते तो किसान आसपास देख लेते और किसानों को नुकसान नहीं होता। किसानों का कहना है कि छोटे-मोटे कटाव को किसान खुद बंद कर लेता है।लेकिन यह बड़ा कटाव होने की वजह से जेसीबी से ही बंद होगा। किसानों ने यह भी कहा है कि धीरे-धीरे यह कटाव काफी बड़ा हो गया और पूरी रात खेतों में पानी गया है। किसानों का कहना है कि काफी किसानों ने आगे की फसल भी लगाई हुई है और पछेती फसल अगर किसान वह भी लगा तो इसकी पैदावार पर भी असर पड़ता है। वहीं किसानों का कहना है कि ज्यादातर खेतों में गेहूं की की बिजाई हो रखी है। किसानों ने कहा कि इस समय खेतों में पानी की जरूरत नहीं थी, लेकिन तेज बहाव ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। गेहूं और गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। अब किसान नुकसान की भरपाई और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।