चंडीगढ़ में आर्मी मेजर बनकर ठगी करने के आरोप में पकड़े गए गणेश को एक बार फिर कोर्ट से राहत नहीं मिली है। जिला अदालत ने उसकी दूसरी नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए उसे खारिज कर दिया। जमानत याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने अपना सही ठिकाना भी छुपाया है, जिससे उसके फरार होने और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है। इसी वजह से अदालत ने दूसरी बार भी उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। जानिए पूरा मामला क्या था गणेश मूल रूप से उत्तराखंड का रहने वाला है और फिलहाल पंचकुला में रहता था। गणेश के खिलाफ FIR थाना क्राइम चंडीगढ़ में 16 जून 2025 को दर्ज की गई थी। शिकायत महिला कॉन्स्टेबल की ओर से हुई थी। आरोप है कि गणेश खुद को आर्मी मेजर बताकर उससे सोने की अंगूठी और 4 लाख रुपए ले गया और ATM से भी पैसे निकाले। जांच में पता चला कि वह पहले भी 2021 और 2023 में इसी तरह की ठगी के मामलों में पकड़ा जा चुका है। कई पुलिसकर्मियों से उसके संपर्क भी मिले हैं। आर्मी यूनिफॉर्म, कैप, बेल्ट मोबाइल गुरुग्राम से बरामद गणेश की गिरफ्तारी 21 अगस्त 2025 को इंस्पेक्टर सतविंदर की टीम ने की थी। पुलिस पूछताछ में उसने माना कि वह आर्मी मेजर बनकर लोगों को ठगता था और पकड़े जाने से बचने के लिए सबूत छुपाने की कई कोशिशें करता था। आरोपी ने बताया कि जिस आर्मी वर्दी और कैप का इस्तेमाल वह लोगों को भ्रमित करने के लिए करता था, उसे उसने जयपुर में छिपाया था। अपना मोबाइल फोन, जिसमें कई अहम डेटा होने की आशंका है, उसने गुरुग्राम में छुपाया। वहीं महिला कॉन्स्टेबल से ठगी गई सोने की अंगूठी को उसने नदी में फेंक दिया ताकि बरामद न की जा सके। जांच के दौरान 14 सितंबर को पुलिस ने जंगल में वह आर्मी वर्दी, बेल्ट और कैप बरामद दिखाई, जबकि 15 सितंबर को गुरुग्राम से आरोपी का टूटा हुआ मोबाइल भी मिला। हालांकि ATM कार्ड पुलिस को नहीं मिल सका। IO की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आरोपी के मोबाइल में नाबालिग लड़कियों की अश्लील फोटो और वीडियो होने की आशंका है, जिसकी जांच अभी जारी है। अदालत ने गणेश को बताया आदतन अपराधी गणेश की जमानत सुनवाई के दौरान अदालत को जो रिकॉर्ड दिए गए, उनसे पता चला कि आरोपी पर पहले से ही चंडीमंदिर, सेक्टर-14 पंचकूला, मेरठ और देहरादून में ठगी व धोखाधड़ी के चार आपराधिक मामले दर्ज हैं। कोर्ट ने इन पुराने मामलों को गंभीर मानते हुए गणेश को “आदतन अपराधी” कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ चालान दाखिल होने, ट्रायल में समय लगने या आरोपी का लंबे समय से जेल में रहना—इन तीनों आधारों पर उसे जमानत नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और आरोपी की पिछली गतिविधियां दिखाती हैं कि वह लगातार ऐसे अपराधों में शामिल रहता है, इसलिए उसे रिहा करने से गवाहों पर असर पड़ने और दोबारा अपराध करने की आशंका है। मामले में लगी धाराएं (BNS के तहत)