भास्कर न्यूज | लुधियाना विश्व की साइकिल राजधानी कहे जाने वाले लुधियाना में साइकिल उद्योग इन दिनों भारी संकट के दौर से गुजर रहा है। वजह भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022 में लागू किए गए बीआईएस (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) नियम, जिनमें साफ कहा गया था कि देश में बिकने वाली हर साइकिल पर बीआईएस -प्रमाणित रिफ्लेक्टर लगाना अनिवार्य है। यह नियम इसलिए लाए गए थे ताकि सड़क हादसों में साइकिल सवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, विशेषकर रात के समय। इन्हीं नियमों के बाद शहर के करीब 10 प्रमुख साइकिल कारोबारियों ने मिलकर चीन से आयात होने वाले रिफ्लेक्टर को पूरी तरह चुनौती देने के लिए रिफ्लेक्टर तैयार किए। उत्पाद को बीआईएस की कड़ी टेस्टिंग में पास भी कर दिया गया। कारोबारियों का दावा है कि 2022 में एक फैक्ट्री औसतन 15,000 सेट रिफ्लेक्टर हर महीने बेच रही थी। परंतु तीन साल बीतते-बीतते वही मांग घटकर सिर्फ 5,000 सेट प्रति माह रह गई है। रिफ्लेक्टर न बिकने के कारण शहर की दो यूनिटें बंद भी हो चुकी हैं। फीको के प्रधान गुरमीत सिंह कुलार का कहना है कि रिफ्लेक्टर लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य होने के बावजूद शहर के कई दुकानदार 45 रुपये बचाने के लिए बिना रिफ्लेक्टर के साइकिल बेच देते हैं। कुलार के अनुसार रात में तेज रफ्तार वाहनों के बीच साइकिल सवार सबसे अधिक हादसों का शिकार होते हैं। रिफ्लेक्टर लगे होने पर साइकिल दूर से नज़र आ जाती है और दुर्घटना की आशंका कम हो जाती है। बावजूद इसके बाजार में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। लुधियाना के कारोबारियों के अनुसार एक रिफ्लेक्टर यूनिट लगाने में लगभग 10 करोड़ रुपये का निवेश लगता है और इससे 35–40 लोगों को रोजगार मिलता है। भारतीय निर्माताओं ने चीन की सस्ती क्वालिटी को चुनौती देते हुए बेहतर मटीरियल, उच्च ग्रेड प्लास्टिक और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड अपनाए—फिर भी इंडस्ट्री घाटे में है। बीआईएस के डायरेक्टर विशाल तोमर ने कहा कि बिना रिफ्लेक्टर साइकिल बेचने वाले दुकानदारों की समय-समय पर जांच की जाती है। बिना रिफ्लेक्टर साइकिल बेचने वाले दुकानदारों पर की गई कार्रवाई का डाटा केंद्र सरकार के पास होता है। इसकी जानकारी नहीं दे सकते। जब उनसे पूछा कि शहर की कई इंडस्ट्री बंद हो रही है रिफ्लेक्टर की सेल दिन प्रतिदिन कम हो रही है। तो उन्होंने कहा इसके लिए उनकी टीम समय समय पर अवेयरनेस कैंप लगाती है।