पंजाब की खडूर साहिब संसदीय सीट से सांसद अमृतपाल सिंह इस बार भी संसद के शीतकालीन सत्र में शामिल नहीं हो पाएंगे। सरकार ने उन्हें पंजीकृत अस्थायी पैरोल देने से मना कर दिया। जिले के अधिकारियों की रिपोर्ट को आधार बनाकर यह निर्णय लिया गया। इस फैसले के बाद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने अमृतसर में मीडिया से बात करते हुए पंजाब और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अमृतपाल सिंह की पैरोल केवल संसद सत्र में शामिल होने और पंजाब व सिख समुदाय के महत्वपूर्ण मसलों पर आवाज उठाने के लिए मांगी गई थी। इसे निजी काम या घर आने के लिए नहीं मांगा गया। परिवार ने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती कि पंजाब के लोगों की आवाज संसद तक पहुंचे। इसके तहत सिख और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को दबाने की कोशिश की जा रही है। सरकार के ला-एंड-ऑर्डर के बहाने को बनावटी बताया उन्होंने सरकार के ला-एंड-ऑर्डर के बहाने को बनावटी बताया और कहा कि अगर चुने हुए प्रतिनिधि संसद में अपनी स्वतंत्र आवाज नहीं रख सकते, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि सरकार पंजाब के वास्तविक मुद्दों जैसे- नशा, बेरोजगारी, पुलिस मामले और विश्वविद्यालयों में तनाव पर ध्यान देने की बजाय, सांसद को राजनीतिक रूप से दबाने में लगी है। 350वीं शताब्दी पर करोड़ों रुपए खर्च गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शताब्दी पर करोड़ों रुपए खर्च करने का भी परिवार ने उल्लेख किया। कहा गया कि सरकार शहादत और धर्म की बात करती है, लेकिन मानवाधिकारों और जनता की आवाज को दबा रही है। अमृतपाल की माता को पुत्र और पोती से मिलने से रोकना भी मानवाधिकारों का उल्लंघन है। परिवार ने स्पष्ट किया कि दबाव और धमकियों के बावजूद पंजाब और लोकतंत्र के हक में उनका संघर्ष जारी रहेगा। उनका कहना है कि हर कदम पर लोकतांत्रिक अधिकारों को सुरक्षित रखना उनकी प्राथमिकता है।