हरियाणा सरकार ने वरिष्ठ कर्मचारियों के वेतन-एसीपीएल को कनिष्ठ कर्मचारियों के बराबर स्टेपिंग-अप किए जाने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। साथ ही, वित्तीय शक्तियां री-डेलीगेट करने से जुड़े पीएफआर वाल्यूम-1 के नियम 19.1 के नीचे नोट 5 के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट की गई है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, जिनके पास वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का दायित्व भी है, द्वारा इस सम्बन्ध में दो अलग-अलग पत्र जारी किए गए हैं। क्या होता है वेतन स्टेपिंग अप वेतन स्टेपिंग-अप एक ऐसा सिद्धांत है, जिसमें एक सीनियर कर्मचारी के वेतन को उसके जूनियर कर्मचारी की सैलरी के बराबर या उससे अधिक बढ़ाया जाता है। ताकि प्रमोशन के कारण उत्पन्न वेतन विसंगति को ठीक किया जा सके। यह सिद्धांत सुनिश्चित करता है कि कनिष्ठ कर्मचारी, जो अपने वेतन में कुछ खास वृद्धि या अन्य लाभ के कारण उच्च वेतन प्राप्त कर रहा हो, वरिष्ठ कर्मचारियों को कम वेतन नहीं मिले। वित्तीय शक्तियां री-डेलीगेट क्या होता है वित्तीय शक्तियों को री-डेलीगेट करने का अर्थ है कि कोई व्यक्ति या संस्था (जैसे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स या प्राथमिक उपयोगकर्ता) अपनी वित्तीय शक्तियों को किसी दूसरे को सौंपता है, जो एक अधीनस्थ या सेकेंडरी उपयोगकर्ता होता है। इसमें वित्तीय अधिकार, जैसे बजट का प्रबंधन या भुगतान करना, किसी और को दिया जाता है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी मूल व्यक्ति की ही रहती है। उदाहरण के लिए, भीम ऐप का ‘फुल डेलीगेशन फीचर’ एक प्राइमरी यूजर को अपने अकाउंट से द्वितीयक उपयोगकर्ताओं को भुगतान करने की अनुमति देता है, जिसे ‘री-डेलीगेशन’ कहा जा सकता है। इस स्थिति में लागू नहीं होगा स्टेपिंग अप वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि 20 दिसंबर 2024 को जारी निर्देशों के अनुसार, वरिष्ठ कर्मचारी का वेतन-एसीपीएल कनिष्ठ कर्मचारी के बराबर तभी स्टेपिंग-अप किया जा सकता है। जब वरिष्ठ कर्मचारी एचसीएस (ACP) नियम, 2016 के तहत एसीपी के पात्र हों। हालांकि, यदि कनिष्ठ कर्मचारी को व्यक्तिगत कारणों से अधिक वेतन प्राप्त हो रहा है तो उस स्थिति में स्टेपिंग-अप देय नहीं होगा। यहां पढ़िए क्यों लिया गया ये फैसला… 1. स्वयं करनी होगी जांच यह देखने में आया है कि विभागों द्वारा इन मामलों की जांच स्वयं करने की बजाय इन्हें वित्त विभाग को भेजा जा रहा है। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे मामलों की जांच अपने स्तर पर करें और केवल उन्हीं मामलों का विवरण पूर्ण तथ्यों सहित वित्त विभाग को भेजें जो उपरोक्त आदेशों के दायरे में नहीं आते। 2. फील्ड अधिकारियों को री डेलीगेट कर रहे अधिकारी इसके अतिरिक्त, वित्त विभाग ने पीएफआर वाल्यूम-1 के नियम 19.1 के नीचे दिए गए नोट 5 के संबंध में भी विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग द्वारा जारी एक पत्र के अनुसार, यह देखने में आया है कि कुछ विभागाध्यक्ष अपनी वित्तीय शक्तियां फील्ड अधिकारियों को री-डेलीगेट कर रहे हैं, जो नियमों के विपरीत हैं। 3. केवल अपने ऑफिस के गजटेड अधिकारी को दे सकते हैं शक्तियां प्रशासनिक विभाग केवल अपने विभाग में कार्यरत राजपत्रित अधिकारियों, जैसे सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव, या एसएएस कैडर अधिकारियों को ही ये शक्तियां सौंप सकते हैं। इसी तरह, विभागाध्यक्ष केवल अपने कार्यालय के राजपत्रित अधिकारियों, जैसे अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप निदेशक आदि को ही ये शक्तियां री-डेलीगेट कर सकते हैं। प्रशासकीय सचिव अपनी वित्तीय शक्तियां किसी भी परिस्थिति में विभागाध्यक्षों को री-डेलीगेट नहीं कर सकते और विभागाध्यक्ष अपनी वित्तीय शक्तियां फील्ड अधिकारियों या कार्यालय प्रमुखों को नहीं सौंप सकते।