अमित शाह राजी, CM भगवंत मान का इनकार:क्या पूर्व AAP मंत्री केस की CBI जांच हो सकती है; 8 सवाल-जवाब में जानिए

पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के मंत्री रहे लालजीत भुल्लर पर आरोप लगा वेयरहाउस के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (DM) गगनदीप रंधावा ने सुसाइड कर लिया। CM भगवंत मान ने कहा कि मामले का पता चलते ही भुल्लर से इस्तीफा ले लिया। फिर अमृतसर पुलिस ने FIR दर्ज कर भुल्लर को गिरफ्तार कर लिया। मगर, रंधावा का परिवार संतुष्ट नहीं है। उनकी पत्नी उपिंदर कौर कह रही हैं कि मुझे पुलिस पर भरोसा नहीं, CBI जांच करें। लोकसभा में कांग्रेस सांसद गुरजीत औजला की मांग पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कह दिया कि पंजाब के सभी सांसद लिखकर दे दें तो वह तुरंत मामला CBI को दे देंगे। हालांकि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने CBI को जांच देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हमने सारी कार्रवाई की। मिनिस्टर से रिजाइन कराया। FIR दर्ज हुई और फिर गिरफ्तारी भी हो गई। पंजाब पुलिस जांच और कार्रवाई के लिए कैपेबल है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अब भी इस मामले की CBI जांच हो सकती है। CM के इनकार के बाद क्या केंद्र सीधे CBI जांच करा सकती है। रंधावा की पत्नी CBI जांच पर अड़ी हैं लेकिन यह जांच कराने का उनके पास क्या तरीका है?। इस बारे में भास्कर ने लीगल एक्सपर्ट्स से बात की। उन्होंने क्या-क्या बताया, ये जानने के लिए आगे सवाल-जवाब पढ़िए… 1. सवाल: पुलिस ने केस दर्ज किया, मंत्री अरेस्ट किया, क्या परिवार संतुष्ट है?
जवाब: भुल्लर पर जब तंग करने के आरोप लगे तो वह मंत्री थे। वह जिस आम आदमी पार्टी से जुड़े हैं, उनकी अभी भी पंजाब में एक साल की सरकार बची है। ऐसे में परिवार को डर है कि भुल्लर का प्रभाव चलेगा और पंजाब पुलिस निष्पक्ष ढंग से कार्रवाई नहीं कर पाएगी। रंधावा की पत्नी उपिंदर कौर भी कहती हैं कि सरकार भुल्लर की है, पुलिस भी उनकी है। ऐसे में इस मामले की जांच CBI ही कर सकती है। 2. सवाल: CBI से जांच का मुद्दा क्यों गर्माया?
जवाब: इसकी वजह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बयान है। सोमवार को लोकसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्‌टू और अमृतसर से कांग्रेस सांसद गुरजीत औजला ने मुद्दा उठाया कि पंजाब में मंत्री से परेशान होकर एक अफसर ने सुसाइड कर लिया। मंत्री अपने पिता के नाम पर टेंडर मांग रहे थे। अफसर ने नियमों का हवाला देते हुए इनकार किया तो उसे पीटा, धमकी दी। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा- पंजाब के सारे सांसद मुझे लिखकर दे दें, मैं तुरंत जांच CBI को दे दूंगा। 3. सवाल: शाह के बयान पर पंजाब सरकार ने क्या कहा?
जवाब: CM भगवंत मान ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार और पुलिस ने सभी जरूरी कार्रवाई की। मंत्री का इस्तीफा लिया। FIR दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी भी हो गई। जो भी कसूरवार होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा, चाहे मंत्री हो या संतरी। पंजाब पुलिस पूरी तरह कैबेबल है। उन्होंने CBI को जांच सौंपने से इनकार कर दिया। 4. सवाल: क्या अमित शाह सांसदों के कहने पर जांच CBI को सौंप सकते हैं?
जवाब: कानूनी तौर पर ये संभव नहीं। शाह ने कहा जरूर है लेकिन CBI की जांच के लिए राज्य सरकार की सहमति जरूरी है। शाह के कहने के बाद कांग्रेस और अकाली दल के 5 सांसदों ने लिखकर भी दे दिया था कि इस मामले की CBI जांच कराई जाए लेकिन 2 दिन बीतने के बाद भी केंद्र ने ऐसा आदेश जारी नहीं किया है। इसमें एक और अहम बात है कि पंजाब सरकार ने CBI जांच के लिए जनरल कंसेंट वापस ले रखी है। ऐसे में CBI बिना मंजूरी के राज्य में एंट्री नहीं कर सकती। 5. सवाल: ये बात तो शाह भी जानते होंगे, फिर उन्होंने भरोसा क्यों दिया?
जवाब: इसकी बड़ी वजह है AAP सरकार पर राजनीतिक दबाव। भुल्लर के खिलाफ CBI जांच का मुद्दा बढ़ता है तो केंद्र साफ कह सकती है कि हम तो तैयार हैं, लेकिन पंजाब सरकार ही न तो इसकी सिफारिश कर रही है और न ही मंजूरी दे रही है। आम जनता की नजर में ये मामला AAP सरकार के खिलाफ जाएगा। दूसरा, कांग्रेस सांसदों ने मुद्दा उठाकर AAP पर चुनाव से पहले दबाव बनाने की कोशिश की है। हालांकि AAP सरकार ने इसी दबाव को खत्म करने के लिए भुल्लर को तुरंत गिरफ्तार करवा दिया। 6. सवाल: पंजाब की AAP सरकार मंजूरी नहीं देगी तो क्या इस मामले की CBI जांच हो ही नहीं सकती?
जवाब: ऐसा नहीं है, अगर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट आदेश कर दे तो फिर CBI इस मामले की जांच कर सकती है। कोर्ट के आदेश के बाद पंजाब सरकार CBI को जांच करने से नहीं रोक सकती। ऐसी सूरत में केंद्र भी कोर्ट का फैसला बताकर CBI जांच शुरू करवा सकता है। 7. सवाल: रंधावा परिवार के पास CBI जांच कराने का अब क्या तरीका है?
जवाब: इसका जवाब है पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट। परिवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर करनी होगी। वहां ये साबित करना होगा कि इस मामले में पंजाब पुलिस सही ढंग से कार्रवाई नहीं कर रही। जिसके लिए करीब 18 घंटे बाद FIR और गिरफ्तारी में करीब ढ़ाई दिन का टाइम लेना भी एक दलील हो सकती है। परिवार ये भी कह सकता है कि भुल्लर को भले मंत्रीपद से हटा दिया लेकिन वह पार्टी में अभी भी बने हुए हैं। उनका MLA पद बरकरार है। ऐसे में सरकार में उनका रसूख चलेगा और वह पुलिस जांच को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा ऐसी ही पुख्ता दलीलें और देनी होंगी। 8. क्या हाईकोर्ट बिना राज्य का पक्ष सुने सीधे CBI को जांच दे सकता है?
जवाब: आम तौर पर ऐसा नहीं होता, जब भी कोई याचिका कोर्ट में जाती है तो उससे जुड़े सभी पक्षों को नोटिस भेजकर उनका रिस्पॉन्स लिया जाता है। इस सूरत में भी हाईकोर्ट परिवार की दलील के साथ पंजाब सरकार का पक्ष भी जरूर सुनेगी। उसके बाद ही कोई फैसला हो सकता है। एडवोकेट नईम बोले-सीबीआई पंजाब में डायरेक्ट जांच नहीं कर सकती
जालंधर के सीनियर एडवोकेट नईम खान ने बताया कि केंद्र सरकार पंजाब में सीधे सीबीआई जांच नहीं करवा सकती। केंद्र सीबीआई को जांच की सिफारिश कर सकती है। इसके बाद सीबीआई स्टेट की अनुमति मांगती है। बहुत से केस में स्टेट सीबीआई की परमिशन ठुकराती नहीं है। मगर, परमिशन न दे तो सीबीआई जांच नहीं सकती। सांसदों की तरफ से लिखकर देने से भी ये जरूरी नहीं हो जाता कि सीबीआई डायरेक्ट जांच करे। हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई किसी भी राज्य के केस में जांच कर सकती है। इसमें स्टेट की परमिशन लेना जरूरी नहीं होता।

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