पटना राज्य में सरकारी अमीन के 3823 और राजस्व कर्मचारियों के 8008 पद खाली हैं। इससे आम आदमी की समस्याओं के समाधान में भारी परेशानी आ रही है। दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, लगान भुगतान हो या एलपीसी, जमीन से जुड़े सभी काम को पूरा करने में राजस्व कर्मचारी और अमीन की ही जरूरत है। जब तक इन पदों पर बहाली नहीं होगी, विभाग की योजनाएं, 6 साल से चल रहा जमीन सर्वे और आम जनता के काम समय पर पूरे करना संभव नहीं है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के तहत राजस्व कर्मचारियों के कुल पद 11775 हैं। इसमें 3767 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। खाली 8008 पदों में से 3559 पदों पर बहाली के लिए वर्ष 2023 में बिहार कर्मचारी चयन आयोग से आग्रह किया जा चुका है। साल 2025 में 4492 पदों को भरने का फिर आग्रह (अधियाचना) किया जा चुका है। वहीं सरकारी अमीन के 13752 पद हैं। इसमें नियमित पद 2502 हैं, जिसमें 1199 अमीन काम कर रहे हैं। 2025 में इनमें से 765 पदों को भरने का आग्रह सामान्य प्रशासन विभाग से किया गया है। वर्ष 2019 से जारी जमीन सर्वे को पूरा करने के लिए संविदा पर बहाली के लिए अमीन के 11250 पदों की मंजूरी दी गई है। 8730 काम कर रहे हैं, जबकि 2520 पद खाली हैं। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने जब से विभाग का कार्यभार संभाला है, जमीन संबंधी समस्याओं के तेजी से समाधान के लिए ताबड़तोड़ घोषणाएं कर रहे हैं। प्रमंडलीय मुख्यालयों में भूमि सुधार जन कल्याण संवाद कर रहे हैं। लोगों के सामने खुद और प्रधान सचिव को बैठाकर ऑनलाइन सेवाओं, समस्याओं और उनके समाधान पर आमलोगों की शिकायतें सुन रहे हैं। उन समस्याओं को हल करने की जिम्मेदारी सीओ और राजस्व कर्मचारी को ही दी जा रही है। कर्मचारियों की कमी से समस्याओं के समाधान में देर हो रही है। जमीन सर्वे धीमी गति से चल रहा : राज्य में वर्ष 2019 से 20 जिलों के 89 अंचलों के 5657 गांवों (मौजा) में जमीन सर्वे हो रहा है। उनमें से अब तक मात्र 1001 गांवों में ही सर्वेक्षण पूरा करते हुए अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित हो पाया है। अगस्त 2024 से 18 जिलों के 448 अंचलों के 37384 मौजों में जमीन सर्वेक्षण अभी शुरू ही हुआ है। 45 लाख आवेदनों के निपटारे का जिम्मा कर्मचारी पर ही : बीते वर्ष अगस्त-सितंबर तक पूरे राज्य में राजस्व महाभियान के तहत 45 लाख आवेदन विभाग को मिले हैं। इन सभी आवेदनों को राजस्व कर्मचारियों को ही पंचायत भवन में बैठकर रैयतों के सामने निपटाने की जिम्मेदारी मिली है। इसमें अधिसंख्य मामले परिमार्जन प्लस (कागजों को ऑनलाइन करने में गलती सुधार) के आए हैं।