आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार एक महिला को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों से प्रथम दृष्टया प्रत्यक्ष उकसावे का स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आता और ट्रायल में समय लगना तय है। ऐसे में आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं है। यह आदेश जस्टिस मनीषा बत्रा की एकल पीठ ने सतनाम कौर की याचिका पर सुनाया। मामला अमृतसर में 25 जून 2025 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार मृतक करतार सिंह और उसकी पत्नी सतनाम कौर के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा था। घर में अक्सर झगड़े होते थे। आरोप है कि 21 जून 2025 को कथित मारपीट और कहासुनी के बाद करतार सिंह घर से चला गया और बाद में उसका शव नहर से बरामद हुआ। पुलिस ने इस आधार पर सतनाम कौर समेत अन्य लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था। बचाव पक्ष बोला- झूठा फंसाया याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। जांच पूरी हो चुकी है और वह 25 जून 2025 से न्यायिक हिरासत में है। सह-आरोपियों को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है। साथ ही मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना भी कम है। राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं। आरोपी के बाहर आने पर गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है। सिर्फ आरोप लगा देना काफी नहीं- HC हाई कोर्ट ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि आरोपी ने सीधे या इशारों में ऐसा कुछ किया या कहा हो, जिससे व्यक्ति आत्महत्या करने के लिए मजबूर हुआ हो। सिर्फ आरोप लगा देना काफी नहीं है। केवल उत्पीड़न के आरोप पर्याप्त नहीं माने जा सकते। रिकॉर्ड के आधार पर फिलहाल ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया, जिससे सीधे तौर पर उकसावे की बात साबित हो। इन हालात को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को निजी मुचलका और जमानत बांड जमा करने की शर्त पर नियमित जमानत दे दी। साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपी किसी और आपराधिक मामले में शामिल पाई गई, तो सरकार उसकी जमानत रद्द कराने की मांग कर सकती है।