फरीदाबाद में आंतक का सेंटर पॉइंट बनी अल-फलाह यूनिवर्सिटी और अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली की साकेत कोर्ट से 2 हफ्ते की जमानत मिल गई है। कोर्ट ने 1 लाख रूपए के मुचलके पर बेल को मंजूर किया है। कोर्ट ने उनकी पत्नी की मौजूदा स्वास्थ्य हालात को लेकर की गई अपील पर बेल मंजूर की है। हालांकि एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) की तरफ से बेल देने पर आपत्ति जताई गई। अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली लाल किला ब्लास्ट में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों की भूमिका पाए जाने के बाद 18 नवंबर को दिल्ली के ओखला में स्थित ऑफिस से गिरफ्तार कर लिया था। ये गिरफ्तारी PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) के तहत की गई थी। 10 नवंबर को हुए ब्लास्ट में 8 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 20 लोग घायल हो गए थे। ईडी ने मामले में लगभग 260 पेज का आरोप पत्र दाखिल किया था। जवाद अहमद सिद्दीकी ने झूठी मान्यता और पहचान के दावे कर स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को धोखे में रखा। इस तरह 415.10 करोड़ रुपए की अपराध की आय अर्जित की। ED को जांच के दौरान कई अनियमितताएं मिलीं, जिसमें 9 शेल कंपनियां एक ही पते पर रजिस्टर्ड पाई गईं। कई कंपनियों में एक ही मोबाइल नंबर है। साथ ही एम्प्लॉइज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। पत्नी के स्वास्थ्य का हवाला दिया जवाद अहमद सिद्दीकी की तरफ से कोर्ट में बेल के लिए पत्नी उस्मा अख्तर की गंभीर बीमारी को आधार बनाया गया है। बताया गया है कि उनकी पत्नी इस समय स्टेज-IV मेटास्टेटिक ओवेरियन कार्सिनोमा (अंडाशय के कैंसर) से पीड़ित हैं और नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनका सक्रिय, आक्रामक और तीसरे चरण की कीमोथेरेपी इलाज चल रहा है। यह भी दलील दी गई कि आवेदक 18 नवंबर 2025 से हिरासत में है। उनकी लगभग 52 वर्षीय पत्नी कैंसर से जूझ रही हैं, जिनकी बीमारी लगातार बढ़ रही है। आगे यह भी कहा गया कि आवेदक के हिरासत में होने के कारण उनकी पत्नी अकेली रह रही हैं और उन्हें देखभाल, नैतिक समर्थन तथा साथ की कमी महसूस हो रही है। इस उपचार के दौरान उन्हें आवेदक की उपस्थिति और सहयोग की आवश्यकता है। यह भी बताया गया कि आवेदक की पत्नी की 27 जून 2024 को डिबल्किंग सर्जरी हुई थी, जिसके बाद से वह नियमित रूप से कीमोथेरेपी के सत्र ले रही हैं। आवेदक के वकील ने नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल से जुड़े इलाज के दस्तावेजों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी। यह भी बताया गया कि अगली कीमोथेरेपी की तारीख 12 मार्च 2026 निर्धारित है। वकील ने 26 फरवरी 2026 की डिस्चार्ज समरी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि आवेदक की पत्नी की स्थिति गंभीर है और उन्हें देखभाल व सहयोग की आवश्यकता है। यह भी दलील दी गई कि आरोपी/आवेदक पति होने के नाते मुख्य देखभाल करने वाले (प्राइमरी केयर गिवर) हैं और इस बीमारी के दौरान उनका साथ बेहद जरूरी है। ED की तरफ से बेल ना देने की अपील की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से कोर्ट में हाजिर हुए विशेष लोक अभियोजक ने आपत्ति जताते हुए कहा कि आवेदक की पत्नी की स्थिति स्थिर है और वह अपने उपचार के लिए अपने रिश्तेदारों से सहायता ले सकती हैं। इसके अलावा यह भी कहा गया कि आवेदक के बच्चे, जो दुबई/यूएई में पढ़ाई कर रहे हैं, भारत आकर अपनी मां की देखभाल और सहयोग कर सकते हैं। ED की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि यह मामला गंभीर प्रकृति का अपराध है और आरोपी की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होने के आरोप हैं। इसके अलावा यह भी कहा गया कि आरोपी अन्य मामलों में भी शामिल रहा है और यदि उसे जमानत दी जाती है तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है तथा गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। यूनिवर्सिटी के डाक्टर ब्लास्ट में रहे शामिल बता दें कि, दिल्ली लाल किला ब्लास्ट से पहले पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉ. मुजम्मिल शकील को गिरफ्तार किया था। जिसकी निशानदेही पर पुलिस ने पास के गांव के एक कमरे से 2900 किलो विस्फोटक सामग्री को बरामद किया था। दिल्ली ब्लास्ट के बाद इसी यूनिवर्सिटी की मेडिकल प्रोफेसर डॉ. शाहीन सईद को भी गिरफ्तार किया गया। जबकि इनके साथ डॉ. उमरी नबी ने खुद को दिल्ली में ब्लास्ट के दौरान बम से उड़ा लिया था। जिसके बाद इस यूनिवर्सिटी के सीधे तार आंतक से जुड़े थे।