पंजाब के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आने पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर 35 ऑक्सीजन प्लांट बंद क्यों पड़े हैं और मरीजों को ऑक्सीजन कैसे दी जा रही है। कोर्ट ने सरकार को इस पूरे मामले पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि जालंधर, फाजिल्का, कपूरथला और मोहाली समेत कई जिलों के अस्पतालों में लगे पीएसए ऑक्सीजन प्लांट काम नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं, जालंधर में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से तीन मरीजों की मौत का भी दावा किया गया। सरकार बोली- कोविड-19 के समय आपात स्थिति में लगाए थे प्लांट राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई मुख्य रूप से सिलेंडरों के जरिए की जा रही है, जो ज्यादा शुद्ध (करीब 99%) ऑक्सीजन देते हैं। वहीं पीएसए प्लांट से मिलने वाली ऑक्सीजन 90 से 96 प्रतिशत तक शुद्ध होती है, इसलिए उन्हें प्राथमिक स्रोत नहीं माना जाता। सरकार ने दलील दी कि ये प्लांट कोविड-19 के समय आपात स्थिति में लगाए गए थे। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब प्लांट लगाए गए थे तो अब उन्हें चलाया क्यों नहीं जा रहा। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या राज्य के पास ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर कोई स्पष्ट नीति है या नहीं। ऑक्सीजन कहां से आ रही, किसकी जिम्मेदारी? हाई कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर निजी कंपनियों से आ रहे हैं या सरकारी व्यवस्था से। साथ ही यह भी बताने को कहा कि ऑक्सीजन प्लांट और गैस पाइपलाइन का रखरखाव कौन कर रहा है और उसकी निगरानी कैसे हो रही है। अदालत ने साफ कहा कि यह मामला सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि लोगों की जान से जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को हर सवाल का स्पष्ट जवाब देना होगा। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सरकार सभी तथ्यों के साथ विस्तृत हलफनामा दाखिल करे, ताकि यह पता चल सके कि अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था कितनी सुरक्षित और भरोसेमंद है।