‘इस भवन के पास रुकें नहीं, चलते समय भी सावधानी बरतें। क्योंकि ये भवन कभी भी धाराशायी हो सकता है। अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके जिम्मेदार मकान मालिक नहीं, बल्कि मेट्रो प्रशासन होगा।’ इस तरह लिखे चेतावनी वाले बोर्ड आगरा के मोती कटरा की 3 बिल्डिंगों पर लगे हैं। लोगों को आगाह करने के लिए इन बिल्डिंगों के मालिक अपने परिवार सहित घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। अपना घर होते हुए पिछले डेढ़ साल से वे किराए पर रह रहे हैं। दरअसल, मेट्रो टनल की खुदाई के चलते मोती कटरा के कई मकान दरक गए हैं। 3 मकान ऐसे हैं जो तीन हिस्सों में बंट गए हैं और कभी भी ढह सकते हैं। टनल खुदाई का काम खत्म हुए लगभग 10 महीने हो गए, लेकिन ये मकान अभी भी जैक पर टिके हुए हैं। डेढ़ साल से लोग परिवार सहित किराये पर रहने को मजबूर हैं। टनल खुदाई के दौरान 146 मकानों में दरार आई थी। अब 3 तस्वीरें देखिए… 100 से 120 फीट गहराई में खोदाई हुई है
सवाल उठता है कि मेट्रो से आखिर घरों के दरकने का क्या संबंध? आगरा कॉलेज से मनकामेश्वर मंदिर स्टेशन के बीच अंडरग्राउंड मेट्रो के लिए टनल बनाई गई है। इसके लिए लगभग 100-120 फीट गहराई में खोदाई हुई है। अक्टूबर, 2023 में कंस्ट्रक्शन शुरू हुआ। जुलाई-अगस्त में कुछ घरों में दरारें आईं। बढ़ते-बढ़ते इसका असर 146 घरों में दिखने लगा। जून 2025 में टनल खोदाई का काम पूरा हो गया। हालांकि, इस बीच कुछ महीने काम रुका रहा। मोती कटरा में यह काम जनवरी 2025 में पूरा हो चुका है। 3 मकानों में 10 महीने बाद भी जैक लगे, 4 इंच तक दरारें
टनल खोदाई के दौरान जिन 146 मकानों में दरार आई थीं, उनमें दयानंद गुप्ता, चितरंजन कुमार जैन और उमेश अग्रवाल का भी मकान शामिल था। मेट्रो टनल खोदाई का काम खत्म हुए 10 महीने बीत चुके और इन तीनों के मकान अभी भी जैक पर टिके हुए हैं। तीनों में लगभग 60-60 जैक लगे हुए हैं। मकानों की दीवार, छत और फर्श में 2 से 4 इंच की दरार हैं। दयानंद गुप्ता का मकान तीन हिस्सों में बंट चुका है। हालांकि, इनके अलावा अधिकांश मकानों से मरम्मत के बाद जैक हट चुके हैं। मकान मालिक बोले- कुछ हुआ तो मेट्रो प्रशासन जिम्मेदार होगा
चेतावनी- सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि यह भवन मेट्रो के लिए टनल बनाने के काम के दौरान मेट्रो कर्मियों की लापरवाही के चलते पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। कभी भी धाराशायी हो सकता है। अत: इस भवन के आसपास रुके नहीं, चलते समय सावधान रहें। अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो उसके लिए मकान मालिक जिम्मेदार नहीं होंगे, सिर्फ और सिर्फ मेट्रो प्रशासन ही पूरी तरह से जिम्मेदार होगा। इस मकान के मालिक अपने सभी परिजनों सहित दूसरी जगह विस्थापित हो गए हैं। अब तक किराये पर रहने को मजबूर हैं
लगभग 200 वर्गगज में बने दयानंद गुप्ता के मकान में तीन भाइयों का 23 लोगों का परिवार रहता था। मेट्रो टनल की खोदाई के दौरान मेट्रो अधिकारियों के कहने पर सावधानी बरतते हुए तीनों भाई अलग-अलग अपने-अपने परिवार के साथ किराए के मकान में रहने चले गए। उन लोगों ने ये सोचा कि कुछ महीनों में टनल खोदाई का काम पूरा हो जाएगा और वे फिर सब एक साथ रहेंगे। दयानंद गुप्ता ने कहा- टनल खोदाई का काम पूरा होने के बाद मेट्रो के अधिकारियों ने सर्वे के बाद मुझे मकान की स्थिति की रिपोर्ट नहीं दी। मगर, मकान की हालत देखकर लग रहा था कि पता नहीं ये कब ढह जाए? इस पर मैंने मेट्रो के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उन्होंने इस मकान को क्लीनचिट देते हुए परिजनों को लौटने के लिए कह दिया। मगर, मकान की स्थिति को देखते हुए अब तक हम लोग किराए के मकान में रह रहे हैं। दयानंद बोले- अधिकारी शिकायत नहीं सुन रहे
दयानंद गुप्ता ने कहा- मैंने प्रशासनिक अधिकारियों से भी शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके साथ ही मैंने सरकार के लिए सर्वे का काम करने वाले सर्टिफाइड इंजीनियर से अपने मकान का सर्वे कराया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा- ये मकान रहने लायक नहीं है। इस बिल्डिंग को रिप्लेस करना होगा। राहुल बोले- मेरा मकान एक तरफ झुक गया
राहुल अग्रवाल ने बताया- मेरा मकान दरार आने के कारण एक तरफ झुक गया है। मैं भी अपने परिवार के साथ किराये पर रहने को मजबूर हूं। डेढ़ साल से किराये पर ही रह रहा हूं। मेट्रो अधिकारियों ने मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति कर दी। मकान गिरने की स्थिति में है। जिस भी प्रशासनिक अफसर से शिकायत करो, कोई ध्यान नहीं दे रहा। कोई भी अफसर आए, इस घर में रहकर दिखाए। मकान कभी भी गिर सकता है। सरकार मदद नहीं कर रही है। जैक लगे हैं, इन्हें हटाते ही मकान भरभराकर ढह जाएगा। बद्री भगत बोले- मरम्मत के बाद फिर से उखड़े पत्थर
बद्री भगत के मकान में भी टनल खोदाई के दौरान दरारें आई थीं। बद्री भगत ने कहा- मेट्रो अधिकारियों ने घर की मरम्मत तो करा दी, लेकिन फर्श फिर से उखड़ गई है। फर्श के पत्थर फूल गए हैं, इससे वे टूट गए हैं। आसपास के लोगों ने भी भास्कर से बातचीत में कहा- मेट्रो ने आगरा में निर्माण के दौरान इमारतों की दीवारों में आई दरारों और नींव को मजबूत करने के लिए इंजेक्शन ग्राउटिंग कराई है। इस प्रक्रिया में दरारों में एक विशेष केमिकल मिश्रण भरा गया है। इससे मकान के फर्श फूलकर 7 से 9 इंच तक ऊपर उठ गए। इसी से मकान भी झुक गए हैं। कैंसर पीड़ित भी बेघर हुए
चितरंजन कुमार जैन कैंसर पीड़ित हैं। उनकी पत्नी की भी तबीयत ठीक नहीं रहती। ऐसे में उन्हें अपने परिवार के साथ जर्जर हो चुके मकान से दूर होना पड़ा है। वे किराए के मकान में रह रहे हैं। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) के PRO पंचानन मिश्रा कहते हैं- लगभग सभी घरों की मरम्मत कराई जा चुकी है। कुछ लोग रह गए हैं, लेकिन वे मरम्मत कराने को तैयार नहीं हैं। मेट्रो निर्माण के अपने नियम हैं, हम किसी को नया मकान बनाने का पैसा नहीं दे सकते। पहले कॉरिडोर के स्टेशन : सिकंदरा, गुरु का ताल, आईएसबीटी, आरबीएस कॉलेज, राजा की मंडी, सेंट जोंस कॉलेज, एसएन मेडिकल कॉलेज, मनकामेश्वर मंदिर, आगरा किला, ताजमहल, फतेहाबाद रोड, बसई और ताज ईस्ट गेट। दूसरे कॉरिडोर के स्टेशन : आगरा कैंट, सदर बाजार, प्रतापपुरा, कलेक्ट्रेट, सुभाष पार्क, सेंट जोंस कॉलेज, संजय प्लेस, एमजी रोड, नेहरू नगर, सुल्तानगंज, कमला नगर, रामबाग, फाउंड्री नगर, मंडी समिति, कालिंदी विहार। ————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में हाईवे पर 5 बार पलटी बोलेरो, VIDEO; फिल्मी अंदाज में फ्लाईओवर से टकराकर सीधी हुई, ड्राइवर लेकर भाग गया गोरखपुर में हाईवे पर फिल्मों जैसा नजारा देखने को मिला है। यहां 100 की स्पीड बोलेरो बेकाबू हो गई। टाटा मैजिक को जोरदार टक्कर मार दी, फिर बोलेरो 5-6 बार पलटी खाई। करीब 100 मीटर तक आगे गई। फिर फिल्मी अंदाज में फ्लाईओवर से टकराकर सीधी हो गई। पढ़ी पूरी खबर