ईरान-इजराइल जंग के बीच दुबई में गुरुद्वारा बंद:जेबेल अली में बना था, आसपास गिर रहे हैं ड्रोन, मैनेजमेंट ने जारी किया लेटर

ईरान-इजराइल युद्ध के बीच दुबई सरकार ने 3 अप्रैल को एक गुरुद्वारा अनिश्तिकाल के लिए बंद कर दिया। गुरुद्वारा चेयरमैन सुरेंदर सिंह कंधारी ने पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि दुबई पुलिस से गुरुद्वारा को बंद करने के निर्देश मिले थे। यह बंदी किसी धार्मिक भेदभाव के कारण नहीं, बल्कि पब्लिक सेफ्टी के लिए है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और सुरक्षा जोखिमों के बीच दुबई सरकार ने जेबेल अली स्थित प्रतिष्ठित गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार को अगले आदेश तक बंद करने लेटर भी जारी किया है। कम्युनिटी डेवलपमेंट अथॉरिटी (CDA) द्वारा यह फैसला ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध के चलते सुरक्षा कारणों से लिया गया है।
श्रद्धालुओं को तुरंत प्रभाव से सेवाएं रोकने को कहा गुरुद्वारा प्रबंधन ने आधिकारिक नोटिस जारी कर श्रद्धालुओं को तुरंत प्रभाव से सेवाएं रोकने की सूचना दी है। प्रशासन का कहना है कि जेबेल अली पोर्ट जैसे संवेदनशील रणनीतिक ठिकाने के करीब स्थित होने के कारण, मिसाइल इंटरसेप्शन के मलबे से जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस समय सर्वोच्च प्राथमिकता है। गुरद्वारा क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर है रेड अलर्ट
फरवरी 2026 से जारी ईरान-मिडिल ईस्ट तनाव ने UAE की सुरक्षा को संवेदनशील बना दिया है। ईरान द्वारा दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को हालांकि एयर डिफेंस ने हवा में ही नष्ट किया, लेकिन मलबा रिहायशी इलाकों में गिर रहा है। जेबेल अली पोर्ट के पास स्थित होने के कारण गुरुद्वारे पर सीधा खतरा बना हुआ था। इस के चलते इस इलाके में दुबई पुलिस ने रेड अलर्ट जारी कर रखा था। मंदिर और चर्च भी बंद किया गया
यह कार्रवाई किसी विशेष धर्म को निशाना बनाकर नहीं की गई है। ईस्टर वीकेंड पर जुटने वाली भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने इसी परिसर के अन्य चर्चों और प्रसिद्ध BAPS हिंदू मंदिर को भी एहतियातन बंद कर दिया है। प्रशासन का उद्देश्य इस संवेदनशील समय में सार्वजनिक स्थलों पर जनहानि को शून्य करना है। 164 करोड़ रुपए में किया था गुरुद्वारे का निर्माण 164 करोड़ रुपए (65 मिलियन दिरहम) की लागत से बना यह गुरुद्वारा खाड़ी देशों का पहला आधिकारिक सिख धर्म स्थल है। 2012 में उद्घाटन के बाद से यह 3 मंजिला इमारत 50 हजार से अधिक सिखों के लिए आस्था का केंद्र रही है। सुरेंदर सिंह कंधारी द्वारा स्थापित यह स्थल दुबई की धार्मिक सहिष्णुता की वैश्विक मिसाल है। गुरुद्वारा के गेट पर लगाया प्रवेश बंद का नोटिस
फिलहाल 3 अप्रैल 2026 तक गुरुद्वारे के कपाट बंद हैं और मुख्य प्रवेश द्वार पर सुरक्षा नोटिस चस्पा है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा ऑडिट और हवाई क्षेत्र में शांति बहाल होते ही इसे दोबारा खोला जाएगा। समुदाय के लोगों ने प्रशासन के इस कठिन लेकिन आवश्यक फैसले में पूर्ण सहयोग देने की अपील की है। अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का आदेश
दुबई सरकार की कम्युनिटी डेवलपमेंट अथॉरिटी (CDA) और सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्रीय युद्ध और ईरान-खाड़ी तनाव के बीच मिसाइल मलबे से होने वाले खतरों को देखते हुए 3 अप्रैल 2026 को गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का आदेश दिया। यह फैसला जेबेल अली पोर्ट के करीब होने और ईस्टर वीकेंड पर भारी भीड़ के कारण संभावित जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए एक एहतियाती कदम के रूप में लिया गया है। खाड़ी क्षेत्र का पहला गुरुद्वारा है गुरु नानक दरबार यह संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ही नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट का पहला आधिकारिक गुरुद्वारा है, जिसका निर्माण कार्य मई 2008 में शुरू हुआ था। गुरुद्वारे की नींव जून 2010 में रखी गई और इसका निर्माण दिसंबर 2011 में पूरा हुआ। इस धार्मिक स्थल का उद्घाटन 17 जनवरी 2012 को किया गया, जिससे दुबई में सिख समुदाय को अपना स्थायी घर मिला। इस सपने को साकार करने में सुरेंदर सिंह कंधारी की मुख्य भूमिका रही है, जो 1976 से दुबई में रहकर सेवा कर रहे हैं।

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