हिमाचल प्रदेश सरकार के एंट्री टैक्स के खिलाफ बॉर्डर एरिया में आज (बुधवार को) सुबह जगह-जगह प्रदर्शन किए गए। पंजाब के प्रदर्शनकारियों ने वाहनों की आवाजाही रोक दी। बैरियर पर इससे वाहनों की कतारें लग गई। इससे हजारों लोग परेशान हुए। तीन से चार घंटे के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए और तब जाकर वाहनों की आवाजाही सामान्य हो सकी। यह प्रदर्शन ऊना के मेहतपुर, बिलासपुर के गड़ामोड़, सोलन के बद्दी, बरोटीवाला, ढेरोवाल और बघेरी इत्यादि टोल बैरियर पर किए गए। इन बैरियर पर पंजाब के लोगों ने हिमाचल सरकार और सीएम सुक्खू के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुक्खू सरकार द्वारा टैक्स कम करने के बावजूद भी बड़ी हुई दरों से टैक्स लिया है। राज्य सरकार ने बीते कल 12 सीटर तक के वाहनों की एंट्री फीस 170 व 130 से घटाकर 100 रुपए की है, लेकिन कुछ बैरियर पर आज फिर से 170 रुपए की पर्ची काटी गई। इससे लोग भड़क उठे। कुछ प्रदर्शनकारी सभी वाहनों पर एंट्री टैक्स कम करने और कुछ टोल बैरियर ही हटाने पर अड़े रहे। स्थानीय प्रशासन के समझाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना खत्म किया। हिमाचल ने पड़ोसी राज्यों के लोगों को भी कंसेशनल पास देने का लिया निर्णय हालांकि, हिमाचल सरकार ने टोल बैरियर के पांच किलोमीटर के दायरे में रहने वाले सभी निवासियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने फैसला लिया कि हिमाचल के बॉर्डर एरिया के आसपास रहने वाले पड़ोसी राज्यों के लोगों को भी ‘कंसेशनल पास’ की सुविधा दी जाएगी। हिमाचल की सीमाएं जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और उत्तराखंड से लगती हैं। बॉर्डर एरिया के साथ लगते इन पड़ोसी राज्यों के वासियों को भी राज्य सरकार कंसेशनल पास देगी। पहले, 70 से बढ़ाकर 170 रुपए की थी एंट्री फीस राज्य सरकार ने एक महीना पहले जीप, कार, लाइट मोटर व्हीकल की एंट्री फीस 70 रुपए से बढ़ाकर 170 रुपए और छह से 12-सीटर वाहनों की एंट्री फीस 110 रुपए से बढ़ाकर 130 रुपए कर दी थी। पंजाब और हरियाणा में जबरदस्त विरोध के बाद सरकार ने अब जीप, कार, लाइट मोटर व्हीकल और 12 सीटर तक के वाहनों की फीस 100 रुपए कर दी है। इनसे बड़े वाहनों की फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया। हिमाचल में पंजीकृत उन कमर्शियल टैक्सी को भी एंट्री टैक्स में छूट दी गई, जो बॉर्डर एरिया के आसपास रहते है। पहले क्या नियम था? पहले, हिमाचल के बॉर्डर एरिया के आसपास रहने वाले पड़ोसी राज्यों के सभी प्राइवेट और कमर्शियल व्हीकल को एंट्री टैक्स देना अनिवार्य होता था। मगर अब राज्य सरकार बॉर्डर एरिया के आसपास रहने वाले पड़ोसी राज्यों के लोगों को भी कंसेशनल पास देगी। राज्य का एक्साइज डिपार्टमेंट जल्द कंसेशनल पास की दरें निर्धारित करेगा। सरकार ने फैसला वापस क्यों लिया? राज्य सरकार ने केंद्र से मिलने वाली रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने के बाद एंट्री टैक्स दरों में इजाफा किया था। इसके बाद पंजाब और हरियाणा में लोग हिमाचल के एंट्री टैक्स के खिलाफ सड़कों पर उतरने शुरू हुए। 31 मार्च की रात से हिमाचल के एंट्री पॉइंट बंद करने की चेतावनी दी गई। पंजाब सरकार ने भी हिमाचल के वाहनों पर जवाबी टैक्स लगाने के संकेत दिए थे। इस वजह से राज्य सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। विरोध क्यों हो रहा था? हिमाचल की सीमाएं पांच पड़ोसी राज्यों से लगती हैं। इस वजह से हिमाचल के बॉर्डर एरिया के लोगों का पड़ोसी राज्यों में कारोबार, रिश्तेदारी, उठना-बैठना और नौकरी बहुत ज्यादा है। इससे लोगों का बार-बार दूसरे प्रदेशों में आना-जाना लगा रहता है। इस वजह से बॉर्डर एरिया के लोगों की आवाजाही महंगा सौदा साबित हो रही थी। जितना खर्च गाड़ी में पेट्रोल-डीजल का नहीं आता, उससे ज्यादा खर्च एंट्री टैक्स भरने में लगना था। व्यापारियों को माल की ढुलाई महंगी होने का डर सता रहा था। पर्यटन कारोबारी भी चिंतित थे। हिमाचल को एंट्री टैक्स से कितनी कमाई होगी एंट्री टैक्स से राज्य सरकार ने अनुमानित 228 करोड़ रुपए की कमाई का लक्ष्य रखा है। इस राशि को नई सड़कें बनाने, टूटी सड़कों की मरम्मत, सड़कों के चौड़ीकरण और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाएगा। पंजाब के सीएम मान बोले- हमें भी टैक्स लगाना आता है
हिमाचल के एंट्री टैक्स में वृद्वि करने पर पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा कि अगर टैक्स कम कर लिया तो अच्छी बात है। सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो इसे भूला नहीं कहते हैं। यह तो दोपहर में आ गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वाले यहां तो हर बात पर सवाल उठाते हैं। लेकिन हिमाचल में उनकी सरकार है। हम कांग्रेस के बनाए हुए टोल प्लाजा बंद कर रहे हैं। हम तो हिमाचल वाले लोगों के पैसे भी बचा रहे है। क्योंकि जो टोल प्लाजा हटा रहे हैं। उससे हिमाचल जाने वाली गाड़िया भी गुजरती हैं। हम थोडा समय देखेंगे। फिर हमें भी टैक्स लगाना आता है।