एक ही गांव में शादी पर रोक, वजह 6 जोड़े:माता-पिता के सपोर्ट पर भी रहने की इजाजत नहीं; अमृतसर में लोग बोले- परंपरा टूट रही थी

अमृतसर के गांव अदलीवाल में पंचायत ने गांव के अंदर ही लड़का-लड़की की शादी पर रोक लगा दी है। पंचायत का कहना है कि अगर कोई युवक-युवती गांव में ही शादी करता है, तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। भले ही माता-पिता इस शादी के पक्ष में हों, फिर भी गांव के लोग उनसे कोई संबंध नहीं रखेंगे। इसके अलावा पंचायत ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर कोई लड़का या लड़की बिना अनुमति के दूसरे गांव में जाकर लव मैरिज करता है, तो उसे अपने गांव में रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी। गांव के सरपंच, पंच या लंबरदार भी किसी तरह की मदद नहीं करेंगे। ग्रामीणों के अनुसार, गांव की आबादी करीब 3 हजार है। पिछले दो-तीन साल में 5 से 6 जोड़ों ने गांव के अंदर ही शादी कर ली, जिससे गांव का सामाजिक माहौल प्रभावित हुआ। लोगों का मानना है कि इससे रिश्तों में तनाव बढ़ा और समाज का संतुलन बिगड़ने लगा। हाल ही में तीन दिन पहले भी एक लड़के ने भी गांव की ही लड़की के साथ भागकर शादी कर ली। इस घटना के बाद गांव में इस तरह की शादियों पर रोक लगाने की मांग तेज हो गई थी। इसके बाद पंचायत ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया। पंचायत के फैसले पर ग्रामीणों ने क्या कहा… लड़का-लड़की ने 3 दिन पहले ही गांव में ही शादी की
सुखदेव सिंह ने बताया कि करीब तीन दिन पहले ही गांव के एक लड़के ने अपनी ही जाति की लड़की के साथ भागकर शादी कर ली थी। इस घटना के बाद गांव में काफी चर्चा शुरू हो गई और लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। उन्होंने कहा कि इसी घटना के बाद पंचायत स्तर पर इस तरह की शादियों पर रोक लगाने की मांग तेज हो गई। कई ग्रामीणों का मानना था कि ऐसी घटनाओं से गांव का माहौल खराब होता है और आपसी रिश्तों में तनाव बढ़ता है। हमारा आपसी भाईचारा समाप्त हो रहा था
पूर्व पंचायत सदस्य हरप्रीत सिंह ने कहा कि इस प्रस्ताव को लेकर गांव बहुत खुश है। आपस में गांव में ही शादी करने से हमारा आपसी भाईचारा समाप्त हो रहा था, इसलिए इस प्रस्ताव की जरूरत थी। साथ ही जब सवाल किया गया कि सरकार तो 18 साल के बच्चे को शादी करने की अनुमति देती है, उसका भी अधिकार है। इसके जवाब में हरप्रीत सिंह ने कहा कि हम सरकार से अपील करते हैं कि यह नियम शहरों तक रखा जाए, गांव में इसे लागू न किया जाए। गांववासियों ने फैसले का सम्मान किया
सतनाम सिंह ने कहा कि इस नियम के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि गांव की लड़कियां और लड़के गांव में साथ-साथ शादी नहीं कर सकते। नशे के कारोबारियों का भी समर्थन नहीं किया जाएगा। अंत में खुशी के मौके पर महंत भंड इनको तयशुदा शुल्क दिया जाएगा। सतनाम सिंह ने कहा कि यह नियम पंचायत द्वारा काफी साल पहले पास किया जाना चाहिए था, लेकिन देर से लागू हुआ। यदि अब इसे लागू किया गया है, तो यह बहुत अच्छी बात है। सभी पार्टियों और गांववासियों ने इस फैसले का सम्मान किया है। पंचायत के प्रस्ताव की कॉपी… पढ़िए, प्रस्ताव में क्या लिखा है… गांव में आपस में शादी करवाने के खिलाफ प्रस्ताव… गांव में आपस में शादी करवाने में दो परिवारों में आपसी विवाद और झगड़े होते हैं। इसलिए अगर कोई गांव में आपस में लड़का–लड़की की शादी करवाता है, तो उन्हें गांव द्वारा बहिष्कृत किया जाएगा। अगर लड़के–लड़की के माता–पिता इसके साथ सहमत होंगे, तो गांव के किसी भी व्यक्ति को उनके साथ मेल–जोल नहीं रखना होगा। न ही वे उनके सुख–दुख में साथ देंगे। कोई भी गांव का अधिकारी उनकी मदद या संरक्षण नहीं करेगा और न ही सरपंच या पंचायत का कोई सदस्य उन्हें किसी सरकारी या गैर–सरकारी मामले में सहायता या हस्ताक्षर देगा। अगर कोई लड़का–लड़की परिवार की सहमति के बिना किसी बाहरी गांव के लड़के–लड़की के साथ भागकर शादी करता है, तो उसे गांव में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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