बहुचर्चित कठुआ गैंगरेप और हत्या मामले में दोषी सांजी राम को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सजा को रोकने (निलंबित करने) की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें दोषी को इस स्तर पर राहत दी जा सके। यह फैसला जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमार की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और परिस्थितियों को देखते हुए सजा निलंबन की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सांजी राम की मुख्य अपील पर सुनवाई सितंबर महीने में की जाएगी, क्योंकि वह 8 साल से ज्यादा समय से जेल में है। 2019 में सुनाई गई थी उम्रकैद इस मामले में साल 2019 में पठानकोट की सत्र कोर्ट ने सांजी राम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसके साथ ही उसके भतीजे परवेश कुमार और विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया को भी उम्रकैद दी गई थी। वहीं, सबूत मिटाने के मामले में 3 पुलिसकर्मियों को 5-5 साल की सजा हुई थी, जबकि सांजी राम के बेटे विशाल को बरी कर दिया गया था। बचाव और सरकार की दलीलें सजा रोकने की मांग करते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि इतने गवाह पेश करने के बावजूद आरोपी के खिलाफ सीधे सबूत नहीं हैं और वह लंबे समय से जेल में है, इसलिए उसे राहत मिलनी चाहिए। दूसरी ओर सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला और सबूत मजबूत हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि दोषी ठहराए जाने के बाद आरोपी को निर्दोष मानने का आधार नहीं रहता। जानिए पूरा मामला क्या था यह घटना जनवरी 2018 में कठुआ में हुई थी। 8 साल की बच्ची का अपहरण कर उसे एक मंदिर में कई दिनों तक बंद रखा गया। इस दौरान उसे नशीली दवाएं दी गईं, उसके साथ गैंगरेप किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले का ट्रायल स्थानांतरित किया गया था। मामले की जांच बाद में क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। वहीं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस को जम्मू-कश्मीर से हटाकर पठानकोट ट्रांसफर किया गया, जहां रोजाना सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया गया। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में इस अपराध को बेहद शर्मनाक और अमानवीय बताया। कोर्ट ने कहा कि यह एक सोची-समझी साजिश थी, जिसने पूरे समाज को झकझोर दिया।