करनाल में भाजपा नेता पर धोखधड़ी का केस दर्ज:दुकान दिलाने के नाम पर 34.50 लाख हड़पे, प्रोजेक्ट में निवेश का झांसा

करनाल जिले के सेक्टर-32 स्थित एक आवासीय-सह-व्यावसायिक प्रोजेक्ट में भाजपा के बड़े नेता व उसके साथी पर दुकान दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपए हड़पने का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने निवेश पर मोटा मुनाफा और नियमित किराए का आश्वासन देकर रकम ली, लेकिन न तो कब्जा दिया और न ही दस्तावेज किए। जांच के बाद पुलिस ने 28 फरवरी 2026 को केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। सेक्टर-32 के प्रोजेक्ट में निवेश का झांसा पुलिस अधीक्षक कार्यालय के माध्यम से थाना सेक्टर 32-33 करनाल में दी गई शिकायत में बताया गया कि सेक्टर-32 में अल्ट्रा टेक टाउनशिप डिवेलपर्स लिमिटेड के नाम से फ्लैटों और दुकानों सहित एक आवासीय-सह-व्यावसायिक भवन का निर्माण किया जा रहा था। कंपनी के डायरेक्टर भाजपा नेता चन्द्र प्रकाश कथूरिया बताए गए हैं। शिकायत में कहा गया कि अरविन्द कौशिक, जो कंपनी का अधिकृत एजेंट और प्रतिनिधि था, संभावित खरीदारों और निवेशकों से संपर्क कर रहा था। पारिवारिक संबंध बनाकर बढ़ाया भरोसा पंजाब के जिला होशियारपुर के गांव बास बस्सी बल्लो के संजीव कुमार पुत्र स्वर्गीय हकीकत राय ने पुलिस को बताया कि अरविन्द कौशिक की पहचान उनके परिवार से जिक्रपुर (पंजाब) में एक पड़ोसी के घर हुई थी। वहां उसे भूमि खरीद-फरोख्त के व्यवसायी के रूप में परिचित कराया गया। इसके बाद अरविन्द कौशिक उनके घर आने-जाने लगा और पारिवारिक समारोहों में शामिल होने लगा। शिकायत के अनुसार उसने सुनियोजित तरीके से परिवार के साथ संबंध मजबूत किए और विश्वासपात्र बन गया। दुबई में नौकरी का फायदा उठाया संजीव कुमार ने बताया कि वह दुबई में नौकरी करता है। आरोप है कि यह जानकारी मिलने के बाद अरविन्द कौशिक ने उनकी बहन को करनाल के न्यू वर्ल्ड रेजीडेंसी प्रोजेक्ट में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। उसने कहा कि कम पैसे लगाकर ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। साथ ही भरोसा दिलाया कि निर्माणाधीन दुकानों से अच्छा लाभ और नियमित किराया आय होगी। अगस्त 2021 में साइट विजिट अगस्त 2021 में संजीव कुमार और उनकी बहन करनाल आए। यहां अरविन्द कौशिक उन्हें न्यू वर्ल्ड रेजीडेंसी लेकर गया। शिकायत में कहा गया है कि वहां एक खाली जगह दिखाकर बताया गया कि जल्द ही यहां व्यावसायिक दुकानों का निर्माण शुरू होगा और सरकारी अनुमति के लिए आवेदन किया जा चुका है। उन्हें बताया कि परियोजना पूरी तरह स्वीकृत है और कई दुकानें निर्माणाधीन हैं, जो तत्काल बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। दो दुकानों का सौदा 2.34 करोड़ में तय आरोप है कि इन बातों पर विश्वास करते हुए संजीव कुमार ने भवन में स्थित दो व्यावसायिक दुकानों को खरीदने की सहमति दी। दोनों दुकानों का कुल मूल्य 2 करोड़ 34 लाख रुपए तय किया गया। संजीव कुमार ने बताया कि उन्होंने बिना किसी संदेह के यह राशि देने की हामी भर दी। विभिन्न खातों में जमा कराए रुपए, पांच चेक भी दिए शिकायत के अनुसार आरोपियों ने अलग-अलग खातों में किस्तों के रूप में भुगतान की मांग की। इस पर संजीव कुमार ने कुल 2 करोड़ 34 लाख रुपए अलग-अलग तिथियों पर जमा कराए। कुछ राशि कंपनी के खाते में और शेष राशि अरविन्द कौशिक के व्यक्तिगत खाते में उनके निर्देशानुसार डाली गई। अरविन्द कौशिक ने संजीव कुमार से पांच हस्ताक्षरित चेक भी लिए। इनमें से तीन चेक कंपनी के नाम पर और दो अपने निजी खाते के लिए बताए गए हैं। अंतिम भुगतान 24 अगस्त 2021 को किया गया। कब्जा देने में टालमटोल शिकायत में कहा गया कि भुगतान के बाद आरोपियों ने आश्वासन दिया कि निर्माण पूरा होते ही दुकानों का कब्जा दे दिया जाएगा। संजीव कुमार ने कई बार व्यक्तिगत रूप से और फोन पर संपर्क कर कब्जा देने का आग्रह किया, लेकिन हर बार अलग-अलग बहाने बनाए गए। कभी फिनिशिंग कार्य बाकी होने की बात कही गई, तो कभी दस्तावेजी प्रक्रिया और स्वीकृति संबंधी औपचारिकताओं का हवाला दिया गया। लंबा समय बीतने के बावजूद न तो कब्जा दिया गया और न ही कोई बिक्री दस्तावेज निष्पादित किया गया। बाद में पता चला कि संबंधित प्रोजेक्ट किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया है। संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि शुरुआत से ही आरोपियों की नीयत ठीक नहीं थी और उन्होंने धोखे से मेहनत की कमाई हड़प ली। उन्होंने पुलिस से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। 34 लाख 50 हजार की ठगी पर केस दर्ज मामले की जांच सब इंस्पेक्टर विनोद कुमार द्वारा की गई। जांच के दौरान शिकायतकर्ता और आरोपियों को नोटिस व मोबाइल फोन के व्हाट्सएप माध्यम से शामिल जांच होने की सूचना दी गई। जांच में पाया गया कि प्लॉट बेचने के नाम पर 34 लाख 50 हजार रुपए धोखाधड़ी से हड़पे गए। इसके आधार पर थाना सेक्टर 32-33 करनाल में मुकदमा दर्ज किया गया। जांच जारी, गिरफ्तारी पर नजर पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। लेन-देन से जुड़े बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच की जाएगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी कर रही है।

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