चंडीगढ़ में बीएमडब्ल्यू कार से चंडीगढ़ पुलिस के कॉन्स्टेबल को कुचलने के मामले में फैसला आया है। जिला अदालत ने रिटायर्ड कर्नल के बेटे इशान शंकर राय की डिस्चार्ज अर्जी खारिज करते हुए उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा चलाने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई अब 6 जुलाई से शुरू होगी। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज अश्वनी कुमार की अदालत ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि यह कोई सामान्य सड़क हादसा नहीं है, बल्कि ऐसा मामला है जिसमें आरोपी को अपनी हरकत के परिणाम का अंदाजा था। रेस के दौरान हुआ हादसा, कॉन्स्टेबल की मौत मामला 11 मई 2025 का है, जब सेक्टर-9 की सड़क पर दो बीएमडब्ल्यू कारों के बीच रेस लग रही थी। इसी दौरान एक तेज रफ्तार कार ने साइकिल सवार कॉन्स्टेबल आनंद को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल आनंद ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी तेज गति से कार चला रहा था और उसे पता था कि उसकी यह हरकत जानलेवा हो सकती है। हादसे के बाद वह मौके से फरार भी हो गया। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी थी कि यह मामला गैर इरादतन हत्या का नहीं, बल्कि सामान्य सड़क हादसे का है, जिसमें BNS की धारा 106 लगनी चाहिए। वकील ने कहा कि पुलिस ने बिना पूरी जांच के ही गंभीर धारा जोड़ दी। वहीं सरकारी वकील ने तर्क दिया कि शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया था कि आरोपी की लापरवाही गंभीर थी और मामला गैर इरादतन हत्या का बनता है। कोर्ट की टिप्पणी- साधारण हादसा नहीं दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि यह कोई साधारण दुर्घटना नहीं है। आरोपी को तेज रफ्तार के खतरे का पूरा अंदाजा था, इसके बावजूद उसने लापरवाही बरती। ऐसे में उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला बनता है। BNS की धारा 105 गैर जमानती है, जिसमें आरोपी को थाने से जमानत नहीं मिलती और दोष सिद्ध होने पर 10 साल तक की सजा हो सकती है।
वहीं धारा 106 सामान्य सड़क हादसों में लगती है, जो जमानती होती है और इसमें अधिकतम 2 साल की सजा का प्रावधान है।