कर्नाटक विधानसभा में गूंजा हिमाचल का आर्थिक संकट:बीजेपी MLA ने सैलरी डेफर पर उठाए सवाल, मंत्री बोले- हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत

हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति अब राज्य की सीमाओं से बाहर निकलकर अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी चर्चा का विषय बन गई है। कर्नाटक विधानसभा में बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान सोमवार को हिमाचल का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा, जहां विपक्ष ने बढ़ती सब्सिडी और आर्थिक प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए। विधानसभा में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के विधायक वी सुनील कुमार ने कहा कि कर्नाटक में करीब 14 प्रतिशत बजट सब्सिडी योजनाओं पर खर्च हो रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो राज्य को हिमाचल प्रदेश जैसी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि ‘गारंटी योजनाओं’ पर एक लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुका है, जिससे ‘सब्सिडी कल्चर’ बढ़ रहा है। एस सुनील कुमार ने हिमाचल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कांग्रेस सरकार को गारंटी योजनाओं के चलते वेतन में कटौती और भुगतान स्थगित करने जैसे कदम उठाने पड़े। उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी भी राज्य के लिए चिंताजनक है और कर्नाटक को इससे सबक लेना चाहिए। हिमाचल सरकार ने 3% से 50% तक सैलरी डेफर की दरअसल, हिमाचल में हाल ही में सरकार ने वित्तीय दबाव के चलते बड़ा फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू का 50 प्रतिशत वेतन छह महीने के लिए डेफर किया है। इसके अलावा, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की 30 प्रतिशत और विधायकों की 20 प्रतिशत सैलरी डेफर की गई है। इसी तरह राज्य सरकार ने 2025-26 की तुलना में 2026-27 में 4 हजार 577 करोड़ रुपए कम का बजट पेश किया है। साल 2025-26 में राज्य के बजट का आकार 58 हजार 514 करोड़ रुपए था, जबकि इस बार घटकर 54 हजार 928 करोड़ रुपए रह गया है। इस वजह से भी दूसरे राज्यों में हिमाचल के आर्थिक हालात को लेकर चर्चा हो रही है। हिमाचल सीएम ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर फोड़ा ठीकरा इसी वजह से कर्नाटक विधानसभा में भी यह मामला गूंजा। वहां विपक्ष हिमाचल की आर्थिक स्थिति को मुद्दा बनाकर सत्तारूढ़ कांग्रेस को घेर रहा है। वहीं हिमाचल सीएम का कहना है कि संघीय ढांचे में केंद्र का रवैया ठीक नहीं है। पहले GST कंपनसेशन बंद किया गया। इसके बाद NPS के अंगेस्ट मिलने वाला लोन और फिर राज्य की लोन लेने की सीमा 5 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी की। अब राज्य को हर साल मिलने वाली लगभग 10 हजार करोड़ की रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट भी बंद कर दी गई है। कर्नाटक सरकार ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया वहीं, कर्नाटक सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। राज्य के राजस्व मंत्री कृष्णा बायर गौड़ा ने कहा कि उनकी सरकार वित्तीय चुनौतियों को लेकर पूरी तरह सजग है और कर्नाटक की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। उन्होंने बताया कि राज्य की विकास दर 11 प्रतिशत है, जो महाराष्ट्र और गुजरात से अधिक है। गौड़ा ने यह भी कहा कि सब्सिडी को नकारात्मक रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, ‘डिमांड-साइड इकोनॉमिक्स’ के तहत लोगों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता से बाजार में मांग बढ़ती है और इससे आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं। उन्होंने “मल्टीप्लायर इफेक्ट” का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों के हाथ में दिया गया पैसा कई बार खर्च होता है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। कुल मिलाकर, हिमाचल की वित्तीय स्थिति अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनती जा रही है। कर्नाटक विधानसभा में उठा यह मुद्दा संकेत देता है कि छोटे राज्यों की आर्थिक नीतियों और उनके प्रभाव पर देशभर में नजर रखी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *