हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए सोमवार को हरियाणा विधानसभा में वोटिंग होगी। भाजपा और कांग्रेस से एक-एक प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन तीसरा निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में होने से राजनीतिक पारा बढ़ा हुआ है। हिमाचल प्रदेश के कुफरी-गलू में हल्की बर्फबारी-ओलावृष्टि से सड़कें बंद होने के डर से कांग्रेस ने रविवार को अचानक प्लान बदल दिया। रविवार सुबह 11 बजे निर्णय लिया गया कि 13 मार्च से बाड़ेबंदी में रह रहे 31 विधायकों को कसौली ठहराया जाएगा। इसके कांग्रेस विधायक कुफरी से होटल वाइल्ड फ्लावर हॉल लाए गए, जहां सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उन्हें लंच दिया। इसके बाद विधायक शिमला से कसौली आए। रात को रमडा बाय विंडम कसौली होटल में ठहरे हैं। वे यहां से सोमवार सुबह सीधे हरियाणा विधानसभा जाकर वोटिंग करेंगे। वहीं, हिमाचल पुलिस सिर्फ परवाणू तक ही विधायकों को सुरक्षा प्रदान देगी। आगे की जिम्मेदारी हरियाणा पुलिस संभालेगी। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस विधायक वोट डालते हुए दो व तीन नंबर के विकल्प पर नहीं जाएंगे। उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार को ही पहली पसंद पर वोट देने की सख्त हिदायत दी गई है। कांग्रेस के विधायक वोटिंग के वक्त नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा को अपना वोट दिखाकर डालेंगे। इनेलो के दो विधायक हैं, उन्होंने पत्ते नहीं खोले हैं। सूत्रों के अनुसार इनेलो वोटिंग से दूरी बना सकती है। भाजपा के सभी विधायक चंडीगढ़ में हैं। उनकी वोटिंग को लेकर मॉक पोल हुआ। सैनी, हुड्डा और राव की प्रतिष्ठा दांव पर राज्यसभा चुनाव से सीनियर नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर है, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के वक्त जीत के प्रति निश्चिंत दिखने वाली कांग्रेस को उन्होंने दो बार खाली रख दिया था। ऐसे में अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कार्यकाल में यह पहला चुनाव है। एक सीट तय है, दूसरी के लिए भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार खड़ा है। ऐसे में दूसरी सीट जीतना चुनौती है। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के कार्यकाल का यह पहला चुनाव है। वे विधायकों को एक साथ लेकर डटे हैं। पूर्व में भूपेंद्र सिंह हुड्डा नेता प्रतिपक्ष थे। हाईकमान ने तीसरी बार भरोसा जताया है। ऐसे में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के सामने बहुमत होने के बावजूद एक सीट हाईकमान को देना बड़ी जीत होगी, क्योंकि पहले दो बार खेला हो चुका है। प्रदेश में वोटों का गणित दोनों सीटों के लिए 31-31 सदस्यों की जरूरत है। भाजपा के पास 48 सदस्य हैं। 3 निर्दलीय मिलाकर कुल 51 होते हैं। पार्टी के उम्मीदवार को 31 वोटों की जरूरत है। अब समर्थित निर्दलीय के लिए उनके पास 20 सदस्य बचते हैं। 2 इनेलो के विधायक हैं। कांग्रेस के 37 सदस्य हैं। यदि क्रॉस वोटिंग या वोट रद्द नहीं हुए तो भाजपा और कांग्रेस 1-1 सीट जीत जाएगी। आज सुबह 9 बजे वोटिंग प्रदेश के राज्यसभा चुनाव पहले की तरह बैलेट पेपर से कराए जाएंगे। वोटिंग में चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित पैन का इस्तेमाल होगा। कोई दूसरा पैन मान्य नहीं होगा। पार्टियों की ओर से एजेंट बैठाए जाएंगे। विधायक अपना वोट उन्हें दिखाकर डालेंगे। वोटिंग समाप्त होने के बाद वोटों की गिनती होगी। इसके बाद चुनाव का परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। राव नरेंद्र बोले- भाजपा भ्रम फैला रही, मंसूबे कामयाब नहीं होने देंगे कांग्रेस को विधायकों की बाड़ेबंदी की जरूरत क्यों पड़ी, उनपर भरोसा नहीं है? ऐसी बात नहीं है। इस बहाने सभी वादियों में घूमने आए। दूसरे दलों के मंसूबे कामयाब नहीं होंगे। क्या पार्टी विधायकों की क्रॉस वोटिंग का खतरा है? ऐसा नहीं है। भाजपा भ्रम फैला रही है। हमारे पास पूरा संख्या बल है। जीत हमारे प्रत्याशी की ही होगी। इस बार सभी दिग्गज चुनावी डयूटी में हैं, ऐसा क्यों? सब पार्टी के साधारण कार्यकर्ता हैं। पार्टी जो जिम्मेदारी सौंपती है, वह निभानी पड़ती है। चर्चाएं हैं कि कांग्रेस प्रत्याशी राज्य इकाई की पसंद का नहीं है। हाईकमान ने भेजा है। क्या कहेंगे? हमारे प्रत्याशी पहले से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। वे पार्टी के कई पदों पर रहे हैं, दूसरे प्रदेशों में भी काम किया है। किसी एक को ही टिकट मिलनी थी। 6 विधायक हिमाचल नहीं गए। इसकी क्या वजह है? कई विधायकों के न आने के परिवारिक कारण हैं। क्या कांग्रेस प्रत्याशी को हराने के लिए षड्यंत्र हो सकता है, इससे बचने के लिए क्या रणनीति है? कोई भी दल चुनाव जीतने व हराने के लिए सभी कोशिशें करता है, लेकिन हम सब एक हैं और दूसरे दलों के मंसूबे कामयाब नहीं होने देंगे। क्या कांग्रेस का उम्मीदवार जीत पाएगा? इसमें कोई संदेह नहीं है। चुनाव जीत जाएंगे। जब जीत होगी, तो सभी को पता चल जाएगी। बड़ौली : कांग्रेस को अपनों पर भरोसा नहीं, इसलिए बाड़ेबंदी की राज्यसभा की 2 सीटों के लिए 3 उम्मीदवार मैदान में हैं। नतीजा कैसा रहने की उम्मीद है? तीन में से दो का जीतना है। नतीजा चुनाव के दिन ही पता चलेगा, लेकिन बहुत रोमांचक रहेगा। निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, इस पर क्या कहेंगे? वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। हां, उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। कांग्रेस ने विधायकों की बाड़ेबंदी की है। क्या भाजपा की ओर से लालच दिए जाने के डर से ऐसा करना पड़ा? देखिए, यह कांग्रेस का पुराना रिवाज है। ऐसा करने से तो यह लगता है कि कांग्रेस को अपने विधायकों व नेताओं पर भरोसा नहीं है। कांग्रेस कह रही है कि उनका प्रत्याशी जीतेगा। भाजपा को तय करना है कि अपना जिताना है या निर्दलीय? सबको अंतरात्मा की अवाज से वोट देनी है। कांग्रेस अंतरात्मा की आवाज से वोट मांगती रही है। वोट का सभी को अधिकार है। राज्यसभा चुनाव में पहले इतनी रस्साकसी नहीं होती थी। अब ऐसा क्यों होने लगा है? भाजपा-कांग्रेस 1-1 प्रत्याशी मैदान में उतारती तो दोनों जीत जाते। अब निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव के मैदान में हैं। ऐसे में यह चुनाव रोमांचक हो गया है। चुनाव को लेकर पार्टी की क्या रणनीति है? हमारा उम्मीदवार आसानी से जीत दर्ज कर लेगा। विधायकों को वोटिंग प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी है। हरियाणा में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए चुनाव आज, भाजपा-कांग्रेस का 1-1 और एक निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में है पिढ़ए भाजपा व कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष से भास्कर के विशेष संवाददाता सुशील भार्गव की बातचीत…