हरियाणा सरकार को सोनीपत के खानपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर को NOC न देने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फटकार लगाई है। इसी के साथ सरकार पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगा। कोर्ट ने सरकार पर नाराजगी जताते हुए उसके फैसले को मनमाना और असंवेदनशील बताया। दरअसल, हाईकोर्ट में डॉक्टर ने याचिका दायर कर जल्द एनओसी जारी करवाने की मांग की थी। मामला सोनीपत के खानपुर मेडिकल कॉलेज का है। कोविड ड्यूटी के दौरान डॉक्टर मनोज के खिलाफ मात्र विधायक के सामने खड़े न होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी। सरकार ने डॉक्टर को शोकॉज नोटिस तक जारी कर दिया था। जिसके चलते अब उन्हें पोस्ट ग्रैजुएशन के लिए एनओसी भी नहीं दी जा रही। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सरकार की इस कार्रवाई को चिंताजनक बताया है और जल्द एनओसी जारी करने का आदेश दिया। अब सिलसिलेवार तरीके से जानें पूरा मामला… किसी तरह की असम्मान की मंशा नहीं- डॉक्टर
डॉ. मनोज ने जून 2024 में सरकार को अपना जवाब देकर स्पष्ट किया था कि वह विधायक को पहचान नहीं सके। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह मरीजों की देखभाल में जुटे थे और उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था। इसके बावजूद राज्य सरकार ने वर्षों तक इस नोटिस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया। NOC रोकना मनमानी और अन्यायपूर्ण- कोर्ट
अदालत ने कहा कि शो कॉज नोटिस को बिना किसी निर्णय के वर्षों तक लंबित रखना और इसी आधार पर डॉक्टर का NOC रोक देना पूर्णतः मनमाना है। इससे डॉक्टर के करियर और उच्च शिक्षा के अधिकार पर सीधा असर पड़ता है, जो न्यायसंगत नहीं हो सकता। खामियों पर डॉक्टर ने नहीं लिया संज्ञान
हाईकोर्ट के आदेश आने के बाद बरोदा हलके के कांग्रेस विधायक इंदूराज भालू का कहना है कि वह और गोहाना कांग्रेस विधायक जगबीर मलिक के साथ रात को निरीक्षण किया था। खानपुर मेडिकल को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थी और उस दौरान वे गोहाना के विधायक के जगबीर मलिक के साथ रात को मेडिकल खानपुर पहुंचे थे। उसे दौरान काफी खामियां मिली थी और उसे दौरान अल्टरनेटिव चार्ज सीएमओ के तौर पर डॉक्टर मनोज को मिला हुआ था। खामियों को लेकर मौके पर बातचीत करने के लिए डॉक्टर मनोज को बुलाया, तो वह सीट से उठकर नहीं आए। फिर मौके पर खुद दोनों विधायक डॉक्टर के पास पहुंचे, तो फिर भी वे सीट से नहीं उठे। विधायक ने कहा कि उस दौरान वे किसी मरीज को नहीं देख रहे थे। डॉक्टर कुर्सी पर आराम से बैठे हुए थे। वही डॉक्टर की शिकायत तत्कालीन हेल्थ मिनिस्टर को भी की गई थी। जिसको लेकर डॉ. मनोज को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था।