खेती अब मुनाफे का सौदा नहीं रही है। किसानों पर बढ़ते कर्ज की तस्वीर लोकसभा में सामने आए। किसानों के कर्ज लेने के मामले में पंजाब देश में तीसरे स्थान पर है। यहां प्रति किसान परिवार औसतन 2,03,249 का कर्ज है। यह रकम राष्ट्रीय औसत 74,121 से लगभग तीन गुना अधिक है। यह खुलासा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट दौरान हुआ है। आंकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) से करवाए गए किसान परिवार स्थिति आकलन सर्वेक्षण 2019 पर आधारित हैं। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, देश के 28 राज्यों में किसानों पर औसत बकाया ऋण में भारी अंतर है। कुछ राज्यों में किसान अपेक्षाकृत कम कर्ज में हैं, तो कई कृषि प्रधान राज्यों में कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। महंगी मशीनरी, बढ़ता खर्च बढ़ते कर्ज के अहम कारण पंजाब में किसानों पर बढ़ते कर्ज के पीछे कई गंभीर और संरचनात्मक कारण हैं। खेती खर्च बढ़ रहा है, आमदन कम हो रही है। आधुनिक और उच्च क्षमता वाली मशीनरी, बड़े ट्रैक्टर और प्लांटेशन उपकरण खरीदने के लिए किसानों को ऋण लेना पड़ता है। सोशल कंजप्शन भी बढ़ रही है। बच्चों की महंगी शिक्षा, परिवार का महंगा इलाज और घरेलू फंक्शन भी किसान को कर्ज में धकेल रहे हैं। खेती में सरकार का पब्लिक निवेश कम हो रहा है। किसान को हर छोटी बढ़ी समस्या पर कर्ज लेना पड़ता है। आंध्र प्रदेश पहले और हरियाणा चौथे नंबर पर राज्य प्रति किसान परिवार औसत कर्ज आंध्र प्रदेश 2,45,554 केरल 2,42,482 पंजाब 2,03,249 हरियाणा 1,82,922 तेलंगाना 1,52,113 कर्नाटक 1,26,240 राजस्थान 1,13,865 तमिलनाडु 1,06,553 हिमाचल प्रदेश 85,825 महाराष्ट्र 82,085 (राशि रुपए में) {पंजाब में किसान परिवारों पर कर्ज राष्ट्रीय औसत 74,121 से लगभग तीन गुना अधिक डॉ. आर एस घुम्मण,कृषि विशेषज्ञ