मऊ जिले के बड़राव गांव के अनुपम मौर्य ने परंपरागत खेती से हटकर मचान विधि से टमाटर की खेती शुरू की है। इंटरमीडिएट के बाद आईटीआई की पढ़ाई कर रहे अनुपम ने इस व्यवसाय को सफलतापूर्वक स्थापित किया है, जिससे उन्हें अच्छी कमाई हो रही है और वे अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। अनुपम मौर्य पिछले तीन-चार वर्षों से बेली किंग और अविनाश किस्म के टमाटरों की मचान विधि से खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन किस्मों के फल बेहतर गुणवत्ता वाले होते हैं और देसी स्वाद के साथ आते हैं। प्रत्येक टमाटर का वजन 80 से 90 ग्राम होता है। यह खेती उनके लिए पूरी तरह से लाभदायक साबित हुई है। अनुपम ने सितंबर महीने में पौधों का रोपण किया था और तीन महीने बाद से फलों की कटाई शुरू कर दी, जो अभी भी जारी है। अनुपम एक बीघा क्षेत्र में टमाटर की खेती कर रहे हैं, जिसकी लागत लगभग 1 लाख रुपये आई थी। मचान विधि से खेती करने के कारण टमाटर के पौधे 5 से 6 फुट तक लंबे होते हैं, जिससे फलों की पैदावार अधिक होती है। अब तक वे बाजार में 100 कैरेट से अधिक टमाटर बेच चुके हैं। एक कैरेट में 25 किलो टमाटर आता है। वे हर दूसरे दिन फसल की कटाई करते हैं, जिसमें प्रति कटाई लगभग दो से ढाई क्विंटल फल प्राप्त होते हैं। बाजार में टमाटर 300 रुपये प्रति कैरेट के भाव से बिक रहा है। अनुपम ने बताया कि उन्होंने पूरी तरह से जैविक विधि से खेती की है, जिससे टमाटर का स्वाद बेहतर और स्वादिष्ट होता है। देसी स्वाद के कारण इन टमाटरों की बाजार में काफी मांग है और ये आसानी से बिक जाते हैं।