भास्कर न्यूज | जालंधर खाड़ी युद्ध के कारण सिर्फ अमरीका-ईरान को जाने वाला सामान ही प्रभावित नहीं हुआ है बल्कि संपूर्ण खाड़ी देशों का एक्सपोर्ट ठप हो गया है। जालंधर के इंडस्ट्री संचालक कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी, सप्लाई चेन टूटने, महंगे समुद्री जहाजों के किरायों में घिर गए हैं। फैक्ट्रियां चालू रखने के लिए जो कच्चे माल के रूप में प्लास्टिक दाना, रेजिन, रबड़-पीवीसी आदि की जरूरत है, इनकी कीमतें भी बढ़ी हैं व सप्लाई भी धीमी हो गई है। जालंधर के कारोबारियों ने केंद्र व राज्य सरकार से मदद मांगी है। कारोबारी संगठन का कहना है कि अति छोटे, छोटे व मध्यम उद्योगों के लिए विशेष राहत पैकेज और ब्याज माफी की घोषणा हो। जालंधर आटो पार्ट्स मेन्युफेक्चर्स एसोसिएशन के चेयरमैन बलराम कपूर ने बताया कि युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता आई है, जिससे डीजल महंगा हो गया है। इंडस्ट्रीयल डीजल 22 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है, जिससे कारखानों का लागत मूल्य बढ़ गया है। इंडस्ट्रियल गैस की किल्लत और शिपिंग रूट में बदलाव के कारण उत्पादन लागत कई गुना बढ़ गई है। समय पर डिलीवरी न होने से विदेशी ग्राहकों का भरोसा डगमगा रहा है। दूसरी तरफ पीएचडी चेंबर के कन्वीनर और जामा के प्रधान संजीव जुनेजा ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस स्थिति का सबसे बुरा असर छोटे उद्योगों पर पड़ रहा है। ऑर्डर में देरी और उत्पादन में कमी के कारण अब आर्थिक अस्तित्व का खतरा पैदा हो गया है। उधर, सीआईआई जालंधर के पूर्व चेयरमैन बरिंदर कालसी ने कहा कि इस संकट ने हमारी निर्यात व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है और अब सरकार के ठोस कदम ही उद्योगों को सहारा दे सकते हैं। सीआईआई की स्टेट कमेटी के मैंबर व संगठन सेक्रेटरी जनरल सेक्रेटरी तुषार जैन के अनुसार, समुद्री रास्तों में असुरक्षा के कारण निर्यात शिपमेंट बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। वहीं ट्रेजरर मनीष क्वात्रा ने कहा कि पेमेंट साइकिल रुकने से कारोबारियों पर बैंक ब्याज और देनदारियों का बोझ बढ़ रहा है। जालंधर की इंडस्ट्री पर असर लॉजिस्टिक्स और शिपिंग में बाधाएं : लाल सागर और स्वेज नहर के व्यापारिक मार्ग असुरक्षित हो गए हैं। अब वैकल्पिक रास्तों से मालवाहक शिप गुजर रहे हैं। कई जहाजों को अब दक्षिण अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से होकर जाना पड़ रहा है। यूरोप और अमेरिका जाने वाले माल की डिलीवरी में 10 से 15 दिन की देरी हो रही है। माल ढुलाई और बीमा : शिपिंग की लागत में 25-30% की वृद्धि हुई है। जोखिम बढ़ने के कारण बीमा प्रीमियम भी काफी बढ़ गया है। कंटेनर का इंतजार: जहाजों के देरी से पहुंचने के कारण बंदरगाहों पर खाली कंटेनरों का इंतजार लंबा हो रहा है, जिससे जालंधर के छोटे उद्यमियों के लिए समय पर माल भेजना मुश्किल हो रहा है। स्पोर्ट्स इंडस्ट्री : जालंधर में खेल सामान बनाने वाले छोटे-मध्यम को मिलाकर 400 यूनिट हैं। इसके कच्चे माल के रूप में सिंथेटिक रबड़, प्लास्टिक और रेजिन की कीमतें बढ़ने लगी हैं, क्योंकि ये पेट्रोलियम आधारित उत्पाद हैं। तेल की कीमतों में अस्थिरता है। बाजार में झिझक : यूरोप और मध्य पूर्व के खरीदार अब नए ऑर्डर देने में सावधानी बरत रहे हैं, जिससे नए ऑर्डर्स में कमी आई है। हैंड टूल्स : जालंधर में हैंडटूल इंडस्ट्री लोहा पिघलाने के लिए एलपीजी पर निर्भर है। जालंधर की कई इकाइयां हीट प्रोसेसिंग के लिए औद्योगिक एसपीजी का उपयोग करती हैं। एक्सपोर्ट कंपनियां : खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात की गति काफी धीमी हो गई है। सारे शिप माल लेकर खाड़ी देशों से होकर आगे जाते थे। उनका सफर प्रभावित हुआ। चमड़ा उद्योग: कच्चे माल में शामिल केमिकल,रबड़,कच्चेमाल के रेट बढ़े। चीन-इतली से आने वाले टैनिंग में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के रेट बढ़े। भुगतान में देरी: बंदरगाहों पर माल फंसे होने का मतलब है कि 45 दिनों का भुगतान चक्र टूट गया है, जिससे बैंक ऋणों पर ब्याज का बोझ बढ़ रहा है। . गैस आपूर्ति: इंडस्ट्रियल गैस की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की जाए। जल राहत : उद्योगों के लिए डीजल की कीमतों में स्थिरता या विशेष छूट दी जाए। . शिपिंग कॉरिडोर : निर्यात के लिए सुरक्षित और सुचारू व्यवस्था बनाई जाए। . आर्थिक पैकेज : अति छोटे, छोटे व मध्यम उद्योगों के लिए विशेष राहत पैकेज और ब्याज माफी की घोषणा हो।