केंद्र ने चंडीगढ़ के बजट में की कटौती:6983.18 करोड़ रुपए मिले, पिछले साल से 6.27% कम; नगर निगम की 36% की बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए चंडीगढ़ को कुल 6,545.52 करोड़ रुपए आबंटित किए। यह पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान 6,983.18 करोड़ रुपए से 437.66 करोड़ रुपए (लगभग 6.27%) कम है। बजट में राजस्व हिस्सा 5,939.52 करोड़ रुपए और पूंजीगत हिस्सा 606.00 करोड़ रुपए है। जबकि पिछले साल यह राजस्व 6,185.18 करोड़ और पूंजीगत 798.00 करोड़ था। हालांकि नगर निगम का बजट 36 फीसदी बढ़ा है। चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने बजट को अच्छा बताया है। उन्होंने कहा कि एसएमई क्षेत्रों लाभ मिलेगा। स्टार्टअप को बड़ा मिलेगा, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने बजट पर सवाल उठाए हैं। पावर सेक्टर में बड़ा बदलाव पावर सेक्टर में सबसे बड़ा एडजस्टमेंट देखने को मिला है। पिछले साल (BE 2025-26) में पावर के लिए 877.39 करोड़ रुपए का प्रावधान था, लेकिन पावर के निजीकरण (privatization) के कारण इसमें 720.44 करोड़ रुपये की कटौती कर इसे 156.95 करोड़ रुपए कर दिया गया इस संरचनात्मक बदलाव को ध्यान में रखते हुए, 2026-27 के बजट में प्रभावी रूप से 282.78 करोड़ रुपए (4.63%) की वृद्धि मानी जा रही है। एनर्जी सेक्टर के लिए अब कुल 189.67 करोड़ रुपए (2.90% शेयर) आबंटित हैं।
नगर निगम को 850 करोड़ रुपए मिले चंडीगढ़ नगर निगम को इस साल पिछले साल के 625 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 850 करोड़ रुपए मिले है, यानी 36% की भारी वृद्धि। इससे शहर की सफाई, बुनियादी ढांचे और अन्य नागरिक सुविधाओं को मजबूती मिलेगी। पीजीआई को 2559.65 करोड़ रुपए मिले चडीगढ़ स्थित पीजीआई को को केंद्र सरकार के बजट 2026-27 में कुल 2559.65 करोड़ रुपए है। यह पिछले साल के संशोधित बजट अनुमान (Revised Estimates) से 141.79 करोड़ रुपए ज्यादा है। यह बढ़ोतरी पीजीआईएमईआर के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि इससे अस्पताल बेहतर इलाज, रिसर्च और नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकेगा। यह बजट सैलरी और सामान्य खर्चों के लिए ग्रांट-इन-एड: 1450 करोड़ रुपए(पिछले साल के रिवाइज्ड से लगभग बराबर) है। जबकि सामान्य खर्चों (Grant-in-aid General) के लिए: 550 करोड़ रुपए (पिछले साल से 23 करोड़ ज्यादा) है। नई संपत्ति बनाने (Creation of Capital Assets) के लिए 390 करोड़ रुपए (पिछले साल के रिवाइज्ड 430 करोड़ से थोड़ा कम, लेकिन कुल मिलाकर मजबूत सपोर्ट)। इसी तरह SAP (विशेष प्रोग्राम) के लिए: 10 करोड़ रुपए (पिछले साल जितना ही)। माना जा रहा है कि यह अभी शुरुआती आबंटन है। आमतौर पर साल के बीच में नवंबर-दिसंबर में सप्लीमेंट्री ग्रांट्स से और पैसे मिलते हैं, जो खर्च के हिसाब से और नए कामों के आधार पर तय होते हैं। बजट फोकस और कमी को दिखाता है सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि चंडीगढ़ के बजट 2025–26 में 6,187 करोड़ का प्रावधान किया गया था, लेकिन संशोधित आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 5,556 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए। यानी 630 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि खर्च नहीं हो सकी। चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा बजट का सही उपयोग न होने के कारण बजट 2026–27 में चंडीगढ़ का आबंटन घटाकर 5,720 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसका सीधा असर शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक सुविधाओं पर पड़ेगा। यह वित्तीय अनुशासन (Fiscal Prudence) नहीं, बल्कि फोकस और योजना की कमी को दिखाता है। AAP बोलीं- बजट से बड़े कॉरपोरेट का फायदा आम आदमी पार्टी (AAP) चंडीगढ़ ने फाइनेंस बिल 2026 और चंडीगढ़ यूटी बजट 2026–27 की कड़ी आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि इन दोनों में मिडिल क्लास, छोटे व्यापारियों और आम लोगों को कोई राहत नहीं दी गई, जबकि बड़े कॉरपोरेट और अमीर वर्ग को फायदा पहुंचाया गया है। पार्टी के प्रेसिडेंट विजयपाल सिंह ने कहा कि यह बजट और फाइनेंस बिल कॉरपोरेट हितों के लिए दरवाजे खोलता है, जबकि आम लोगों छोटे दुकानदारों, नौकरीपेशा कर्मचारियों और पेंशनरों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। आम आदमी पार्टी इस जन-विरोधी बजट के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाएगी। इस बजट में आम नागरिक, छोटे व्यापारी और मिडिल क्लास के लिए कोई ठोस राहत नहीं है। यह बजट साफ तौर पर बड़े कॉरपोरेट और हाई-इनकम लोगों को फायदा पहुंचाने वाला है।

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