कैथल की नई अनाज मंडी में गेहूं की आवक जोरों पर है। मंडी गेहूं की ढेरियों और बैगों से पूरी तरह भर चुकी है, लेकिन अभी तक उठान का कार्य शुरू तक नहीं हो पाया है। नियमानुसार तो उठान का कार्य गेहूं की खरीद के साथ ही शुरू होना चाहिए था, लेकिन अभी तक बिकी हुई ढेरियों में से एक भी भी उठान नहीं हो पाया है। मंडी में फसल को बरसात इत्यादी से बचाने के लिए बनाए गए शेड गेहूं की ढेरियों और बोरियों से अटे पड़े हैं। खुले में भी पक्के फड़ पर अनाज की ढेरियां लगी हुई हैं। मंडी में जगह नहीं ऐसे में अब किसानों को फसल डालने के लिए भी मंडी में जगह नहीं मिल पा रही है। किसान या तो सड़कों पर फसल को डाल रहे हैं, या फिर कच्ची जगहों में फसल को डालकर बिक्री का इंतजार कर रहे हैं। इतना ही नहीं, किसानों को फसल के साथ साथ तिरपाल व फसल डालने के अन्य साधन भी खुद लाने पड़ रहे हैं। किसान जल्द से जल्द फसल का उठान करवाने की मांग कर रहे हैं। छह लाख क्विंटल गेहूं की आवक बता दें कि कैथल की अनाज मंडी में अब तक आवक छह लाख क्विंटल गेहूं की आवक हो चुकी है। इसमें ज्यादातर की खरीद भी हो चुकी है, लेकिन उठान अभी तक नहीं हो पाया है। किसानों का कहना है कि एक ओर तो मंडी में फसल डालने को जगह नहीं है। दूसरा मौसम भी खराब चल रहा है। ऐसे में उनको नुकसान का डर सता रहा है। मंडी में पहुंचे किसान शेरा बुढ़ाखेड़ा ने बताया कि वह कल मंडी में फसल लेकर आया था। अभी तक बिक्री नहीं हुई है। खेतों में और भी काम है। फसल डालने को जगह नहीं मिल रही। उठान का कार्य जल्द से जल्द शुरू करवाया जाना चाहिए। किसान शमशेर कुंडू ने बताया कि जिस प्रकार से कई दिनों से मौसम चल रहा है, उसको देखते हुए किसानों को डर सता रहा है कि कहीं मंडी में लाई गई फसल पर बारिश न हो जाए। अगर उठान साथ में होता रहे तो किसानों को शैडों के नीचे फसल डालने की जगह मिल जाती है। उठान जल्द से जल्द होना चाहिए। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक विरेंद्र कुमार ने बताया कि टेंडर न होने के कारण उठान में थोड़ी देरी हुई है। अब जिले की मंडियों में उठान का कार्य शुरू करवा दिया गया है। जल्द ही पूरी फसल का उठान करवा दिया जाएगा।