कैथल में गैस की किल्लत, फास्ट-फूड के रोजगार पर संकट:प्रवासी बोले- यही हालात रहे, तो घर लौट जाएंगे, MP-UP से आए थे

कैथल जिले में LPG गैस की किल्लत का बड़ा विपरीत प्रभाव रेहड़ी फड़ी वालों पर पड़ रहा है। रोजाना रेहड़ी लगाकर फास्ट फूड बेचने वाले लोगों को सिलेंडर न मिलने के कारण दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। विशेष कर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश से कैथल में आकर फास्ट फूड की रेहडी लगाने वाले प्रवासियों को सबसे ज्यादा दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। इस संबंध में रेहड़ी वालों ने यह तक कह दिया है कि अगर दिक्कत यूं ही बनी रही, तो उनका काम ठप हो जाएगा और उन्हें मजबूरन अपने घर को पलायन करना पड़ेगा। ब्लैक में दोगुना रेट उन्होंने बताया कि पहले जो सिलेंडर में हजार रुपए में ले लेते थे, आज उसके दो दो हजार रुपए मांगे जा रहे हैं। ऐसे में वे कहां जाए। सिलेंडर के रेट तो बढ़ गए, लेकिन वे अपने फास्ट फूड प्रोडक्ट का रेट नहीं बढ़ा सकते। अगर रेट बढ़ाते हैं, तो वह भी बिकेगा नहीं। ऐसे में उनको नुकसान के अलावा कुछ नहीं मिल रहा। हालत यही रहे, तो जल्द ही उन्हें अपने घरों को लौटना पड़ सकता है। कहा- काम बंद कर घर लौट जाएंगे अंबाला रोड पर फास्ट फूड की रेहड़ी लगाने वाले ग्वालियार मध्यप्रदेश निवासी रामेंद्र ने बताया कि वह कैथल में 15 साल से काम कर रहा है। सिलेंडर असल तो मिल नहीं रहा। अगर मिलता है तो दो दो हजार रुपए में ब्लैक में मिल रहा है, जिसे वे खरीदने में सक्षम नहीं हैं। लॉकडाउन में भी उनको घर वापस लौटना पड़ा था। अब फिर से वही हालात बनते नजर आ रहे हैं। काम बंद कर घट लौट जाएंगे। ग्वालियार मध्यप्रदेश के पंकज बताते हैं कि गैस सिलेंडर मिल ही नहीं रहा। उन्होंने कई एजेंसियों में पता किया है। फास्ट फूड की रेहड़ी पर पांच से 600 रुपए कमाई होती है। अगर वहीं गैस खरीदने में लगा देंगे, तो उनको क्या बचेगा। हालात और ज्यादा बिगड़े, तो घर चले जाएंगे। घर जाने के अलावा विकल्प नहीं उत्तर प्रदेश के लखनऊ के फास्ट फूड विक्रेता कमलेश ने कहा कि पहले सिलेंडर एक हजार रुपए तक मिल जाता था, लेकिन अब दो हजार में भी नहीं मिल रहा। अब सिलेंडर में थोड़ी सी गैस बची है। पता नहीं कब खत्म हो जाए। उसके बाद घर जाने का ही विकल्प बचता है। इस संबंध में जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक वीरेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में गैस की सप्लाई सुचारू है। केवल सिलेंडर की बुकिंग का समय बढ़ाया गया है। पहले 12 दिन में मिलता था, अब इसे 25 दिन किया गया है। उन्होंने जिलावासियों से अपील की कि गैस का अनावश्यक इस्तेमाल न करें।

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