क्या तेजस्वी ने 5 राज्यों के चुनाव में गठबंधन तोड़ा?:बंगाल में ममता को समर्थन, केरल में कांग्रेस के विरोधी लेफ्ट के साथ उतारे 3 उम्मीदवार

5 राज्यों (बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी) में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। बंगाल में राजद TMC के साथ तो कांग्रेस के खिलाफ है। वहीं, केरल में लालू यादव की पार्टी वामपंथी गठबंधन के साथ और कांग्रेस के विरोध में है। बाकी के तीन राज्य में राजद की खास मौजूदगी नहीं है। राजद बंगाल में चुनाव लड़ना चाहता था। ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने एक भी सीट नहीं दी। इसके बाद भी तेजस्वी उनका समर्थन कर रहे हैं। यहां कांग्रेस का मुकाबला TMC से है। मतलब, राजद कांग्रेस के खिलाफ है। वहीं, केरल में कांग्रेस के विरोध में सीपीआई और आरजेडी चुनाव लड़ रहे हैं। बंगाल में इंडिया गठबंधन की क्या हालत है? राजद किस पार्टी के साथ है? केरल में राजद ने कांग्रेस के खिलाफ किसके साथ गठबंधन किया है? पढ़िए रिपोर्ट..। पहले जानिए बंगाल की हालत, एकला चलो की राह पर ममता बनर्जी 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों ने मिलकर इंडिया गठबंधन बनाया था। TMC इसमें शामिल है, लेकिन बंगाल विधानसभा चुनाव में स्थिति उलट है। कांग्रेस का मुकाबला TMC से है। बंगाल में टीएमसी ने एकला चलो की नीति अपनाई है। इसने कांग्रेस या विपक्ष के किसी और पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया है। यह स्थिति तब है जब ममता बनर्जी इंडिया गठबंधन की बैठकों में खुद शामिल हुईं या अपने प्रतिनिधि भेजती रही हैं। 23 जून 2023 को पटना में इंडिया गठबंधन की बैठक हुई थी। इसमें ममता शामिल हुईं। बैठक में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, शरद पवार, उद्धव ठाकरे, अरविंद केजरीवाल, हेमंत सोरेन, अखिलेश यादव जैसे नेता भी शामिल हुए थे। अब बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी अकेली लड़ रही है। कांग्रेस व वाममोर्चा एक साथ हैं। कांग्रेस नेता अधीर रंजन ने पहले सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन वे अब वामदलों के साथ हैं। AIMIM और हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP (आम जनता उन्नयन पार्टी) ने गठबंधन बनाया है। टीएमसी और बीजेपी में बड़ी समानता यह है कि दोनों अपने दम-खम पर चुनाव मैदान में हैं। अब जानिए केरल की स्थिति, कांग्रेस के खिलाफ मैदान में राजद केरल में वामपंथी पार्टियों के गठबंधन LDF (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) की सरकार है। इसका नेतृत्व CPI (M) (Communist Party Of India (Marxist) कर रही है। गठबंधन में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, केरल कांग्रेस (एम), नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल शामिल हैं। तेजस्वी यादव ने केरल जाकर चुनाव प्रचार किया है। केरल में तेजस्वी बोले- सबसे गरीब राज्य से आया हूं केरल में तेजस्वी ने अंग्रेजी में भाषण दिया है। भाषण की शुरुआत में अपना परिचय लालू यादव के बेटे के रूप में देते नजर आए। एक सभा में कहा, ‘मैं बिहार से आया हूं, जो सबसे गरीब राज्य है। बिहार में हम केरल का उदाहरण देते हैं कि ऐसा राज्य बनना चाहिए।’ एक अन्य सभा में तेजस्वी ने कहा, ‘केंद्र सरकार केरल की उपेक्षा कर रही है। नरेंद्र मोदी केवल विदेश में व्यस्त हैं। उनकी राष्ट्र निर्माण में कोई दिलचस्पी नहीं है। वह चुनाव प्रचार में व्यस्त है।’ तेजस्वी यादव ने कहा, ‘केरल में हमलोगों का गठबंधन LDF के साथ है। पूरा भरोसा है कि LDF की जीत होगी। पिछले 10 साल में केरल में बहुत काम हुआ है। स्वास्थ्य और शिक्षा समेत कई मामलों में केरल काफी विकसित राज्य है। केंद्र सरकार ने केरल के साथ सौतेला व्यवहार किया है। कोई राहत पैकेज नहीं दिया। बाढ़ में भी मदद नहीं की।’ दूसरी ओर UDF कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन है। इसमें इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस (जॉसेफ) और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी शामिल हैं। यहां भाजपा को भारत धर्म जन सेना नाम की पार्टी का साथ मिला है। NDA केरल में तीसरी ताकत है। सीधी लड़ाई LDF और UDF के बीच है। केरल में कांग्रेस के विरोध में CPI और RJD केरल की राजनीति में CPI (M) के विरोध में कांग्रेस है। आरजेडी कांग्रेस के खिलाफ सीपीआई वाले गुट में है। केरल में आरजेडी की राजनीति पर गौर करें तो वर्ष 2000 के बाद से राजद ने यहां उपस्थिति दिखानी शुरू की। आरजेडी ने उन इलाकों को टारगेट किया है जहां उत्तर भारतीय (ज्यादातर बिहारी) बसे हैं। आरजेडी मुख्य रूप से कोच्चि, तिरुवनंतपुरम और कोझिकोड जैसे शहरों में एक्टिव है। इस इलाके में प्रवासी मजदूरों और उत्तर भारतीयों की संख्या अधिक है। तीन सीटों पर चुनाव लड़ रहे राजद के प्रत्याशी केरल में विधानसभा की 140 सीटें हैं। इसमें 3 सीटों (वडकारा, कुथूरम्बा और कल्पेट्टा) पर आरजेडी ने उम्मीदवार दिया है। वडकारा में एम.के. भास्करन, कूथुपरम्बा में पी. के. प्रवीण और कल्पेट्टा में पी.के. अनिल कुमार पार्टी के उम्मीदवार हैं। 2023 में तेजस्वी यादव ने केरल में अपनी पार्टी का विस्तार करते हुए लोकतांत्रिक जनता दल का विलय आरजेडी में कराया था। इसके लिए वह कोझिकोड गए थे। दिसंबर 2025 में हुए केरल के स्थानीय निकाय चुनाव में आरजेडी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 63 सीटें (वार्ड) जीती। यह केरल में आरजेडी की उपस्थिति के लिहाज से बड़ी सफलता मानी गई। ममता बनर्जी को बिना शर्त समर्थन दे रहे तेजस्वी बंगाल में ममता बनर्जी का विरोध सीपीआई और कांग्रेस दोनों से रहा है। उन्होंने दोनों से अकेले लड़ाई लड़ी। इस बार भी ममता का तेवर पहले वाला ही है। कह चुकी हैं कि बंगाल में इंडिया गठबंधन का कोई अस्तित्व नहीं। राजद इस गठबंधन में है। बंगाल में तेजस्वी ने बिना शर्त ममता को समर्थन दिया है। तेजस्वी के बारे में कहा जाता है कि कोलकाता में उनके ससुराल से जुड़े लोग रहते हैं। वे कोलकाता आते-जाते रहते हैं। 27 मई 2025 को कोलकाता के भागीरथी नेवटिया अस्पताल में तेजस्वी के पुत्र इराज लालू यादव का जन्म हुआ था। बंगाल और केरल में तेजस्वी की दो बड़ी ताकत बिहार में इंडिया गठबंधन में दरार, मुश्किल से बची विपक्ष के नेता की कुर्सी बिहार विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के दल साथ थे, लेकिन इसमें इतने पेच रहे कि कई सीटों पर गठबंधन के उम्मीदवारों के बीच फ्रेंडली फाइट हुई। कांग्रेस काफी देर से तेजस्वी को सीएम फेस घोषित करने पर मानी। वीआईपी जैसी क्षेत्रीय पार्टी से मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम फेस घोषित किया गया। किसी दलित को डिप्टी सीएम फेस घोषित नहीं किया गया। किसी मुसलमान को भी डिप्टी फेस घोषित नहीं किया गया। इंडिया गठबंधन इतना दरका रहा कि तेजस्वी यादव मुश्किल से नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी बचा पाए। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम सहित विधायक दल के नेता डॉ. शकील अहमद खान चुनाव हार गए। वीआईपी से तो एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीता। माले सहित तीनों लेफ्ट पार्टियों की भी हालत खराब हो गई। हाल में हुए राज्यसभा चुनाव में 5वीं सीट के लिए इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार एडी सिंह को कांग्रेस के तीन विधायकों ने वोट नहीं दिया। बंगाल और केरल की परिस्थितियां बिहार से अलग हैं। वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं, ‘गठबंधन उन्हीं का बनता है, जिनके बीच आपस में लाभ का लोभ रहता है। लोकसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी ने कहा था कि इंडिया गठबंधन चुनाव तक के लिए ही था।’ उन्होंने कहा, ‘बंगाल चुनाव में सीधी लड़ाई तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच है। वहां कांग्रेस, लेफ्ट नहीं चाहती कि ममता बनर्जी चुनाव जीते। ममता को इसकी परवाह भी नहीं कि कांग्रेस और लेफ्ट क्या सोचती हैं। बीजेपी को इसमें अपना फायदा दिख रहा है।’

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