होली पर्व के बीच बिहार में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ गई है। सियासी गलियारे में राज्यसभा जाने वालों के नामों की अटकलें लगाई जा रही है। इसमें एक नाम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का भी चल रहा है। संभावना है कि निशांत JDU कोटे से राज्यसभा जा सकते हैं। इन चर्चाओं को बल एक बार फिर JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के बयान से मिला। 1 मार्च को एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में झा ने कहा- हम सबकी चाहत है कि निशांत कुमार पार्टी में आकर काम करें। पार्टी संभालें। हालांकि, इसका निर्णय नीतीश कुमार और निशांत कुमार को लेना है। इस बीच खबर है कि केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और संजय झा ने बीते एक सप्ताह में निशांत कुमार से कई बार मुलाकात की है और उनको राज्यसभा जाने के लिए मनाने का प्रयास किया है। बताया तो यह भी जा रहा है कि निशांत ने अपनी सहमति जता दी है पर अंतिम फैसला नीतीश को लेना है। क्योंकि वो परिवारवाद की राजनीति बचते आ रहे हैं। सियासी गलियारों की चर्चा को सच मानें तो अगर निशांत राज्यसभा जाते हैं तो यह JDU और बिहार की सियासत के लिए बड़ी घटना होगी। क्यों बड़ी घटना होगी, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में जानें…। अगर निशांत राज्यसभा जाते हैं तो इसके 2 बड़े मायने 1. नीतीश रिटायर होने वाले हैं नीतीश कुमार 76वें साल में प्रवेश कर गए हैं। उनके साथ स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें है। ऐसे में समय-समय पर पार्टी के अंदर और बाहर उनके उत्तराधिकारी की मांग होती रहती है। JDU कार्यालय के बाहर भी कई मौकों पर नीतीश के बाद निशांत का नारा लिखा पोस्टर लग चुका है। 2. JDU का भविष्य तय निशांत कुमार के राज्यसभा जाते ही स्वतः JDU का भविष्य तय हो जाएगा। मतलब कि पार्टी नीतीश के बाद भी चलती रहेगी, खत्म नहीं होगी। फिलहाल पार्टी में कोई बड़ा नेता नहीं है। 2 पॉइंट में नीतीश ने निशांत को कैसे JDU की मजबूरी बनाया 1. सेकेंड लाइन नेताओं को किया किनारे 2003 में बनी JDU बीते 23 साल से नीतीश की छांव में ही चल रही है। नीतीश कुमार ही चेहरा हैं। दूसरे नंबर पर जरूर कुछ नेता पहुंचे, लेकिन वे लंबे समय तक टिक नहीं पाए या टिकने नहीं दिया गया। 2. प्रशांत के नाम से भाजपा निशांत पर मानी पिछले 30 सालों की बिहार की राजनीति को देखें तो यहां हमेशा तीसरी धुरी रही है। तीसरी धुरी का नेतृत्व नीतीश कुमार करते हैं।