16 मार्च को राज्यसभा चुनाव में RJD के फैसल रहमान और कांग्रेस के मनोहर प्रसाद सिंह समेत महागठबंधन के 4 विधायकों ने वोटिंग से दगा दिया। नतीजा-NDA ने सभी पांचों सीटें जीत लीं। अब 15 दिन बाद विपक्ष के बागी विधायकों को नीतीश सरकार ने सम्मान देना शुरू कर दिया है। बिहार विधानसभा स्पीकर डॉ. प्रेम कुमार ने बागी फैसल रहमान और मनोहर प्रसाद सिंह को एक-एक महत्वपूर्ण समिति का सभापति बनाया है। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने अपने तीनों विधायकों को शो-कॉज नोटिस तो थमा दिया, लेकिन असली कार्रवाई की जिम्मेदारी दिल्ली के आलाकमान पर डाल दी। और तेजस्वी यादव ने तो आज तक एक साधारण नोटिस तक जारी नहीं किया। सवाल- कांग्रेस और RJD अपने विधायकों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रही। क्या पार्टी अनुशासन से ज्यादा तेजस्वी यादव को नेता प्रतिपक्ष के बंगले का मोह सता रहा है। जानिए आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में… पूरा खेल, पूरा गणित और सियासी मजबूरी। सवाल-1ः राज्यसभा चुनाव में हुआ क्या था? पूरा मामला क्या है? जवाबः 16 मार्च को राज्यसभा की 5 सीटों के लिए वोटिंग हुई। सभी सीटों पर NDA के कैंडिडेट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश राम की जीत हुई। सवाल-2ः तेजस्वी यादव ने अपने विधायक पर क्या कार्रवाई की? जवाबः चुनाव बीते 15 दिन से ज्यादा हो गए, लेकिन तेजस्वी यादव ने अपने ढाका के विधायक फैसल रहमान पर कोई कार्रवाई नहीं की है। अब तक शोकॉज नोटिस तक जारी नहीं किया गया है। सवाल-3ः तेजस्वी ने अपने विधायक पर कार्रवाई क्यों नहीं की? जवाबः कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन एक बड़ा कारण प्रतिपक्ष की कुर्सी माना जा रहा है। इसे ऐसे समझिए… तेजस्वी यादव की RJD के अभी 25 विधायक हैं। बिहार में विधानसभा की 243 सीटें हैं। तेजस्वी को मिलती है मंत्री वाली सुविधा नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है। इस तरह तेजस्वी यादव को कैबिनेट मंत्री वाली सारी सुविधाएं मिल रही हैं। सरकारी बंगला और उन्हें हर महीने 2 लाख 60 हजार रुपए सैलरी मिलती है। यह घट-बढ़ सकती है। इसके अलावा कई सुविधाएं मिलतीं हैं… अगर नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी गई तो तेजस्वी से मंत्री वाली सुविधा वापस ले ली जाएगी। विधायक वाली सुविधा मिलेगी। सरकारी बंगला खाली करना पड़ सकता है। विधायक फ्लैट में जाना पड़ सकता है। सवाल-4ः कांग्रेस ने दगाबाज विधायकों पर क्या कार्रवाई की? जवाबः राज्यसभा चुनाव के दूसरे दिन बिहार कांग्रेस ने अपने 3 विधायकों सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, मनोज विश्वास और मनोहर प्रसाद सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अब प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने तीनों के जवाब को पार्टी आलाकमान को भेज दिया है। साथ ही पार्टी संविधान के मुताबिक कार्रवाई की अनुशंसा की है। प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति के प्रमुख कपिलदेव यादव ने कहा कि तीनों पर लगे आरोप और उनकी ओर से दिए गए जवाब के आधार पर पार्टी नेतृत्व इनके खिलाफ कार्रवाई के बारे में फैसला करेगा। सवाल-5ः कांग्रेस क्या अपने विधायकों पर सख्त कदम उठा सकती है? जवाबः अभी तक की ढुलमूल नीति से लगता तो नहीं है। इसके 2 बड़े कारण हैं। 1. RJD खुद अपने विधायक पर कार्रवाई करने में पीछे राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की तरफ से RJD (राष्ट्रीय जनता दल) ने अपना प्रत्याशी उतारा था। खुद RJD का एक विधायक वोटिंग से गायब रहा। पार्टी ने उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘जब RJD अपने प्रत्याशी से दगाबाजी करने वाले पर ही नरम है तो कांग्रेस अपने विधायकों पर क्यों कार्रवाई करेगी। ज्यादा संभव है कि पार्टी कोई सख्त कदम नहीं उठाएगी।’ 2. पार्टी जानती है- हमारी कार्रवाई से नहीं जाएगी सदस्यता बिहार में कांग्रेस के 6 विधायक हैं। चुनाव के 4 महीने बीत जाने के बाद भी आज तक विधायक दल का नेता नहीं चुना जा सका है। विधायक दल का नेता नहीं चुने जाने के चलते सचेतक (व्हिप) नहीं नियुक्त हो सका है।