खाड़ी देशों में युद्ध से बिगड़े हालात का असर:फरीदाबाद में मेडिकल टूरिज्म पर असर, कम हुए विदेशी मरीज, अस्पतालों की आय पर असर

खाड़ी देशों में युद्ध से बिगड़े हालात का असर फरीदाबाद समेत आसपास के शहरों के मेडिकल टूरिज्म पर दिखाई दे रहा है। शहर के अस्पतालों में खाड़ी देशों से आने वाले मरीजों की संख्या कम हुई है। फरीदाबाद खाड़ी के देशों के लिए चिकित्सा का प्रमुख केंद्र है। शहर के बड़े निजी अस्पतालों में सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, इराक व यूएई जैसे देशों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते थे। इनकी रोज की संख्या 10 से 15 होती थी। इनमें हृदय, किडनी ट्रांसप्लांट, ऑर्थोपेडिक सर्जरी व कैंसर रोग से जुड़े मरीजों की संख्या सबसे अधिक होती थी। लेकिन मौजूदा हालात व यात्रा से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण अब इन मरीजों का आना काफी कम हो गया है। अस्पतालों के अनुसार कुछ दिनों में विदेशी मरीजों की संख्या में 40 से 60 प्रतिशत तक कम हुई है। इसका सीधा असर अस्पतालों की आय पर पड़ रहा है। मेडिकल टूरिज्म से जुड़े विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है, क्योंकि कई जगह काम कम होने से स्टाफ की जरूरत भी घट रही है।
किफायती व बेहतर इलाज के लिए आते हैं विदेशी मरीज:
मेट्रो अस्पताल के आनकोलाजिस्ट डा. सुमंत गुप्ता का कहना है कि भारत में इलाज की लागत खाड़ी देशों के मुकाबले 60 से 80 प्रतिशत तक कम है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए आते थे। उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं, अनुभवी डॉक्टर और आधुनिक तकनीक ने फरीदाबाद को मेडिकल टूरिज्म के नक्शे पर मजबूत पहचान दिलाई थी।
यात्रा में हो रही परेशानी से कम हो रही मरीजों की संख्या:
जानकारी के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में सबसे बड़ी समस्या मरीजों की यात्रा और वीजा से जुड़ी अनिश्चितता बन गई है। कई देशों ने सुरक्षा कारणों से यात्रा पर प्रतिबंध या सख्त नियम लागू कर दिए हैं, जिससे मरीजों के लिए भारत आना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा युद्ध के कारण लोगों की प्राथमिकताएं भी बदल गई हैं और वे इलाज के लिए विदेश यात्रा को टाल रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने के बाद बढ़ेंगे मरीज:
डा. सुमंत गुप्ता का कहना है यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में मेडिकल सेक्टर को और भी बड़ा नुकसान हो सकता है। कई अस्पताल अब घरेलू मरीजों पर अधिक ध्यान देने और नई रणनीतियां बनाने पर काम कर रहे हैं ताकि नुकसान की भरपाई की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होंगे, मेडिकल टूरिज्म में फिर से तेजी आ सकती है। लेकिन फिलहाल खाड़ी देशों में बिगड़े हालात ने फरीदाबाद के स्वास्थ्य क्षेत्र की रफ्तार को धीमा कर दिया है। जिसका असर पूरे मेडिकल इकोसिस्टम पर देखने को मिल रहा है।

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