दिल्ली में एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान रोबोटिक डॉग को अपना अविष्कार बताने पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवादों में है। यूनिवर्सिटी ने ऐसा कर न सिर्फ अपनी, बल्कि देश की भी खूब किरकिरी कराई। गलगोटिया जैसी बड़ी यूनिवर्सिटी का पूरा स्टॉल बंद कर दिया गया। वहां की लाइट तक काट दी गई। बाद में यूनिवर्सिटी को माफी भी मांगनी पड़ी। यह मामला यूपी विधानसभा में भी उठा। पहले इसे जसराना से विधायक इंजीनियर सचिन यादव ने उठाया। फिर बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने भी इसका जिक्र किया। क्या है पूरा विवाद? विधानसभा में किसने क्या कहा? यूनिवर्सिटी इससे पहले कब-कब विवादों में रही? गलगोटिया यूनिवर्सिटी को मान्यता कब मिली? उस समय किसने विरोध किया था? सारे सवालों के जवाब पढ़िए… सबसे पहले पूरा मामला जानिए दिल्ली के भारत मंडपम में एआई समिट चल रहा था। देश-दुनिया की टेक कंपनियां, स्टार्टअप्स और संस्थान अपने एआई से जुडे़ अविष्कार दिखा रहे थे। इसी दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी के पवेलियन में रखा एक रोबोटिक डॉग लोगों के आकर्षक का केंद्र बन गया। वीडियो बनने शुरू हुए और तेजी से सोशल मीडिया पर क्लिप्स वायरल होने लगीं। धीरे-धीरे यह दावा फैलने लगा कि यूनिवर्सिटी ने इस रोबोट को बनाया है। इसे ओरियन नाम से पेश कर दिया। इंटरनेट पर कुछ पोस्ट में इसकी कीमत 350 करोड़ तक बता दी गई। जबकि, हकीकत बिल्कुल अलग थी। चाइना के एक आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस रोबोटिक डॉग को अपना बताने पर यूनिवर्सिटी की खिल्ली उड़ाई गई। इस खुलासे ने सोशल मीडिया पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी को विवादों में ला दिया। काम नहीं आई यूनिवर्सिटी की सफाई
विवाद बढ़ा, बेइज्जती हुई। इसके तुरंत बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने प्रेस रिलीज के जरिए बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि यूनिवर्सिटी ने कभी दावा नहीं किया कि यह रोबोट उन्होंने बनाया है। यह सिर्फ शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए चीन से खरीदा गया मॉडल है। जिसे छात्र सीखने और प्रयोग करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। यूनिवर्सिटी ने यह भी माना कि एक प्रतिनिधि ने कैमरे पर गलत जानकारी दे दी, क्योंकि उसे तकनीकी जानकारी नहीं थी। वह मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत भी नहीं थी। फिर भी उन्होंने बात की और वीडियो वायरल हो गया। उन्होंने इसे मानवीय गलती बताया, न कि संस्थागत इरादा। यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा छात्रों को दुनिया की एडवांस तकनीक से परिचित कराना रहा है। अमेरिका, चीन और सिंगापुर जैसे देशों की तकनीकें कैंपस में लाने का मतलब तकनीक इंपोर्ट करना नहीं होता, बल्कि छात्रों को ग्लोबल विजन देना होता है। रोबोटिक डॉग में क्या खास है?
यह एक कंज्यूमर लेवल एआई रोबोट डॉग है। जिसे दुनिया भर की यूनिवर्सिटी और रिसर्च लैब्स अपने छात्रों के लिए इस्तेमाल करती हैं। इस एडवांस रोबोटिक डॉग में रीडर, सेंसर, कैमरा और एआई बेस्ड मोशन कंट्रोल जैसी तकनीकें हैं। यह रोबोट चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का मॉडल है। इसका नाम है यूनिट्री जियो-2। इसे 2800 डॉलर (करीब ढाई से तीन लाख रुपए) में ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। विधानसभा में सपा ने उठाया मुद्दा
इस मामले को विधानसभा में फिराेजाबाद की जसराना विधानसभा सीट से विधायक सचिन यादव ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत उठाया। उन्होंने कहा कि एआई इंपैक्ट समिट 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चाइनीस प्रोडक्ट को अपना बताकर हमारे प्रदेश-हमारे देश का मजाक पूरे विश्व में बनाया है। यह कोई पॉलिटिकल मुद्दा नहीं, यह पूरे प्रदेश की निष्ठा का सवाल है। जब हमारी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज बन जाती हैं, तो इस तरह से देश के मंच पर हमारे प्रदेश का नाम बदनाम करने का काम करती हैं। उनकी जांच भी होनी चाहिए और उन पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। इस प्राइवेट यूनिवर्सिटी ने नौजवानों के टैलेंट से खिलवाड़ किया है। बिना वेरिफिकेशन के प्रोडक्ट कैसे एआई समिट में पहुंचा? ये कहीं ना कहीं गवर्नमेंट की भी जिम्मेदारी है कि फोटो शूट कराने के अलावा भी उसको काम करना चाहिए। उनको वेरिफिकेशन करना चाहिए था कि एआई समिट में जो प्रोडक्ट्स पहुंच रहे या जो यूनिवर्सिटीज पहुंच रहीं, क्या वो सचमुच रिसर्च करके अपने प्रोडक्ट्स बना रही हैं? इसकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए थी। उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर गहनता से जांच हो। इस विषय पर कठोर कार्रवाई की जाए। जिससे आगे से कोई भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी ऐसा कदम ना उठा पाए। डिग्री नहीं, दक्षता से देश आगे बढ़ता है
सपा के एक और विधायक पंकज मलिक ने इसी मुद्दे पर कहा था- डिग्री, नहीं दक्षता से देश आगे बढ़ता है। सच्चा शोध ही भविष्य का रास्ता तय करता है। इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी इतने बच्चे पढ़ते हैं। विश्वविद्यालय यूपी में स्थित है। इसकी जवाबदेही और निगरानी राज्य सरकार के दायरे में आती है। यह घटना हमारे देश के भविष्य पर सवाल खड़ा करती है। पंकज मलिक ने कहा था- हमारे यहां बहुत काबिल लोग हैं। एक यूनिवर्सिटी जो पैसे कमाने का अड्डा है, वो हमारे बच्चों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न नहीं लगा सकती। पंकज मलिक ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और समय पर जांच कराई जाए। संबंधित यूनिवर्सिटी से तथ्यात्मक स्थिति का स्पष्ट विवरण सदन के सामने रखा जाए। दोषी पाए जाने पर इनकी मान्यता रद्द की जाए। माता प्रसाद ने कहा था- हमने किया था विधेयक का विरोध
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने अपने बजट भाषण में कहा कि यूनिवर्सिटी इतनी फीस लेती हैं। गलगोटिया यूनिवर्सिटी को ही ले लीजिए। पता नहीं, कहां का कुत्ता लाके कहा कि हमने बनाया है। इसका जब विधेयक आया था, तब मैंने इसका विरोध किया था कि ऐसा मत करो। जितनी आप यूनिवर्सिटी दिए जा रहे हो, ये शिक्षा के विस्तार के लिए नहीं। ये पूंजीपतियों को बढ़ाने के लिए है। इससे शिक्षा कम बढ़ेगी, इनकी पूंजी ज्यादा बढ़ जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी से मांग की थी कि इसके लिए एक कानून बनाइए। एक औसत स्कूल की फीस निर्धारित कर दें। गलगोटिया यूनिवर्सिटी के पुराने विवाद ————————- ये खबर भी पढ़ें… शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद क्या यौन शोषण में जेल जाएंगे, पॉक्सो एक्ट में बच्चों का बयान ही काफी; दोषी हुए तो उम्र कैद की सजा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने यौन शोषण की FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश 2 नाबालिग बच्चों के आरोपों पर दिया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या सच में शंकराचार्य ने बच्चों का यौन शोषण किया? पॉक्सो कोर्ट के इस आदेश के बाद क्या होगा? पढ़ें पूरी खबर