गवाह ने गैंगस्टर लॉरेंस को पहचानने से किया इंकार:DAV कॉलेज फायरिंग केस में होस्टाइल घोषित, 6 आरोपी हो चुके बरी

चंडीगढ़ के सेक्टर-10 में स्थित डीएवी कॉलेज में साल 2012 में हुए हत्या के प्रयास और मारपीट के मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में बड़ा मोड़ आ गया। केस में पेश हुआ एक चश्मदीद गवाह अपने पहले दिए बयान से पलट गया। उसने कोर्ट में कहा कि वह आरोपी लॉरेंस को नहीं जानता और न ही पहचानता है। इसके बाद अदालत ने उसे होस्टाइल घोषित कर दिया। करीब 14 साल पहले दर्ज इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई चंडीगढ़ जिला कोर्ट में चल रही है। ट्रायल के दौरान गवाह नवनीत सिंह ने कोर्ट में बयान दिया कि वह न तो लॉरेंस को जानता है और न ही उसे पहचान सकता है। बताया गया कि बयान से मुकरने वाला गवाह शिकायतकर्ता का साथी था और घटना के समय मौके पर मौजूद था। बचाव पक्ष के वकील हरीश भारद्वाज के अनुसार आरोपी की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करवाई गई। स्टार नाइट के दौरान हुई फायरिंग पुलिस के मुताबिक मार्च 2012 में पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति से जुड़े दो छात्र संगठनों के समर्थकों के बीच विवाद हुआ था। शिकायतकर्ता अंकित ग्रोवर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि वह अपने साथियों के साथ पंजाब यूनिवर्सिटी गया था। जहां छात्र संगठन पूसू (पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन) के नेता जीवनजोत चहल को चेयरमैन घोषित किया गया था। इसके बाद सभी छात्र सेक्टर-10 स्थित डीएवी कॉलेज में आयोजित स्टार नाइट कार्यक्रम में पहुंचे। आरोप है कि स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पंजाब यूनिवर्सिटी (सोपू) से जुड़े युवकों का एक समूह, जिसका नेतृत्व लॉरेंस और अमनदीप सिंह मुल्तानी कर रहे थे, कॉलेज के पिछले गेट का ताला तोड़कर अंदर घुस आया। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने पूसू समर्थकों पर हमला कर दिया। इस दौरान गोली चलाने के साथ-साथ तेजधार हथियारों और डंडों से हमला किया गया। जिसमें कई छात्र घायल हो गए। हमले में पूसू सदस्य चरनदेव सिंह को गोली लगने का आरोप लगाया गया था। इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ केस घटना के बाद सेक्टर-3 थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 148 और 149 (हथियारबंद दंगा), 452 (जबरन प्रवेश), 323 एवं 325 (मारपीट) और 506 (आपराधिक धमकी) के अलावा शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। 6 आरोपी हो चुके बरी मामले में शिकायतकर्ता समेत कई गवाहों के अपने बयान से मुकर जाने के कारण सबूतों के अभाव में निचली अदालत ने 6 आरोपियों को बरी कर दिया था। इनमें अमनदीप सिंह मुल्तानी, विक्रमजीत सिंह, तरसेम सिंह और रणजोत सिंह शामिल हैं। अब इस केस में केवल लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ ही सुनवाई जारी है। उसे पहले भगोड़ा घोषित किया गया था। जनवरी 2022 में अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब मामले का ट्रायल चल रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *