गाजियाबाद में महिलाएं बोलीं-हम हाथ जोड़ते रहे, पुलिस पीटती रही:25 लोगों को आई चोट, डंपिंग ग्राउंड का विरोध कर रहे थे

गाजियाबाद में डंपिंग ग्राउंड को लेकर हुए बवाल के बाद किसान धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने रविवार को पूरी रात मीरपुर गांव के बाहर धरना दिया। जब वे प्रदर्शन कर रहे थे तो पुलिस उन्हें जबरन हटाने लगी। विरोध करने पर पुलिस से उनकी झड़प हो गई। पुलिस ने गाड़ियों में भरना शुरू किया तो किसान उग्र हो गए। भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। महिलाओं का कहना है कि विरोध करने पर पुलिस ने उन्हें खेतों में दौड़ा लिया। जब वे गिर गई तो घसीट-घसीट कर पीटा। इसमें कई महिलाएं और बुजुर्ग घायल हो गए। एक बुजुर्ग महिला तो बेहोश हो गई। उन्होंने भागकर जान बचाई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को डंपिंग ग्राउंड स्थल से हटाकर क्षेत्र खाली करा दिया। इसके बाद ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर स्थल से लगभग 100 मीटर दूर स्थित मंदिर परिसर में धरने पर बैठ गए। गांववालों का दावा है कि करीब 25 लोग घायल हुए हैं। एक महिला के सिर में गंभीर चोट लगी है, वहीं एक ग्रामीण का कूल्हा टूट गया। सोमवार को भी वे मीरपुर गांव के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं। उनका कहना है कि यहां डंपिंग ग्राउंड बनने से पूरे इलाके में बदबू फैलती है। लोग बीमार होते हैं। इस जमीन पर स्कूल या अस्पताल बनाया जाना चाहिए, न कि कूड़ाघर। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर फोर्स तैनात है। मामला ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र का है। देखिए 2 तस्वीरें.. अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला… 2 महीने से किसान दे रहे हैं धरना
मीरपुर में नगर निगम द्वारा यमुना नदी के खादर क्षेत्र के किनारे बनाए गए डंपिंग ग्राउंड के विरोध में किसान 2 महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां पूरे इलाके का कचरा डाला जाता है, जिससे आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है और लोगों के बीमार होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। डंपिंग ग्राउंड को हटाने की मांग को लेकर मीरपुर, पचायरा और बदरपुर गांवों के किसान करीब दो माह से नगर निगम के खिलाफ धरना दे रहे हैं।

पुलिस के साथ धक्का मुक्की हुई, किसानों ने विरोध में नारे लगाए रविवार को किसान अचानक डंपिंग ग्राउंड स्थल पर पहुंच गए। दोपहर करीब 2 बजे से ही माहौल तनावपूर्ण होने लगा। जैसे ही किसानों को जानकारी मिली कि पुलिस गिरफ्तारी के लिए ट्रक और वैन लेकर पहुंची है, प्रदर्शनकारियों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। आक्रोशित किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब पुलिस ने बल का प्रयोग किया। इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई और पुलिस के खिलाफ नारे लगाए गए। मौके पर चार थानों से आए 100 से अधिक पुलिसकर्मी लाठी के साथ तैनात थे, ताकि हालात को नियंत्रित किया जा सके। महिलाओं को भी गिराकर पीटा गया
इसी दौरान किसानों ने पथराव शुरू कर दिया। स्थिति बिगड़ने पर डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी और एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम के नेतृत्व में पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस घटना में करीब 25 लोग घायल हो गए। एक महिला के सिर में गंभीर चोट आई है, जबकि एक ग्रामीण का कूल्हा टूट गया। लाठीचार्ज से बचने के लिए कई किसान पास के गेहूं के खेतों में चले गए, लेकिन पुलिस ने वहां भी उन्हें दौड़ाकर पीटा। हंगामा बढ़ते ही नगर निगम के अधिकारी और मजिस्ट्रेट मौके से भाग गए। महिलाएं बोलीं- हम लोग हाथ जोड़ते रहे पुलिस पीटती रही महिलाओं ने बताया- पुलिस जब उन्हें उठा रही तो उन्होंने हटने से मना कर दिया इससे पुलिस वाले नाराज हो गए उन्होंने उन्हें दौड़ा लिया वे जान बचाने के लिए खेतों में भागी पुलिस वहां भी पहुंच गई वे पुलिस के आगे हाथ जोड़ती रही लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी उन्हें दौड़ाकर पीटा जब वे गिर गई तो जमीन पर घसीट कर पिटाई की इस घटना में कई महिलाओं को चोटें आई हैं भाजपा विधायक बोले- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बना डंपिंग ग्राउंड
लोनी विधानसभा से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कहा- मैं इस समय लखनऊ में हूं, जहां विधानसभा का सत्र चल रहा है। जो भी मामला है, उसे मौके पर आकर देखूंगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह डंपिंग ग्राउंड सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाया गया है, इसलिए इस पर वे कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति किसी भी हाल में बिगड़नी नहीं चाहिए। इस मामले में पुलिस अधिकारियों और किसानों, दोनों से बातचीत की जाएगी। किसान धन सिंह बोले- लाठीचार्ज में 25 से ज्यादा किसान घायल
पुलिस के लाठीचार्ज में 25 से ज्यादा किसान घायल हुए हैं। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। 70 साल के किसान धन सिंह ने कहा- पुलिसवाले हम पर ही पत्थर चलाने का आरोप लगा रहे हैं। जबकि हम पर लाठियां बरसाई गई हैं। मुझे कई जगह चोट लगी है। मेरे हाथ की उंगली टूट गई है। 65 साल की महिला की पुलिस ने वीडियो बनवाया और कहलवाया कि पुलिस ने आपको धक्का तो नहीं दिया। इसके बाद वृद्धा खुद घटना बताने में लगी। बराबर में महिला दरोगा भी खड़ी थीं। मीरपुर गांव के रहने वाले विनीत शर्मा बताया किसानों को चोट लगी है। कोई भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ। महिलाओं तक को नहीं बख्शा गया। किसान ने पुलिस बर्बरता के निशान दिखाए
एक किसान ने अर्धनग्न होकर ने पुलिस बर्बरता के निशान भी दिखाए। मीरपुर गांव में रहने वाले भूरा ने कहा कि हमें आकर अधिकारियों ने गाली दी और पीटा। किसी के हाथ फट गए तो किसी के कमर पर चोट लगी है। वहीं, एसीपी सिद्धार्थ गौतम का कहना है कि किसानों को समझाने का प्रयास किया गया। इसके बाद भी लोग नहीं माने। इसके बाद हंगामा करते हुए ईंट-पत्थर फेंके। इसमें 2 पुलिसकर्मी घायल हो गए। दोनों पुलिसकर्मियों को अस्पताल भेजा गया है। इसकी वीडियो भी सामने आया है। पुलिस ने हल्का प्रयोग कर लोगों को तितर-बितर किया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है। किसान बोला- बहुत बुरी तरह पीटा सोनू ने बताया- हमने तो अपने हाथ बांध रखे थे। पुलिस वालों ने हम पर लट्ठ बजाना शुरू कर दिया। बहुत बुरी तरह पीटा। पूरा घुटना और कमर सूजा पड़ा है। खड़े नहीं हो पा रहे हैं। पुलिस वालों ने हमारी मां को लट्ठ मारी। बताओ अब पुलिस मां को भी लट्ठ मारेगी। ACP बोले- लाठीचार्ज नहीं किया गया ACP लोनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया- आज मीरपुर में किसानों के एकत्र होने की बात सामने आई थी। किसानों को अधिकारियों को ज्ञापन देना था। इस बीच किसान डंपिंग ग्राउंड का ताला तोड़कर अंदर घुस गए। किसानों को हटाने में 2 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इन्हें उपचार के लिए भेजा गया है। मौके पर शांति व्यवस्था कायम है। इसमें आगे की कार्रवाई की जा रही है। पथराव की भी वीडियो फुटेज आए हैं। पुलिस की तरफ से लाठीचार्ज नहीं हुआ है। हल्का फोर्स का प्रयोग किया गया है। ————– ये भी पढ़ें- अखिलेश बोले- बहुजन समाज से पुराना रिश्ता…आगे भी काम करेंगे:नसीमुद्दीन को सपा जॉइन कराई; क्या मायावती को ऑफर दिया? पश्चिम यूपी में मुस्लिमों के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सपा का दामन थाम लिया है। रविवार को अखिलेश यादव उन्हें साथ लेकर लखनऊ में सपा कार्यालय पहुंचे। वहां पार्टी की सदस्यता दिलाई। नसीमुद्दीन के साथ 15,758 लोगों ने भी सपा जॉइन की। इसमें ज्यादातर बसपा कार्यकर्ता रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर… ——————

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