पंजाब में अगस्त 2025 में आई भयंकर बाढ़ से पाकिस्तान सीमा से सटे गुरदासपुर के दोरांगला ब्लॉक के सीमावर्ती गांव इस्लामपुर में भारी तबाही हुई थी। यहां लोगों के घर पानी की चपेट में आकर गिर गए थे और पशु बह गए थे। ऐसे बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए राधे मां आगे आईं। उन्होंने गांव को गोद लेकर वहां 54 लोगों को सीमेंट के पक्के मकानों की चाबियां खुद सौंपीं। इसके बाद लोग काफी खुश हैं। घर ही नहीं बनाए फर्नीचर का इंतजाम भी किया श्री राधे मां चैरिटेबल ट्रस्ट, दिल्ली द्वारा गांव में 54 घरों का पुनर्निर्माण करवाया गया और 15 अन्य घरों की मरम्मत की गई। इस दौरान घरों में फर्नीचर और रोजमर्रा के घरेलू सामान का भी प्रबंध किया गया। घरों के साथ-साथ गांव की गलियों और जलनिकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था को भी सुधारा गया, ताकि अगली बार बारिश का पानी घरों में न घुसे। मकान पूरी तरह फ्लैट की तरह प्रत्येक घर को एक छोटे परिवार की बुनियादी जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया गया है। हर घर में रहने के लिए पक्के कमरे बनाए गए हैं। अलग से रसोई की सुविधा दी गई है। स्वच्छता का ध्यान रखते हुए हर घर में निजी शौचालय और बाथरूम का निर्माण किया गया है। घरों के आगे छोटा बरामदा या खुला क्षेत्र भी रखा गया है। सभी घरों पर प्लास्टर और पेंट किया गया है, जिससे पूरा गांव अब एक व्यवस्थित कॉलोनी की तरह दिखाई देता है। घर पूरी तरह फ्लैट की तरह बनाए हैं।
रील देखते ही मदद का फैसला लिया था राधे मां का कहना है कि जब बाढ़ आई, तब वह इंस्टाग्राम पर रील देख रही थीं। इस दौरान उन्होंने लोगों के कच्चे मकान पानी में बहते देखे और पशुओं को भी पानी की चपेट में आते देखा। तभी उनके मन में गांव को गोद लेने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने कहा, “मैं जिंदादिल इंसान हूं और ऐसे काम आगे भी जारी रखूंगी।” उन्होंने युवाओं को नशा छोड़ने की सलाह दी है।