गुरुग्राम में डिप्टी मेयर चुनाव पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित:सरकार का तर्क-अभी पंचायत इलेक्शन चल रहे, याचिकाकर्ता बोला-इनसे कोई लेना-देना नहीं

गुरुग्राम जिला नगर निगम में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता अब न्यायिक दायरे में पहुंच गई है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिकाकर्ता एडवोकेट रोहित मदान ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों को सुना और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब कोर्ट के फैसले का इंतजार है और उन्हें उम्मीद है कि कोर्ट जनभावना का सम्मान रखते हुए जल्द चुनाव के आदेश जारी करेगी। दरअसल गुरुग्राम निवासी रोहित मदान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार एडवोकेट जनरल पेश हुए, जिन्होंने तर्क दिया कि अभी पंचायत उपचुनाव चल रहे हैं, उसके बाद का समय तय करते हैं। जिस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि उस चुनाव से इस चुनाव का कोई लेना देना नहीं है, क्योंकि पहले ही गुरुग्राम में चुनाव एक साल पेंडिंग हो चुके हैं। फाइनेंस कमेटी के गठन पर उठाए सवाल याचिकाकर्ता ने नगर निगम में फाइनेंस कमेटी के गठन को भी गलत बताया। उनका कहना है कि बिना सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के इन कमेटियों के गठन को औचित्य नहीं है। यह कमेटी काफी महत्वपूर्ण होती है। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट समय सीमा मांगी थी कि इन पदों पर चुनाव कब करवाए जाएंगे। 2025 में हुए थे निगम चुनाव गुरुग्राम नगर निगम (MCG) के चुनाव मार्च 2025 में संपन्न हुए थे, जिसमें भाजपा ने 36 में से 24 वार्डों पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया था। मेयर पद पर भी भाजपा प्रत्याशी की जीत हुई, लेकिन सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव आज तक नहीं हो सके। एडवोकेट रोहित के मुताबिक हरियाणा नगर निगम अधिनियम-1994 की धारा 36(2) के अनुसार, पार्षदों की अधिसूचना जारी होने के 60 दिनों के भीतर इन पदों का चुनाव अनिवार्य है। एक साल बीत जाने के बावजूद ये पद खाली पड़े हैं, जिससे निगम की कई महत्वपूर्ण समितियां प्रभावित हो रही हैं। दोनों पद सबसे महत्वपूर्ण याचिकाकर्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि इन पदों के अभाव में वित्त एवं संविदा कमेटी का गठन अवैध है, क्योंकि नियमों के अनुसार इन समितियों में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर की अनिवार्य भागीदारी होती है। इससे निगम के विकास कार्य, बजट आवंटन और ठेके देने की प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है। शहर के विकास को गति देने वाले कई प्रोजेक्ट्स लंबित हैं। समीकरणों में उलझी डिप्टी मेयर की राजनीति भाजपा सूत्रों के अनुसार अंदरूनी समीकरण और जातिगत-सामाजिक संतुलन को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। केंद्रीय मंत्रियों राव इंद्रजीत सिंह तथा प्रदेश के मंत्री राव नरबीर सिंह समर्थकों के बीच उम्मीदवारों के नाम पर खींचतान चल रही है। पिछले साल अगस्त में चुनाव की तारीख घोषित की गई थी, लेकिन ‘प्रशासनिक कारणों’ बताकर टाल दिया गया। मानेसर में भी कोर्ट के आदेश पर हुए थे चुनाव राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कोर्ट का दबाव भाजपा को जल्द फैसला लेने के लिए मजबूर कर सकता है। यदि सरकार समय पर चुनाव नहीं करवाती, तो कोर्ट निर्देश जारी कर सकता है। गुरुग्राम के विकास के लिए ये पद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर मेयर के साथ मिलकर नीतियां बनाते हैं और कार्यान्वयन सुनिश्चित करते हैं। लंबित चुनाव से शहर की प्रशासनिक मशीनरी प्रभावित हो रही है।

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