गोविंददेवजी मंदिर में अचानक रोने लगीं विधायक मैथिली ठाकुर:बोलीं- श्रद्धालुओं के भजन सुनकर इमोशनल हो गई, खुद को रोक नहीं पाई

जयपुर के गोविंददेवजी मंदिर में रविवार को दर्शन करने पहुंचीं लोक गायिका और विधायक मैथिली ठाकुर भावुक हो गईं। मंदिर में भजन गाते समय अचानक उनकी आंखों से आंसू निकलने लगे। उन्होंने कहा- पता नहीं मुझे क्या हो रहा है। भक्तों के भजन, घंटियों और तालियों की गूंज ने मन को इतना छू लिया। मैं खुद को संभाल नहीं पाई। बिहार के दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से विधायक और लोक गायिका मैथिली ठाकुर रविवार को अपने दोनों भाइयों के साथ गोविंददेवजी मंदिर पहुुंची थीं। यहां भजन गा रही थीं- आज तो नवेली राधा गौरी पूजन आई छ…तभी भावुक हो गईं। मैथिली के पूजा करने और भावुक होने का वीडियो सामने आया है। पहले देखें PHOTOS कहा- ऐसा लगा जैसे मन का बोझ हल्का हो गया गोविंददेवजी के दर्शन करने के बाद मैथिली ठाकुर ने कहा- आज तक मैंने ऐसा कभी महसूस नहीं किया था। जब मैं गोविंददेव जी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंची, तो वहां का वातावरण, भक्तों के भजन, घंटियों और तालियों की गूंज ने मन को इतना छू लिया कि मैं खुद को संभाल नहीं पाई। आंखों से आंसू बहन लगे। ऐसा लगा जैसे मन का सारा बोझ हल्का हो गया हो। ‘यूनिक रंग राजस्थान रंग रथ यात्रा’ कार्यक्रम में हिस्सा लेने जयपुर पहुंची थीं मैथिली मैथिली ठाकुर ‘यूनिक रंग राजस्थान रंग रथ यात्रा’ कार्यक्रम में हिस्सा लेने जयपुर पहुंची थीं, जहां शनिवार को उनका कंसर्ट था। कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान पर्यटन विभाग, कला एवं संस्कृति विभाग, रंग मस्ताने और राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। मैथिली ने इस दौरान भास्कर से खास बातचीत भी की थी, पढ़िए, प्रमुख अंश सवाल: गायकी से विधायकी का सफर कैसे देखती हैं? मैथिली ठाकुर: सब बहुत अच्छा लग रहा है। बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। कम उम्र में राजनीति में आई हूं तो ऐसा लगता है कि आगे बहुत कुछ सीखने का मौका मिलेगा। कई लोग मुझे गाइड करते हैं। अब समय भी ज्यादा है तो लोगों के लिए काम करने और उनकी सेवा करने का अवसर मिल रहा है। सवाल: सोशल मीडिया पर होने वाले ट्रोलर्स को कैसे जवाब देती हैं? मैथिली ठाकुर: नमस्कार करके। मुझे अच्छा लगता है, मैं इसे ज्यादा महत्व नहीं देती। सवाल: आपके पास बहुत लोग अपनी समस्याएं लेकर आते होंगे, उन्हें कैसे संभालती हैं? मैथिली ठाकुर: मुझे अच्छा लगता है कि लोग भरोसा करके अपनी समस्या बताते हैं। कोशिश रहती है कि मौके पर ही उनका समाधान हो जाए। जिन मामलों में तुरंत समाधान हो सकता है, उन्हें प्राथमिकता पर रखकर पूरा करने की कोशिश करती हूं। सवाल: मैथिली संगीत को आगे बढ़ाने के लिए क्या करना चाहती हैं? मैथिली ठाकुर: मेरे राज्य में बहुत सारे बच्चे हैं जो संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं। मैं चाहती हूं कि उनके लिए बड़ा संस्थान खुले ताकि उन्हें दिल्ली या मुंबई जाने की जरूरत नहीं पड़े। यह मेरा एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। एक कलाकार और जनप्रतिनिधि होने के नाते मैं अपने समुदाय के उन लोगों के लिए काम करना चाहती हूं जो संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं। सवाल: संगीत की शुरुआत कैसे हुई? मैथिली ठाकुर: मैंने अपने घर में अपने पिता से संगीत सीखा है। पिता अपनी जगह पर हैं, लेकिन जब वे सिखाने के लिए बैठते हैं तो बहुत अनुशासन के साथ सिखाते हैं। पापा ने अपना पूरा जीवन संगीत सीखने और सिखाने में बिताया है। उनसे ही मुझे संगीत की पहली सीख मिली। सवाल: बिहार में राजनीतिक हलचल भी देखी जा रही है। Nitish Kumar ने राज्यसभा के लिए नामांकन भरा है, ऐसे में नए मुख्यमंत्री की चर्चा भी शुरू हो गई है। इसे कैसे देखती हैं? मैथिली ठाकुर: मेरे राजनीति में आते ही बहुत सारी चीजें बहुत तेजी से हो रही हैं। अभी मैं खुद भी एक अलग चरण में हूं और बहुत कुछ देख-समझ रही हूं। हम जिनको देखते हुए बड़े हुए हैं, नीतीश कुमार जी, उनकी विदाई का क्षण भी हमारी आंखों के सामने आया। जब विधानसभा में उनका आखिरी दिन था और वह राज्यसभा के लिए नामांकन कर रहे थे, उस समय हम सब भावुक थे। हम सभी के मन में उनके लिए बहुत सम्मान है। उस दिन कई लोग मजबूत दिखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आंखों से आंसू अपने आप आ रहे थे। सवाल: नीतीश कुमार करीब 20 साल से बिहार की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। इस दौर को आप कैसे देखती हैं? मैथिली ठाकुर: यह बहुत बड़ा विषय है, जिस पर कई राजनीतिक विशेषज्ञ लंबी चर्चा कर चुके हैं। मैं अगर इस पर कुछ कहूं तो वह बहुत छोटा होगा। लेकिन इतना जरूर कहूंगी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को जिस तरह संभाला, उससे लोगों के मन में आत्मविश्वास आया। पहले कई लोग खुद को बिहारी कहने में हिचकते थे। स्कूल के समय की बात है, तब लोग मजाक उड़ाते थे। लेकिन अब हम गर्व से कहते हैं कि हम बिहार के रहने वाले हैं। यह आत्मसम्मान हमें मिला है।

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