चंडीगढ़ में 75 करोड़ रुपये के चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) क्रेस्ट घोटाले और नगर निगम में स्मार्ट सिटी फंड से जुड़े लगभग 116.84 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कर रही है। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में प्रशासन और नगर निगम के कई बड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आ रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में रिमांड पर लाए गए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि, रिलेशनशिप मैनेजर अभय सिंह और उसकी पत्नी स्वाति सिंगला को आरोपी विक्रम वधावा के आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की, जिसमें कई बड़े अफसरों के नामों का खुलासा हुआ है। सूत्रों से पता चला कि आरोपियों ने CREST के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह का नाम भी लिया है। सुखविंदर सिंह ही इस मामले में शिकायतकर्ता है, जिसका नाम सामने आने पर सभी को चौंका दिया है। इसके अलावा और भी बड़े अफसरों के नाम शामिल होने का दावा किया जा रहा है। पुलिस ने इस मामले में अभी तक सुखविंदर को आरोपी नहीं बनाया है। अभी तक गिरफ्तार आरोपियों ने ही पुलिस पूछताछ में सुखविंदर का नाम लिया है। आरोप है कि करोड़ों रुपये रिश्तेदारों और शेल कंपनियों में लगाए गए हैं। नाम सामने आने पर विभाग में हलचल चंडीगढ़ पुलिस की पूछताछ में जैसे ही नगर निगम और क्रेस्ट से जुड़े करोड़ों के घोटाले में प्रशासन और निगम के अधिकारियों के नाम सामने आए, उसके बाद चंडीगढ़ के विभागों में भी मंगलवार को पूरा दिन हलचल होती रही। लेकिन इसे लेकर कोई भी कर्मचारी या अफसर कुछ भी बोलने से बचता हुआ नजर आया। जबकि शुरू से ही इस मामले में कहा जा रहा था कि इतने करोड़ों के घोटाले बिना बड़े अफसरों के संभव नहीं हो सकते। छोटा कर्मचारी इतना बड़ा घोटाला कभी नहीं कर सकता, जब तक उस पर किसी बड़े अफसर का हाथ न हो। अब देखना यह है कि चंडीगढ़ पुलिस कब इन अफसरों के नामों का खुलासा करती है और इन सभी से पूछताछ के लिए समन जारी करती है। 272 संदिग्ध एंट्रियां, 31 लेनदेन पूरी तरह फर्जी जांच में कुल 272 संदिग्ध एंट्रियां सामने आई हैं, जिनमें से 31 लेनदेन पूरी तरह संदिग्ध पाए गए। ये ट्रांजैक्शन न तो अधिकृत अधिकारियों द्वारा किए गए थे और न ही इनके लिए नियमानुसार कोई मंजूरी ली गई थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ईमेल के जरिए भेजे गए कई बैंक स्टेटमेंट भी फर्जी पाए गए, जिनमें छेड़छाड़ कर घोटाले को अंजाम दिया गया। 600 पेज की रिपोर्ट में कई अधिकारियों के नाम स्मार्ट सिटी फंड घोटाले में चंडीगढ़ नगर निगम ने 600 से अधिक पन्नों की आंतरिक जांच रिपोर्ट EOW को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े कई अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस अब इन अधिकारियों की वित्तीय और प्रशासनिक भूमिका की गहन जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच के बाद कुछ अधिकारियों के नाम एफआईआर में शामिल किए जाने की तैयारी है। इससे साफ है कि जांच का दायरा अब सरकारी तंत्र के भीतर तक पहुंच चुका है। बैंक रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि CREST के खाते से बड़ी रकम कैपको फिनटेक सर्विसेज, विक्रम वाधवा के निजी खातों और मर्टल बिल्डवेल LLP में ट्रांसफर की गई। वाधवा इस कंपनी में पार्टनर और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता है। इन अवैध लेनदेन के चलते करीब 75.16 करोड़ रुपये की सीधी वित्तीय कमी सामने आई है, जबकि 2 फरवरी तक इस पर 7.88 करोड़ रुपये का ब्याज नुकसान भी दर्ज किया गया है। सरकारी खातों से पैसे निकालने की साजिश पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने सरकारी विभागों के खातों में जमा करोड़ों रुपये को अस्थायी निवेश के नाम पर निजी कंपनियों में लगाया और बाद में वापस डालने की योजना बनाई। वाधवा ने पूछताछ में बताया कि उसकी मुलाकात रिभव ऋषि से पंजाब नेशनल बैंक की सेक्टर-17 शाखा के कर्मचारी राकेश कुमार ऋषि के माध्यम से हुई थी। आरोप है कि रिभव ऋषि सरकारी खातों को संभालता था और वहीं से इस पूरे खेल की शुरुआत हुई। खुलासे से बचने के लिए बनाई गई एफडी जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में यह फैसला लिया गया था कि प्रोजेक्ट का पैसा नगर निगम के अन्य खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इसके बाद यह राशि नगर निगम के खाते में भी ट्रांसफर कर दी गई। इसके बावजूद अकाउंट ब्रांच की ओर से 116.84 करोड़ की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) बनवा दी गई। जबकि यह रकम पहले से ही निगम के सुरक्षित खातों में मौजूद थी। नियमों के अनुसार इस राशि की केवल एक एफडी बननी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय 11 एफडी बनाई गईं। हैरानी की बात यह है कि रिकॉर्ड में केवल एक ही एफडी की एंट्री दर्ज की गई, जिसे सही बताया जा रहा है। किसके संपर्क में था आरोपी चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लकी ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है, उनके मोबाइल फोन की एक साल की कॉल डिटेल निकाली जानी चाहिए। इसके अलावा उनके व्हाट्सएप मैसेज की भी पूरी जांच होनी चाहिए। ताकि पता चल सके कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था। उनका कहना है कि इतना बड़ा घोटाला निचले स्तर का अधिकारी नहीं कर सकता, इसलिए इसमें जिन अधिकारियों की भूमिका है, उनके नाम भी सामने आने चाहिए।