चंडीगढ़ आने वाले टूरिस्टों को अब महंगे होटलों का खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। वह चंडीगढ़ की आलीशान कोठियों में ठहर सकेंगे। यही नहीं, कोठी मालिकों को इससे न केवल कमाई होगी बल्कि उन्हें घरेलू दरों पर ही टैक्स और बिजली बिल देना होगा। घर को ‘कमर्शियल’ इकाई नहीं माना जाएगा। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ स्कीम शुरू करने की तैयारी में है। इसके लिए पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। प्रशासन 14 अप्रैल तक लोगों से इस संबंध में सुझाव मांगेगा। इसके बाद मंजूरी मिलने पर इस योजना को लागू किया जाएगा। इस नई पॉलिसी में क्या खास… ये 5 नियम तोड़ने पर एक्शन कैसे होगा रजिस्ट्रेशन
जो मकान मालिक अपने घर को इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करना चाहते हैं, उन्हें निर्धारित अथॉरिटी के पास एक निर्धारित फॉर्म और आवश्यक रजिस्ट्रेशन फीस के साथ आवेदन करना होगा। आवेदन मिलने के बाद अथॉरिटी इसे समिति को भेजेगी। यह समिति आपके घर का दौरा करेगी और वहां दी जाने वाली सुविधाओं और भोजन के स्तर की जांच करेगी। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया एक महीने में पूरी होगी। उसके बाद 3 साल के लिए यह अनुमति रहेगी। नियमों के उल्लंघन पर 20 हजार तक जुर्माना
अगर कोई मकान मालिक नियमों का उल्लंघन करता है, गलत जानकारी देता है या मेहमानों को तय सुविधाएं नहीं देता, तो उस पर ₹5,000 से लेकर ₹20,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, यदि मालिक किसी आपराधिक मामले में दोषी पाया जाता है या बार-बार नियमों की अनदेखी करता है, तो उसका पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) भी रद्द किया जा सकता है। पहले मिनी होटलों में बदल दिए थे घर
पहले यह योजना 2008 में लागू हुई थी, लेकिन योजना के तहत निर्धारित शर्तों का बड़े पैमाने पर पालन नहीं किया गया। कई मकान मालिकों ने पंजीकरण, सुविधाओं और संचालन से जुड़े नियमों की अनदेखी हुई। कई लोगों ने अपने घरों को पूरी तरह मिनी होटलों में बदल दिया। योजना के उद्देश्य के खिलाफ था, क्योंकि इसे केवल सीमित मेहमानों के लिए घरेलू वातावरण में ठहरने की सुविधा देने के लिए शुरू किया गया था। जिससे इसका पूरा कॉमर्शियल यूज होने लगा।