चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) की तरफ से जो डिमोलिशन ड्राइव चलाई जा रही है, उसमें प्रभावित लोगों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि अगर चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से इस तरह घर तोड़े जाने हैं तो वह हमें बता दें, हम खुद ही घर खाली कर देंगे। पूरी जिंदगी की कमाई से यह घर बनाया है। अब हमारे पास कभी आटा खरीदने के लिए पैसे नहीं होते तो कभी सब्जी खरीदने के लिए पैसे भी नहीं होते। इस डिमोलिशन के बाद नगर निगम की तरफ से जो पैसे लिए जाने हैं, वह चुकाने की हमारी औकात नहीं है। परिवार बड़ा तो बनाया कमरा स्थानीय निवासी विनोद भाटिया का कहना है कि उन्होंने करीब 25 साल पहले यह मकान खरीदा था। उस समय इस मकान में एक कमरा था। बाद में उनके बेटे की शादी हो गई। जरूरत के हिसाब से उन्होंने एक कमरा और बनाया लिया। उस समय प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। वह दिल के मरीज हैं और उनके 5 बार ऑपरेशन हो चुके हैं। प्रशासन की तरफ से अब की जा रही यह कार्रवाई उनसे सहन नहीं होती। यह कार्रवाई देखने के बजाय प्रशासन उन्हें मार दे ताकि उनके अंदर यह दर्द न रहे। प्रशासन को 25 साल पहले करनी चाहिए थी कार्रवाई कनाडा निवासी एक महिला ने बताया कि वह बचपन में यहीं पर पली हुई है। 3 साल पहले उसकी शादी हो गई थी तो वह कनाडा चली गई। अब वह अपने परिवार से मिलने आई तो उसे पता चला कि यह कार्रवाई की जा रही है। अगर प्रशासन को ऐसा ही करना था तो पहले कर दिया होता ताकि लोग इस तरह की गलती न करते। कोर्ट के आदेश में नहीं डिमोलिशन का शब्द इलाके में रहने वाले वकील सुनील कुमार का कहना है कि यह मामला हाई कोर्ट में था, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश में कहीं डिमोलिशन शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से इस मामले में लोगों के साथ धक्काशाही की जा रही है। इस मामले में राजनीति हो रही है, जो गरीब लोगों के साथ गलत है।