चंडीगढ़ में लैंड पूलिंग नीति लागू करने की मांग कर रहे किसानों को बड़ा झटका लग सकता है। प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि मौजूदा हालात में चंडीगढ़ में लैंड पूलिंग की जरूरत नहीं है। प्रशासन का कहना है कि शहर के विकास के लिए जो जमीन बची है, उसका उपयोग पहले से मास्टर प्लान के तहत तय है। ऐसे में नई लैंड पूलिंग नीति लागू करने की संभावना फिलहाल नहीं बनती। शहर में केवल 2500 एकड़ जमीन बची अधिकारियों के अनुसार पूरे चंडीगढ़ में अब केवल करीब 2500 एकड़ जमीन ही ऐसी बची है, जिसका अधिग्रहण होना है। इस जमीन के उपयोग की रूपरेखा पहले ही मास्टर प्लान में तय की जा चुकी है। इन 2500 एकड़ में से 700 से 800 एकड़ जमीन हरित क्षेत्र (ग्रीन एरिया) के रूप में सुरक्षित रखी जाएगी। इसके अलावा लगभग 250 से 300 एकड़ जमीन पर आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाने की योजना है। करीब 700 एकड़ भूमि शैक्षणिक संस्थानों, चिकित्सा सुविधाओं, वाणिज्यिक गतिविधियों और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित है। किसान बना रहे दबाव किसान लैंड पूलिंग नीति लागू कराने के लिए प्रशासन पर लगातार दबाव बना रहे हैं। उनका मानना है कि इससे उन्हें जमीन के बदले बेहतर मुआवजा और विकसित प्लॉट मिल सकते हैं। हालांकि प्रशासन का तर्क है कि मास्टर प्लान के अनुसार भूमि उपयोग पहले से निर्धारित है और भविष्य की परियोजनाओं के लिए जमीन सुरक्षित रखना जरूरी है। प्रशासन की मौजूदा योजना और मास्टर प्लान को देखते हुए शहर में लैंड पूलिंग नीति लागू होती नजर नहीं आ रही। इससे किसानों की उम्मीदों को झटका लगना तय माना जा रहा है।