चंडीगढ़ पुलिस की ऑपरेशन सेल ने गैंगस्टर लकी पटियाल के दो गुर्गे गिरफ्तार किए हैं। दोनों के पास से 2 देसी कट्टे और 3 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। वहीं खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपियों ने सेक्टर-9 में हुए प्रॉपर्टी डीलर चमनप्रीत नागरा उर्फ चिन्नी कुबाहेड़ी के हत्यारों को पैसों की मदद की थी। दोनों आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में और भी कई बड़े खुलासे किए हैं। आरोपियों की पहचान दीपक कुमार उर्फ दीपु निवासी पंचकूला और साहिल निवासी मोहाली के रूप में हुई है।दीपक कुमार के खिलाफ पहले भी मोहाली के कुराली थाने में नशा तस्करी का मामला दर्ज है। पुलिस के अनुसार वह नशे का आदी है। सेक्टर-26 से दबोचे आरोपी गैंगस्टर लकी पटियाल चंडीगढ़ में बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश रच रहा था, जिसके चलते वह अपने गुर्गों के जरिए रेकी करवा रहा था। इसका पता ऑपरेशन सेल के इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों को चला। इसके बाद डीएसपी विकास श्योकंद की सुपरविजन में हरिंदर सेखों और इंस्पेक्टर जसपाल की अगुवाई में टीम बनाई गई। टीम ने सेक्टर-26 के गोल्फ टर्न के पास नाकाबंदी कर दी और आसपास सिविल ड्रेस में पुलिस तैनात कर दी, क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि आरोपियों के पास हथियार हो सकते हैं। उसी दौरान दो संदिग्ध शख्स नाके से कुछ दूरी पर जाते दिखाई दिए, जिन पर पुलिस को शक हुआ और उन्हें रुकने का इशारा किया। लेकिन वे रुकने की बजाय भागने लगे, जिसके बाद पुलिस ने कुछ ही दूरी पर जाकर उन्हें पकड़ लिया। जब पुलिस ने उनकी तलाशी ली तो दीपक के पास से एक देसी कट्टा और 2 कारतूस, जबकि साहिल के पास से एक देसी कट्टा और 1 कारतूस बरामद हुआ। हत्यारों को खर्चे के लिए दिए पैसे चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी डीलर चमनप्रीत की हत्या मामले में आरोपियों को मदद करने वाले इन दोनों को पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया गया। दोनों के पास से एक-एक पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए। एक आरोपी ने पैसों की मदद की, जबकि दूसरे ने ट्रांसपोर्ट में सहयोग किया। जांच में सामने आया कि दीपक उर्फ दीपु बरवाला ने आरोपियों को पैसों की मदद की और रहने के लिए ठिकाना भी उपलब्ध कराया। जानकारी के अनुसार, प्रॉपर्टी डीलर चमनप्रीत की हत्या करने वाले आरोपियों को करीब 80 हजार रुपए खर्च के लिए दिए गए थे। इसके अलावा साहिल ने आरोपियों को आने-जाने में मदद की। क्लब मालिकों और कारोबारियों को धमकी पुलिस के मुताबिक आरोपी गैंग के इशारे पर ट्राइसिटी में क्लब मालिकों और कारोबारियों से वसूली करते थे। वे फोन कॉल और व्हाट्सऐप के जरिए धमकी देकर पैसे मांगते थे और कई बार खुद जाकर भी दबाव बनाते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि गैंग के कहने पर ये लोग अलग-अलग जगहों पर जाकर रेकी करते थे और संभावित टारगेट की जानकारी जुटाते थे। गिरफ्तारी वाले दिन भी ये चंडीगढ़ में क्लब संचालकों को डराने-धमकाने और वसूली करने के इरादे से आए थे। पुलिस को शक है कि अगर समय रहते इन्हें न पकड़ा जाता तो ये किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते थे।