चंडीगढ़ के मनीमाजरा में ज्वेलरी शॉप से 505 ग्राम सोना चोरी के मामले में सेशन कोर्ट ने आरोपी को मिली जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने आदेश दिया है कि आरोपी 15 दिनों के अंदर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करे, वरना कोर्ट उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करेगी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. हरप्रीत कौर की अदालत ने यह फैसला शिकायतकर्ता की ओर से दायर अपील पर सुनाया। अदालत ने पहले दिए गए उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी की जमानत रद्द करने की अर्जी खारिज कर दी गई थी। 505 ग्राम सोना चोरी का मामला मामले में मनीमाजरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर साल 2024 में दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता सौरव भुनिया ने आरोप लगाया था कि आरोपी पलाश साहू ने उसकी दुकान से 505 ग्राम सोना चोरी कर लिया। जांच के दौरान पुलिस ने 21 जून 2024 को पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के गांव गोपमहाल में छापा मारकर आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी को चंडीगढ़ कोर्ट में पेश करने के लिए पुलिस उसे कोलकाता एयरपोर्ट लाई, लेकिन फ्लाइट छूट जाने के कारण उसे पहले नजदीकी बरासात कोर्ट में पेश किया गया। अदालत में पेशी के बाद मिली थी जमानत बरासात कोर्ट ने क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए आरोपी को पश्चिम मेदिनीपुर के घाटल कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया। वहां अदालत ने आरोपी को अंतरिम डिफॉल्ट बेल दे दी और दो सप्ताह के भीतर चंडीगढ़ कोर्ट में पेश होने की शर्त रखी। इसके बाद आरोपी 6 जुलाई 2024 को चंडीगढ़ की अदालत में पेश हुआ, जहां उसे डिफॉल्ट बेल दे दी गई। पुलिस ने बाद में उसकी जमानत रद्द करने की अर्जी लगाई थी, लेकिन 4 सितंबर 2024 को यह अर्जी खारिज कर दी गई थी। 24 घंटे के नियम पर अदालत की टिप्पणी सेशन कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। इसलिए केवल इस आधार पर डिफॉल्ट बेल नहीं दी जा सकती कि उसे 24 घंटे के अंदर पेश नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि डिफॉल्ट बेल का अधिकार तभी बनता है जब जांच एजेंसी 60 या 90 दिनों की निर्धारित अवधि में जांच पूरी न करे। अदालत ने पहले के आदेश को रद्द करते हुए आरोपी की जमानत खत्म कर दी और उसे 15 दिन के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। आदेश में यह भी कहा गया कि तय समय में सरेंडर न करने पर ट्रायल कोर्ट आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा।